सरसों की बुवाई से पहले जान लें ये 6 बातें, पैदावार में हो जायेगी बढ़ौतरी ओर कमाई होगी अधिक

सरसों की बुवाई का समय आ गया है ओर सभी किसान भाइयों को अब कुछ बातों पर ध्यान देना होगा जिससे आपकी सरसों की खेती में अधिक पैदावार मिल सके और अधिक से अधिक मुनाफा आपको मिल सके। इसके लिए 6 प्वाइंट ऐसे है जिनका अगर आपने ख्याल रखा तो निश्चित रूप से आपको अधिक पैदावार हासिल हो सकती है -

भारत में सरसों (Mustard Farming) की खेती रबी सीजन की सबसे लोकप्रिय और मुनाफेदार फसलों में से एक है. अगर आप भी अपने खेतों में धान की कटाई के बाद सरसों की बुवाई (Mustard Sowing) करने की सोच रहे हैं तो सही समय और तकनीक से अच्छी पैदावार (Crop Yield) पा सकते हैं. किसान भाइयों आइए जानते हैं कुछ आसान टिप्स जो आपकी सरसों की खेती को बनाएंगे और भी फायदेमंद ओर साथ में आपको अधिक पैदावार भी मिलेगी.

सही समय पर बुवाई करना जरूरी है

किसान भाइयों सरसों की बुवाई (Mustard Sowing Time) का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से नवंबर है जब तापमान 20-25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है. इस समय बुवाई करने से फसल में रोग (Crop Diseases) कम लगते हैं और पैदावार बेहतर होती है. आप सभी को समय पर बुवाई करनी चाहिए ताकि आपकी फसल समय पर कटाई के लिए तैयार हो जाये.

खेत की तैयारी है जरूरी

सरसों की खेती हो या फिर कोई भी ओर खेती सभी में अच्छी पैदावार के लिए खेत की मिट्टी (Soil Preparation) को अच्छी तरह तैयार करना जरूरी है. दोमट या हल्की काली मिट्टी सरसों के लिए सबसे उपयुक्त है. खेत की गहरी जुताई (Deep Ploughing) करें, ताकि मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़े. पहले कल्टीवेटर से जुताई करें फिर रोटावेटर का इस्तेमाल करें. जुताई 15-20 सेंटीमीटर गहरी होनी चाहिए.

मिट्टी और खाद का रखें ध्यान

अपने खेत में आपको मिट्टी की गुणवत्ता और खाद का ध्यान रखना होगा. खेत की मिट्टी का पीएच मान (Soil pH) 6.5 से 8 के बीच होना चाहिए. बुवाई से पहले जैविक खाद (Organic Fertilizer) का मिश्रण करें. साथ ही प्रति हेक्टेयर 60-80 किलोग्राम नाइट्रोजन (Nitrogen Fertilizer) और 40-50 किलोग्राम फास्फोरस (Phosphorus Fertilizer) डालें. अच्छी जल निकासी (Water Drainage) की व्यवस्था भी जरूरी है ताकि फसल को नुकसान न हो.

उन्नत किस्में चुनें

सरसों की कई उन्नत किस्में (Improved Mustard Varieties) जैसे पीडीजेड-8, पूसा बोल्ड, पूसा टारक, वरुणा और कृष्णा उपलब्ध हैं. ये किस्में कम समय में पककर ज्यादा उत्पादन देती हैं. प्रति हेक्टेयर 4-5 किलोग्राम बीज (Seed Rate) पर्याप्त है. बीज को फफूंदनाशी (Fungicide Treatment) से उपचारित करें ताकि फसल रोगमुक्त रहे. किसान भाइयों उन्नत किस्म का चुनाव करके आप अधिक पैदावार ले सकते है.

सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण

फसल को शुरुआती दौर में 2-3 बार सिंचाई (Irrigation) की जरूरत होती है. ज्यादा पानी से बचें, क्योंकि इससे जड़ गलन (Root Rot) की समस्या हो सकती है. खरपतवार (Weed Control) को नियंत्रित करने के लिए समय-समय पर निराई-गुड़ाई करें.

कटाई का सही समय

सरसों की फसल 110-140 दिनों में पककर तैयार हो जाती है. जब फलियां पीली पड़ने लगें और बीज सख्त हो जाएं, तब कटाई (Harvesting Time) करें. सही समय पर कटाई से बीज झड़ने (Seed Loss) का नुकसान नहीं होता. औसतन 18-20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन (Mustard Yield) मिल सकता है.

किसान भाइयों धान की कटाई के बाद खाली खेतों में सरसों की बुवाई (Post-Paddy Mustard Farming) से किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. यह फसल न केवल खाद्य तेल (Edible Oil) की जरूरत पूरी करती है बल्कि किसानों की आय (Farmers Income) को दोगुना करने में भी मदद करती है. इन आसान टिप्स के साथ सरसों की खेती (Mustard Cultivation) करके आप भी अपने खेतों से बंपर मुनाफा कमा सकते हैं. सही समय, सही तकनीक और मेहनत से आपकी फसल देगी शानदार नतीजे जिससे आपको अधिक कमाई भी होने वाली है.

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Saloni Yadav

Saloni Yadav (Journalist): There is an experienced journalist who has covered many different topics in his 10-year career. He has worked with many large publications and is now offering his services on NFL Spice. Saloni Yadav always shares information based on authentic sources and his experience and gives right and reliable advice to readers. Contact Email: saloniyadav@nflspice.com Website: nflspice.com
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