धौलपुर में बदला खेती का मिजाज: सरसों की जगह आलू-गेहूं पर दांव, क्या चिप्स कंपनियों की डिमांड बदल देगी किसानों की किस्मत?
धौलपुर में इस बार खेतों की रंगत बदली हुई है। जलभराव और बाजार के रुख को देखते हुए किसानों ने सरसों से किनारा कर आलू और गेहूं पर बड़ा दांव लगाया है। जानिए क्यों बदला खेती का ये गणित और अब किन चुनौतियों से जूझ रहे हैं अन्नदाता।
- खेती के पैटर्न में बड़ा बदलाव
- सरसों पर ‘माहू’ का डबल अटैक
- आलू बना किसानों का नया ‘सोना’
- कृषि विशेषज्ञों की खास सलाह
धौलपुर। राजस्थान के पूर्वी द्वार कहे जाने वाले धौलपुर जिले के खेतों में इस बार एक खामोश क्रांति नजर आ रही है। बरसों से पीले फूलों की चादर ओढ़ने वाले इस इलाके में इस दफा ‘पीला सोना’ यानी सरसों कुछ सिमटी हुई सी है। इसकी जगह अब गेहूं की हरियाली और आलू की खंदकों ने ले ली है। यह महज फसल का बदलाव नहीं है, बल्कि यह मानसून की बेरुखी और बाजार की समझ के बीच जूझते किसान का एक बड़ा ‘कैलकुलेटेड रिस्क’ है।
दरअसल, इस बदलाव की पटकथा बीते मानसून सत्र में ही लिख दी गई थी। भारी बारिश के चलते धौलपुर के खेत लंबे समय तक जलमग्न रहे, जिससे खरीफ की फसलें तो तबाह हुईं ही, रबी की सबसे मुख्य फसल ‘सरसों’ की बुवाई में भी देरी हो गई। जब खेत सूखने लगे, तो किसानों ने देखा कि सरसों के लिए वक्त कम बचा है और बाजार में आलू व गेहूं के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं। बस यहीं से जिले के खेती का गणित बदल गया।
आंकड़ों में समझिए जमीन की हकीकत
कृषि विभाग की ताजा रिपोर्ट बताती है कि इस रबी सीजन में जिले में कुल 1.50 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई है। इसमें से सरसों का रकबा जो हमेशा शीर्ष पर रहता था, इस बार काफी प्रभावित हुआ है। इस साल 67 हजार हेक्टेयर में सरसों लगी है, जबकि गेहूं ने 45 हजार हेक्टेयर पर अपना कब्जा जमा लिया है। सबसे चौंकाने वाला बदलाव आलू की खेती में दिखा है, जो अब 9 हजार 125 हेक्टेयर तक पहुंच गई है।
अब संकट ‘माहू’ का और उम्मीद ‘चिप्स’ से
खेतों में फसल तो लहलहा रही है, लेकिन किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं। सरसों की जो फसल बची है, उस पर ‘माहू’ (चेपा) कीट ने हमला बोल दिया है। यह नन्हा सा कीट फूलों का रस चूसकर दानों को कमजोर कर रहा है।
वहीं दूसरी ओर, आलू उगाने वाले किसान थोड़े उत्साहित हैं। धौलपुर के आलू की क्वालिटी इतनी शानदार है कि बड़ी चिप्स बनाने वाली कंपनियां अब सीधे खेतों तक पहुंच रही हैं। बिचौलियों का खेल खत्म होने से किसानों को सीधे मुनाफा मिल रहा है।
विशेषज्ञों की राय: फसल चक्र बदलने का सही समय
कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक प्रभुदयाल शर्मा का कहना है कि किसानों को इस समय बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने सलाह दी है कि:
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सरसों को कीटों से बचाने के लिए तरल कीटनाशक या नीम के तेल का छिड़काव तुरंत करें।
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आलू की खुदाई के बाद खेत खाली न छोड़ें, बल्कि ‘मूंग’ की बुवाई करें। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी और खाद का खर्चा भी बचेगा।
धौलपुर का किसान अब सिर्फ पारंपरिक खेती पर निर्भर नहीं है। वह मौसम की मार झेलकर भी यह सीख गया है कि बाजार की नब्ज कैसे पहचानी जाती है। हालांकि, कीटों का हमला और मौसम के उतार-चढ़ाव अब भी उनकी मेहनत पर पानी फेरने की ताकत रखते हैं, जिससे निपटने के लिए अब सरकारी मदद और तकनीकी सलाह ही उनका एकमात्र सहारा है।



