हरियाणा, राजस्थान और यूपी में नीलगाय का कहर, जानिए कैसे बचाएं अपनी फसलों को इन जंगली जानवरों से

उत्तर भारत के कई राज्यों में नीलगाय, जंगली सूअर और आवारा पशु किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में समस्या अलग अलग है। किसान भाई अपने क्षेत्र के हिसाब से उपाय करके अपनी फसलों को इन जंगली जानवरों से बचा सकते है। आइये जानते है राज्यों के हिसाब से किसानों को हो रही इस परेशानी के बारे में -

  • हरियाणा में नीलगाय से परेशान है किसान
  • राजस्थान में नीलगाय और जंगली सूअर का खौफ है किसानों को
  • उत्तर प्रदेश में दोहरी मार नीलगाय और आवारा पशु से
  • मुआवजा और सरकारी योजनाएं आपके काम आएंगी

Farming Issues: पुरे उत्तर भारत में इस समय सरसों और गेहूं की फसलें लहलहा रही है लेकिन किसानों की चिंता का सबसे बड़ा कारण इस समय जंगली जानकर जैसे नील गाय, देशी गाय है जो की खेतों में घुसकर किसानों की पूरी फसल को बर्बाद कर देते है। किसान भाई इसके लिए तरह तरह के उपाय करते है और रात भर जागकर अपने खेतों की रक्षा करते है लेकिन फिर भी ये जंगली पशु उनकी खेती को बर्बाद कर देते है।

सबसे अधिक नुकसान नीलगाय और देशी गाय आज के समय में किसानों को नुकसान पहुंचा रही है और ये झुण्ड में आती है और पूरी फसल को साफ़ कर देती है। किसान भाइयो इसके लिए आज के आर्टिकल में हम कुछ उपाय बताने वाले है जिनकी मदद से आप आसानी से अपने खेतों की रक्षा इन जंगली जानकारों से कर सकते है। आइये जानते है की कौन कौन से रे में कौन कौन से उपाय आपके काम आएंगे।

हरियाणा में नीलगाय से परेशान है किसान

हरियाणा प्रदेश की बात करें तो किसान सबसे अधिक परेशान नीलगायों से है। इसके अलावा रेवाड़ी, नारनौल, हिसार, भिवानी, सिरसा और झज्जर के इलाके में किसान देशी गायों से परेशान है। गेहूं, सरसों और चने की फसलों को ये आवारा पशु चाट कर जाते है जिससे किसानों को हर साल काफी अधिक नुकसान होता है।

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हरियाणा के इन क्षेत्रों में मौजूदा समय में सोलर फेसिंग काफी अच्छा उपाय साबित हो रहा है और इस पर सरकार की तरफ से सब्सिडी का लाभ भी प्रदेश की सरकार की और से दिया जा रहा है। इसके अलावा किसान भाई मोशन सेंसर लाइट का इस्तेमाल भी कर सकते है जिससे खेतों में पधुओं के आते ही लाइट अपने आप जल जाती है और किसानों को इसका पता चल जाता है।

राजस्थान में नीलगाय और जंगली सूअर का खौफ है किसानों को

राजस्थान में सूखा होने और जंगलों की लगातार कटाई के चलते अब जंगली जानकर खेतों की और आने अलगे है। प्रदेश में चारागाह अब काफी कम हो गए है और खासकर अलवर, भरतपुर और दौसा जिलों में नीलगाय और जंगली सूअर सीधे खेतों का रुख कर रहे हैं जिससे किसानों को काफी नुकसान हो रहा है। पानी और चारे के लिए ये जानकर खेतों की और अपना रुख कर रहे है।

राजस्थान के किसान अपने खेतों में देशी इलाज काफी अधिक करते है जो की काफी अधिक कारगर साबित हो रहे है। किसान अपने खेतों में मिर्च, लहसुन और नीम से बने घोल का नियमित छिड़काव करते है और खेत की मेड़ों पर अरंडी या सरसों की फसल लगाने लगे है।

