चंडीगढ़/फरीदाबाद: हरियाणा में अब जमीन-जायदाद की रजिस्ट्री के लिए न तो आपको घंटों लाइन में लगना होगा और न ही सरकारी दफ्तरों की सीढ़ियां चढ़नी होंगी। राज्य सरकार ‘पेपरलेस’ के बाद अब ‘फेसलैस’ गवर्नेंस की दिशा में एक ऐसा बड़ा कदम उठाने जा रही है, जो जमीन की खरीद-फरोख्त के पूरे अनुभव को बदल कर रख देगा।
हरियाणा की वित्त आयुक्त (राजस्व एवं आपदा प्रबंधन) डॉ. सुमिता मिश्रा ने घोषणा की है कि राज्य में ‘फेसलैस प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन सिस्टम’ का आगाज होने जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए औद्योगिक नगरी फरीदाबाद को चुना गया है, जहां मार्च 2026 के अंत तक इस पायलट प्रोजेक्ट को जमीन पर उतार दिया जाएगा।
क्या है ‘फेसलैस’ सिस्टम और आपको क्या होगा फायदा?
अक्सर देखा जाता है कि रजिस्ट्री के दौरान फिजिकल वेरिफिकेशन और अधिकारियों के सामने पेश होने की प्रक्रिया में न केवल समय बर्बाद होता है, बल्कि भ्रष्टाचार की गुंजाइश भी बनी रहती है। नई व्यवस्था के तहत:
- मानवीय हस्तक्षेप शून्य: खरीदार और विक्रेता को किसी अधिकारी के सामने भौतिक रूप से उपस्थित होने की जरूरत नहीं होगी।
- बिचौलियों की छुट्टी: पूरी प्रक्रिया डिजिटल होने से पारदर्शिता आएगी और ‘सुविधा शुल्क’ जैसी शिकायतों पर लगाम लगेगी।
- क्लाउड सिक्योरिटी: यह पूरा सिस्टम भारत सरकार के ‘मेघराज’ (MeghRaj) क्लाउड पर होस्ट किया जाएगा, जिससे आपका डेटा पूरी तरह सुरक्षित रहेगा।
फरीदाबाद में 3 महीने का लिटमस टेस्ट
डॉ. सुमिता मिश्रा के अनुसार, इस सिस्टम को पहले फरीदाबाद की एक तहसील में ट्रायल के तौर पर शुरू किया जाएगा। अगले 3 महीनों तक इसकी बारीकियों और तकनीकी चुनौतियों पर नजर रखी जाएगी। अगर यह प्रयोग सफल रहता है—जिसकी पूरी संभावना है—तो इसे पूरे हरियाणा में लागू कर दिया जाएगा।
प्रशासनिक सुधार का नया चेहरा
यह सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि आम नागरिक और प्रशासन के बीच के रिश्ते को बदलने की कोशिश है। हरियाणा सरकार का लक्ष्य है कि सर्विस डिलीवरी को इतना ‘स्मूथ’ बनाया जाए कि आम आदमी को महसूस हो कि सरकार उसके द्वार पर है। डिजिटल इंडिया के इस दौर में, हरियाणा का यह ‘फेसलैस’ मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए एक नजीर बन सकता है।
