गेहूं की बुवाई के लिए बना अनुकूल मौसम, DBW 222 किस्म दे सकती है बम्पर उत्पादन
देश भर में इस साल मॉनसून सामान्य से ज्यादा सक्रिय रहा है। इस बार बारिश सामान्य से अधिक दर्ज की गई है। मौसम विभाग के ताज़ा अनुमान के मुताबिक अक्टूबर तक भी कई राज्यों में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है। मिट्टी में लंबे समय तक नमी बने रहने से इस बार गेहूं की बुवाई के लिए माहौल बेहद अनुकूल माना जा रहा है। अभी भी देश के कुछ हिस्सों में मानसून के कारण भारी बारिश की गतिविधिया जारी रहने की उम्मीद है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, यह सीजन किसानों के लिए बंपर पैदावार ला सकता है। ऐसे में सही गेहू किस्म का चुनाव करना भी महत्वपूर्ण हो जाता है। गेहू की कई ऐसी वैरायटी देश में मौजूद है जो बम्पर उत्पादन देने के साथ साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता के साथ आती है। इसमें DBW 222 भी शामिल है। किसानो को ये किस्म बेहतर उत्पादन देने में सक्षम है।
किसानों में बढ़ रही डीबीडब्ल्यू 222 की मांग
अभी गेहू की बुआई का समय आने वाला है। ऐसे में कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक गेहूं की किस्म डीबीडब्ल्यू 222 (करण नरेंद्र) किसानों के लिए इस बार बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है। यह किस्म न केवल सामान्य उपज से अधिक उत्पादन देती है, बल्कि कई बीमारियों के प्रति प्रतिरोधी भी है। एमएसपी में लगातार बढ़ोतरी और हाल ही में सरकार ने भी जो समेत अन्य कई किस्मो पर MSP रेट को लेकर बढ़ोतरी की गई है। जिससे इस बार गेहू सहित अन्य फसलों की बुआई का रकबा बढ़ने की उम्मीद है। कृषि क्षेत्र में बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है। जिससे देश में गेहू, सरसो समेत अन्य कई फसलों का उत्पादन तेजी के साथ बढ़ेगा। गेहू की नई वैरायटी DBW 222 से उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी मिल सकती है। ऐसे में कृषि वैज्ञानिको द्वारा भी किसानो को इस तरह की किस्म की बुआई की सलाह दी जा रही है।
DBW 222 वैरायटी की किन राज्यों में होगी खेती
गेहू देश के अलग अलग हिस्सों में मौसम के हिसाब से अलग अलग वैरायटी के बिजाई की जाती है। और DBW 222 वैरायटी भी देश के कुछ हिस्सों में बोई जा सकती है। जिससे अच्छा उत्पादन मिलने की संभावना बढ़ जाती है। केंद्रीय किस्म विमोचन उप समिति के अनुसार डीबीडब्ल्यू 222 की खेती पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड के तराई क्षेत्र, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के चयनित इलाकों में की जा सकती है। राजस्थान में यह किस्म कोटा और उदयपुर को छोड़कर लगभग सभी इलाकों के लिए उपयुक्त मानी गई है। इन क्षेत्रों में ये किस्म बुआई के लिए बेहतरीन मानी जाती है। गेहू का बम्पर उत्पादन होने की उम्मीद होती है। इन क्षेत्रों की जलवायु इस वैरायटी के अनुकूल है।
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- पंजाब, हरियाणा और दिल्ली
- राजस्थान (कोटा व उदयपुर को छोड़कर)
- पश्चिमी उत्तर प्रदेश (सहारनपुर से लखनऊ तक)
- उत्तराखंड का तराई क्षेत्र
- जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश (ऊना व पांवटा साहिब क्षेत्र)
ये किस्म देगी अन्य किस्मों से ज्यादा उपज
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के आंकड़ों के अनुसार, डीबीडब्ल्यू 222 की औसत उपज 61.3 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। वहीं, यह पैदावार लोकप्रिय किस्मों जैसे HD2967 (54.2), DBW88 (56), और HD3086 (58.9) से कहीं ज्यादा है। अगर फसल की सही से देखरेख की जाती है तो इसमें अधिकतम उत्पादन लिया जा सकता है। अन्य गेहू वैरायटी की तुलना में इस वैरायटी में अधिक उत्पादन देने की क्षमता मौजूद है। वैसे तो इन क्षेत्रों में और भी कई ऐसे किस्म मौजूद है जो अच्छा उत्पादन देने में सक्षम है। लेकिन लगातार बढ़लती जलवायु के हिसाब से किसानो को गेहू की नई वैरायटी का भी उपयोग करना जरुरी हो जाता है। जिससे गेहू की उत्पादन क्षमता लगातार बनी रहती है।
बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता के साथ आती है ये वैरायटी
गेहू की फसलों में कई तरह के रोग उत्पादन को प्रभावित करती है। लेकिन DBW 222 वैरायटी कुछ रोगो के प्रति रोग प्रतिरोधक क्षमता के साथ है। विशेषज्ञों के मुताबिक, गेहूं की यह किस्म पीला और भूरा रतुआ जैसे बड़े रोगों से लड़ने में सक्षम है। इतना ही नहीं, करनाल बंट और खुला कंडुआ पर भी यह बेअसर साबित होती है। प्रोटीन गुणवत्ता के लिहाज से भी इसके दाने ज्यादा मजबूत माने जा रहे हैं। इससे किसानो को इन रोगो से गेहू में होने वाले नुकसान से राहत मिलेगी। ये रोग गेहू के उत्पादन को प्रभावित करते है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि बेहतर मौसम परिस्थितियों और इस उच्च उपज वाली किस्म के चलते इस बार गेहूं उत्पादन नया रिकॉर्ड बना सकता है। किसान समय पर बीज उपचार, संतुलित खाद और उचित सिंचाई तकनीक अपनाकर बेहतर कमाई कर सकते हैं।
डीबीडब्ल्यू 222 गेहूं कई प्रमुख बीमारियों से लड़ने की क्षमता रखता है:
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- पीला व भूरा रतुआ से बचाव
- करनाल बंट (9.1%) पर नियंत्रण
- खुला कंडुआ (4.9%) पर नियंत्रण
इसके दाने उच्च प्रोटीन गुणवत्ता वाले होते हैं, जिससे यह खपत और औद्योगिक प्रोसेसिंग दोनों के लिए उपयोगी है।
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