नई दिल्ली/क्षेत्रीय डेस्क: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की प्रतिष्ठा और परीक्षाओं की सुचिता को बनाए रखने के लिए इस रविवार प्रशासनिक अमला पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। 8 फरवरी को होने वाली ‘इंजीनियरिंग सर्विसेज’ और ‘संयुक्त भू-वैज्ञानिक’ प्रारंभिक परीक्षा-2026 को लेकर जिले में सुरक्षा के ऐसे इंतजाम किए जा रहे हैं कि परिंदा भी पर न मार सके।
जीरो टॉलरेंस की नीति: प्रशासनिक बैठक में कड़े निर्देश
तैयारियों का जायजा लेने के लिए एडिशनल लेबर कमिश्नर (ALC) कुशल कटारिया ने एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। न्यूज़रुम सूत्रों के अनुसार, बैठक का लहजा सख्त था। कटारिया ने स्पष्ट किया कि यूपीएससी की परीक्षाएं केवल एक चयन प्रक्रिया नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठा का सवाल हैं। इसमें किसी भी स्तर पर हुई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस बैठक में सेंटर सुपरवाइजरों से लेकर पुलिस, डाक विभाग और खुफिया इकाई (LIO) के अधिकारियों को एक ही मंत्र दिया गया— “गोपनीयता और समयबद्धता”। प्रशासन का मुख्य फोकस पेपर लीक जैसी आशंकाओं को शून्य करना और परीक्षा केंद्रों पर जैमर व बायोमेट्रिक उपस्थिति जैसी व्यवस्थाओं को पुख्ता करना है।
दो शिफ्टों का गणित: समय के पाबंद रहें अभ्यर्थी
इंजीनियरिंग और भू-वैज्ञानिक, दोनों ही श्रेणियों के लिए रविवार का दिन निर्णायक है।
- इंजीनियरिंग सर्विसेज: पहली शिफ्ट सुबह 9:00 से 11:30 और दूसरी दोपहर 2:00 से शाम 5:00 बजे तक।
- भू-वैज्ञानिक परीक्षा: पहली शिफ्ट समान समय पर होगी, लेकिन दूसरी शिफ्ट दोपहर 2:00 से 4:00 बजे तक ही रहेगी।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा केंद्र पर देरी से पहुंचने वाले उम्मीदवारों को किसी भी कीमत पर प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
344 अभ्यर्थियों की किस्मत का फैसला
इस बार जिले के दो प्रमुख केंद्रों पर कुल 344 मेधावी अपनी किस्मत आजमाएंगे। संख्या कम होने के बावजूद, प्रशासन सुरक्षा को लेकर कोई जोखिम नहीं उठा रहा है। ड्यूटी मजिस्ट्रेटों को निर्देश दिए गए हैं कि वे हर हलचल पर पैनी नजर रखें। डाक विभाग को प्रश्नपत्रों की सुरक्षित आवाजाही और पुलिस को केंद्रों के बाहर कानून-व्यवस्था बनाए रखने का जिम्मा सौंपा गया है।
