हरियाणा में शुरू होगा एग्रीस्टैक सेल, किसानों को मिलेगा डिजिटल लाभ
Haryana News: हरियाणा में जल्द ही किसानों के लिए एक नई पहल शुरू होने वाली है। राज्य सरकार ने एग्रीस्टैक सेल की शुरुआत करने का फैसला किया है, जो डिजिटल फसल सर्वे और किसान रजिस्ट्री को तेजी से पूरा करने में मदद करेगा। यह जानकारी हरियाणा की वित्तायुक्त (राजस्व) डॉ. सुमिता मिश्रा ने एक महत्वपूर्ण बैठक में दी। इस बैठक में उन्होंने एग्रीस्टैक योजना को लागू करने की योजना को विस्तार से साझा किया।
क्या है एग्रीस्टैक योजना?
एग्रीस्टैक एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जिसे भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने शुरू किया है। इसका मकसद कृषि को डिजिटल बनाना और किसानों को तकनीकी रूप से सशक्त करना है। इस योजना के तीन मुख्य हिस्से हैं:
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किसान रजिस्ट्री: हर किसान का डिजिटल डेटाबेस तैयार करना।
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भूमि का जियो-रेफरेंसिंग: खेतों की सटीक डिजिटल मैपिंग।
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डिजिटल फसल सर्वे: फसलों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना।
बैठक में मौजूद भारत सरकार के मुख्य ज्ञान अधिकारी राजीव चावला ने बताया कि यह योजना भारतीय कृषि में क्रांति लाने वाली है। हरियाणा में अगले तीन महीनों में डिजिटल फसल सर्वे का काम पूरा करने का लक्ष्य है। इसके साथ ही सभी किसानों की रजिस्ट्री तैयार की जाएगी, ताकि एक सटीक डेटाबेस बनाया जा सके।
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हरियाणा को मिलेगा आर्थिक प्रोत्साहन
भारत सरकार इस योजना को लागू करने के लिए हरियाणा को वित्तीय मदद देगी। अगर राज्य सभी किसानों का पंजीकरण पूरा करता है, तो उसे 216 करोड़ रुपये तक की प्रोत्साहन राशि मिल सकती है। इसके अलावा, अगर 80 प्रतिशत से ज्यादा गांवों में डिजिटल फसल सर्वे पूरा होता है, तो 50 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि दी जाएगी। यह पैसा हरियाणा में कृषि के डिजिटल विकास को और तेज करेगा।
किसानों को क्या फायदा होगा?
डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि एग्रीस्टैक सेल के जरिए किसानों को कई तरह के लाभ मिलेंगे। जल्द ही पीएम-किसान योजना की किस्त पाने के लिए किसान आईडी अनिवार्य हो जाएगी। इसके अलावा:
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फसल बीमा दावों का निपटारा तेजी से होगा।
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न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) का लाभ आसानी से मिलेगा।
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उर्वरक वितरण और आपदा राहत कार्यों में डिजिटल डेटा की मदद ली जाएगी।
कैसे होगा योजना का अमल?
एग्रीस्टैक सेल इस पूरी योजना की निगरानी और समन्वय का काम करेगा। हर जिले में मास्टर ट्रेनर तैयार किए जाएंगे, जो स्थानीय स्तर पर इस योजना को लागू करने में मदद करेंगे। डॉ. मिश्रा ने कहा कि सरकार कृषि डेटा को आधुनिक बनाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
यह पहल न केवल किसानों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाएगी, बल्कि हरियाणा की कृषि व्यवस्था को और पारदर्शी और कुशल बनाएगी।
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