शिवराज चौहान का बड़ा बयान: कहा सिर्फ खेती से काम नहीं चलेगा, अब पशुपालन से बदलेगी किसानों की किस्मत

MP Breaking News: मध्य प्रदेश के रायसेन में शनिवार को आयोजित किसान सेमिनार में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक बार फिर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के केंद्र में किसान को रखने की जरूरत पर जोर दिया। लेकिन इस बार उनका फोकस सिर्फ पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने साफ कहा कि अगर किसानों की आय में असली बढ़ोतरी चाहिए तो खेती से परे नई गतिविधियों को अपनाना होगा और इसमें सबसे बड़ा अवसर पशुपालन के रूप में मौजूद है।

चौहान ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि देश की कृषि व्यवस्था अब तेजी से बदल रही है और किसानों की आय बढ़ाने के लिए बहुआयामी मॉडल जरूरी है। उन्होंने बताया कि पशुपालन आने वाले समय में गांवों की आर्थिक रीढ़ बनने जा रहा है क्योंकि दूध, मुर्गीपालन और संबंधित उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। उन्होंने इसे किसानों की अतिरिक्त कमाई का सबसे भरोसेमंद रास्ता बताया।

सेमिनार के दौरान केंद्रीय मंत्री ने 500 किसानों को विशेष प्रशिक्षण किट वितरित कीं जिनमें पशुपालन की मूल तकनीकों, टीकाकरण, चारे के प्रबंधन और बीमारियों की रोकथाम से जुड़ी सामग्री भी शामिल थी। उन्होंने कहा –

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सिर्फ पशु खरीद लेना काफी नहीं है बल्कि असली लाभ तभी मिलेगा जब किसान वैज्ञानिक तरीके से पशुधन प्रबंधन सीखेंगे।

चौहान ने नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह संस्थान एशिया में डेयरी विज्ञान का अग्रणी केंद्र है और किसानों को आधुनिक पशुपालन में कदम बढ़ाने के लिए मजबूत आधार देता है।

उन्होंने किसानों को यह भी याद दिलाया कि सरकार पहले ही कई योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण परिवारों की आय में सीधे सहायता दे रही है जैसे लाडली बहना योजना और किसान सम्मान निधि। लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी मदद को स्थायी समाधान मानने के बजाय किसानों को खुद भी नए उद्यम अपनाने होंगे। अब सिर्फ खेती से घर नहीं चलेगा। इस पर उन्होंने कहा

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अगर कोई दूध सप्लाई चेन समझना चाहता है, तो हम उसे बैंक से जोड़कर पशु खरीदने तक मदद करेंगे।

इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने किसानों को यह समझाया कि कैसे विविधिकरण यानी खेती के साथ पशुपालन, मुर्गीपालन या अन्य गतिविधियाँ जोड़ना उनकी आय को स्थिर और अधिक लाभकारी बनाता है। यह दृष्टिकोण उसी व्यापक लक्ष्य के अनुरूप है जिसे भारत सरकार ने 2016 से किसानों की आय दोगुनी करने के लिए निर्धारित किया था। हालांकि चुनौतियाँ बनी रहीं फिर भी कई क्षेत्रों में बेहतर बीज, सिंचाई, प्रोसेसिंग और मार्केट लिंकिंग के कारण उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई।

रायसेन का यह कार्यक्रम सिर्फ एक औपचारिक आयोजन नहीं रहा बल्कि किसानों के लिए एक संदेश लेकर आया। अगर वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदलने की इस नई दिशा को अपनाते हैं तो आने वाले वर्षों में उनके जीवन स्तर में बड़ा फर्क दिखाई दे सकता है।

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