चंडीगढ़: हरियाणा के खेतों की सेहत अब सीधे किसानों के मोबाइल फोन तय करेंगे। प्रदेश के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने राज्य की खेती को एक नई दिशा देने के लिए कमर कस ली है। हाल ही में कृषि और बागवानी विभाग के शीर्ष अधिकारियों के साथ हुई एक हाई-प्रोफाइल बैठक में मंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि अब खेती केवल परंपरा के भरोसे नहीं, बल्कि ‘मिट्टी की कुंडली’ (सॉइल रिपोर्ट) के आधार पर होगी।
खतरे में मिट्टी की उर्वरता: क्यों बदला जा रहा है पैटर्न?
अक्सर देखा गया है कि किसान साल-दर-साल एक ही फसल चक्र को दोहराते हैं। बैठक के दौरान मंत्री राणा ने इस पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने अधिकारियों को आगाह किया कि लगातार एक ही तरह की फसल उगाने से मिट्टी के खास पोषक तत्व खत्म हो रहे हैं, जिससे उपजाऊ जमीन धीरे-धीरे बंजर होने की कगार पर पहुँच रही है।
मंत्री का नया निर्देश: अब अधिकारियों को सिर्फ मिट्टी की जांच ही नहीं करनी होगी, बल्कि रिपोर्ट के आधार पर किसानों को उनके मोबाइल पर मैसेज भेजकर यह भी बताना होगा कि उनके खेत के लिए कौन सी फसल ‘संजीवनी’ साबित होगी और किस पोषक तत्व की कमी है।
कम पानी, ज्यादा मुनाफा: ‘क्रॉप रोटेशन’ पर जोर
बैठक में ‘नया फसल चक्र’ अपनाने पर विशेष चर्चा हुई। मंत्री ने अधिकारियों को सुझाव दिया कि किसानों को ऐसी फसलों की ओर मोड़ा जाए जो कम पानी में तैयार हो सकें। इससे न केवल गिरते भूजल स्तर को बचाया जा सकेगा, बल्कि किसानों की लागत कम होगी और आमदनी में इजाफा होगा।
बीमा और सम्मान निधि: फाइलों में न अटके किसानों का हक
प्रशासनिक अमले को सख्त हिदायत देते हुए राणा ने कहा कि ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि’ और ‘कृषि बीमा योजना’ से जुड़ी किसानों की समस्याओं का निपटारा तुरंत होना चाहिए। बैठक में प्रधान सचिव पंकज अग्रवाल और निदेशक राजनारायण कौशिक सहित कई दिग्गज अधिकारी मौजूद रहे, जिन्हें जमीन पर जाकर योजनाओं का फीडबैक लेने को कहा गया है।