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इसके अलावा टिन के डिब्बे या चमकदार पट्टियां लगाने लगे है जिससे ये जंगली जानकार काफी हद तक खेतों से दूर रहते है। यहाँ के किसानों का मानना है की इन उपायों से पूर्ण रूप से खेतों की रक्षा तो नहीं होती लेकिन काफी हद तक जंगली जानकारी खेतों से दूर रहते है।

हरियाणा, राजस्थान और यूपी में नीलगाय का कहर, जानिए कैसे बचाएं अपनी फसलों को इन जंगली जानवरों से
हरियाणा, राजस्थान और यूपी में नीलगाय का कहर, जानिए कैसे बचाएं अपनी फसलों को इन जंगली जानवरों से

उत्तर प्रदेश में दोहरी मार नीलगाय और आवारा पशु से

उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड, पश्चिमी यूपी और तराई क्षेत्रों में नीलगाय के साथ-साथ छुट्टा पशु जिसमे देशी गाय सबसे आधी है से भी बड़ी समस्या किसानों को हो रही है। कई इलाकों में रात के समय खेतों में मवेशियों के झुंड घुस जाते हैं जिससे तैयार फसल कुछ ही घंटों में बर्बाद हो जाती है।

यूपी के कई गांवों में सामूहिक कांटेदार बाड़ लगाने की पहल की गई है। इसके साथ ही गौशालाओं की व्यवस्था और खेतों के आसपास मानव गंध वाले देशी उपाय भी अपनाए जा रहे हैं। कुछ जिलों में प्रशासन भी सामूहिक बाड़ लगाने में किसानों की मदद कर रहा है जिससे व्यक्तिगत खर्च का बोझ कम हुआ है। किसान अपने खेतों में सरकारी सब्सिडी का लाभ लेकर बाद भी लगा रहे है जिससे खेतों में इन आवारा पशुओं के घुसने पर रोक लगाई जा रही है।

मुआवजा और सरकारी योजनाएं आपके काम आएंगी

किसान भाइयों आप किसी भी राज्य में रहते हो वहीं पर आपको सरकार की और से खेतों की रक्षा करने के लिए कई योजनाओं का लाभ दे रही है और इन योजनाओं की मदद से आप अपने खेतों की बाड़ का काम पूरा कर सकते है। इसके अलावा फसलों में होने वाले नुकसान पर भी सरकार की और से आर्थिक सहायता दी जाती है जिसमे आपको समय पर सूचना देनी होती है। कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक नुकसान होते ही पटवारी या कृषि विभाग को सूचना देने पर ही मुआवजे की प्रक्रिया आगे बढ़ पाती है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि किसी एक उपाय से स्थायी समाधान संभव नहीं है। उनके अनुसार देसी तरीके, आधुनिक तकनीक और गांव स्तर पर सामूहिक प्रयास तीनों को साथ अपनाने से ही जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है। इसके अलावा नीलगाय और जंगली पशुओं की समस्या अब सिर्फ खेत की नहीं बल्कि ग्रामीण जीवन और किसानों की आमदनी से जुड़ा सवाल बन चुकी है। सही राज्यवार रणनीति और सरकारी मदद का सही इस्तेमाल इस संकट से निपटने की सबसे बड़ी कुंजी माना जा रहा है।

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Saloni Yadav

सलोनी यादव (Journalist): एक अनुभवी पत्रकार हैं जिन्होंने अपने 10 साल के करियर में कई अलग-अलग विषयों को बखूबी कवर किया है। उन्होंने कई बड़े प्रकाशनों के साथ काम किया है और अब NFL स्पाइस पर अपनी सेवाएँ दे रही हैं। सलोनी यादव हमेशा प्रामाणिक स्रोतों और अपने अनुभव के आधार पर जानकारी साझा करती हैं और पाठकों को सही और विश्वसनीय सलाह देती हैं। Contact Email: saloniyadav@nflspice.com Website: nflspice.com
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