खेती में ‘लेखपाल राज’ खत्म! अब मोबाइल ऐप तय करेगा फसल का मुआवजा, रबी 2026 से लागू हुए ये 3 कड़े नियम
रबी 2026 से लेखपाल सर्वे बंद कर डिजिटल फसल सर्वे शुरू हो गया है। अब मोबाइल ऐप और जियो-टैगिंग के जरिए किसान खुद अपनी फसल का ब्यौरा दर्ज करेंगे, जिससे फसल बीमा का भुगतान मात्र 48 घंटे में सीधे बैंक खाते में होगा। जानें रजिस्ट्रेशन का पूरा तरीका यहाँ।
- लेखपाल सर्वे की पुरानी व्यवस्था पर लगा परमानेंट ब्रेक
- जियो-टैगिंग और GPS से लैस मोबाइल ऐप बना नया हथियार
- सिर्फ 48 घंटों के भीतर बैंक खातों में पहुँचेगा फसल बीमा
- बिचौलियों का खेल खत्म, सीधे सैटेलाइट से जुड़ी किसान की जमीन
नई दिल्ली/लखनऊ/चंडीगढ़: भारतीय कृषि के इतिहास में रबी सीजन 2026 एक ऐसी तारीख के रूप में दर्ज होने जा रहा है, जिसने दशकों पुराने ‘लाल फीताशाही’ के तंत्र को उखाड़ फेंका है। अब वह दौर बीत गया जब किसान को अपने खेत के नुकसान या फसल की जानकारी दर्ज कराने के लिए लेखपाल या पटवारी की मनुहार करनी पड़ती थी। केंद्र और राज्य सरकारों ने “AgriStack” मिशन के तहत अब डिजिटल फसल सर्वे (Digital Crop Survey) को पूरी तरह अनिवार्य कर दिया है।
यह सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि उस किसान की जीत है जो सरकारी दफ्तरों की धूल फांकने को मजबूर था। अब आपका खेत खुद बोलेगा, और उसकी गवाही देगा आपका मोबाइल फोन।
कागजों से सीधे क्लाउड तक: क्यों बदला गया सिस्टम?
पुराने सिस्टम में मानवीय हस्तक्षेप की वजह से डेटा में अक्सर हेराफेरी की शिकायतें आती थीं। कई बार जिस खेत में गेहूं बोया होता था, कागजों में वहां कुछ और दर्ज हो जाता था। 2026 की इस नई व्यवस्था ने भ्रष्टाचार की इस खिड़की को हमेशा के लिए बंद कर दिया है। अब किसान को अपने खेत के बीचों-बीच खड़े होकर ऐप के जरिए फोटो अपलोड करनी होगी।
इस प्रक्रिया में जियो-टैगिंग (Geo-tagging) का इस्तेमाल किया जा रहा है, यानी जब तक आप अपने असली खसरा नंबर पर मौजूद नहीं होंगे, ऐप आपकी फोटो स्वीकार ही नहीं करेगा। यह डेटा सीधे राज्य और केंद्र सरकार के सुरक्षित सर्वर पर ‘रीयल-टाइम’ अपडेट होता है, जिससे गलत जानकारी की कोई गुंजाइश नहीं बचती।
मुआवज़े की रफ़्तार: 48 घंटे में ‘इंसाफ’
इस नई व्यवस्था का सबसे भावुक और राहत देने वाला पहलू है—तबाही के बाद मिलने वाली मदद। अक्सर बेमौसम बारिश या ओलावृष्टि के बाद किसान महीनों तक मुआवजे का इंतजार करता था। लेकिन रबी 2026 में लागू डिजिटल ग्रिड की मदद से, सैटेलाइट इमेज और आपके द्वारा अपलोड किए गए डेटा का मिलान एआई (AI) के जरिए तुरंत किया जाएगा। नतीजा? फसल खराब होने के मात्र 48 घंटों के भीतर बीमा राशि और सरकारी सहायता सीधे आपके बैंक खाते में (DBT) भेज दी जाएगी।
खुद से कैसे करें रबी 2026 का सर्वे? (स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस)
यदि आप भी अपनी रबी फसल का पंजीकरण करना चाहते हैं, तो यह तरीका अपनाएं:
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ऐप डाउनलोड: सबसे पहले गूगल प्ले स्टोर से अपने राज्य का आधिकारिक सर्वे ऐप (जैसे ‘AgriStack’ या ‘Digital Fasal Survey’) इंस्टॉल करें।
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लॉगिन: अपनी ‘यूनिक किसान आईडी’ या आधार से लिंक मोबाइल नंबर के जरिए ओटीपी प्राप्त कर लॉगिन करें।
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खेत पर मौजूदगी: सर्वे के लिए अपने खेत के बीच में जाएं ताकि ऐप आपकी सटीक लोकेशन (Latitude/Longitude) ट्रेस कर सके।
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फोटो और डेटा: ऐप के कैमरे से खड़ी फसल की फोटो खींचें और वहां मांगी गई जानकारी जैसे—फसल की किस्म, बुआई का समय और सिंचाई की तकनीक भरें।
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फाइनल सबमिट: एक बार जानकारी चेक करें और सबमिट कर दें। आपको तुरंत एक रसीद नंबर मिलेगा।
नोट: जिन बुजुर्ग किसानों या युवाओं के पास स्मार्टफोन की सुविधा नहीं है, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार ने हर गांव में ‘कृषि सखी’ और पंचायत सहायकों को तैनात किया है, जो बिना किसी शुल्क के आपका सर्वे पूरा करेंगे।
क्या है किसान आईडी (Farmer ID) का भविष्य?
सरकार का लक्ष्य 2026 के अंत तक हर किसान को एक डिजिटल पहचान देना है। यह ‘किसान आईडी’ आने वाले समय में खाद की सब्सिडी, पीएम किसान सम्मान निधि और सस्ते लोन के लिए एकमात्र चाबी होगी। इस डिजिटल क्रांति ने न केवल खेती को हाई-टेक बनाया है, बल्कि किसान के सम्मान को भी सुरक्षित किया है। अब अधिकार मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी, डिजिटल डेटा खुद आपके हक की पैरवी करेगा।



