सिर्फ 10 हजार रुपये महीना बचाकर बनें करोड़पति: जानिए 10:12:30 का जादुई फॉर्मूला
क्या आप भी सोचते हैं कि छोटी-छोटी बचत से बड़ा फंड कैसे बनाया जा सकता है? अगर हां, तो म्यूचुअल फंड्स में SIP (सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) का ये खास फॉर्मूला आपकी जिंदगी बदल सकता है। महज 10 हजार रुपये महीना निवेश करके 30 साल में 3 करोड़ रुपये से ज्यादा का फंड जमा किया जा सकता है। ये तरीका कंपाउंडिंग की ताकत पर काम करता है और रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए बेहतरीन ऑप्शन है। आइए जानते हैं पूरा डिटेल।
क्या है ये 10:12:30 फॉर्मूला?
ये फॉर्मूला SIP इन्वेस्टमेंट का एक सिंपल तरीका है, जो तीन नंबर्स पर आधारित है। ’10’ का मतलब है हर महीने 10 हजार रुपये की बचत। ’12’ से तात्पर्य है 12 फीसदी औसत सालाना रिटर्न, जो लंबे समय में SIP से मिलने वाले रिटर्न्स (आमतौर पर 12-15%) पर आधारित है। और ’30’ का अर्थ है 30 साल तक लगातार निवेश करना। अगर आप 30 साल की उम्र से शुरू करेंगे, तो 60 साल की रिटायरमेंट उम्र तक करोड़ों का फंड तैयार हो जाएगा। ये फॉर्मूला बताता है कि डिसिप्लिन के साथ छोटी रकम भी बड़ा कमाल कर सकती है।
कैसे बनेगा 3 करोड़ से ज्यादा का फंड? देखिए पूरा कैलकुलेशन
मान लीजिए आप हर महीने 10 हजार रुपये SIP में डालते हैं, और औसत रिटर्न 12 फीसदी मिलता है। 30 साल (यानी 360 महीने) तक ये जारी रखें, तो कुल निवेश होगा 10 हजार × 360 = 36 लाख रुपये। लेकिन कंपाउंडिंग की वजह से रिटर्न्स मिलेंगे करीब 2 करोड़ 72 लाख रुपये। इस तरह टोटल फंड बनेगा 36 लाख + 2 करोड़ 72 लाख = 3 करोड़ 8 लाख रुपये से ज्यादा। ये कैलकुलेशन SIP कैलकुलेटर पर आधारित है और दिखाता है कि समय के साथ पैसा कैसे बढ़ता जाता है। जितना जल्दी शुरू करेंगे, उतना ज्यादा फायदा।
SIP के फायदे: क्यों है ये स्मार्ट चॉइस?
SIPs लंबे समय के फाइनेंशियल गोल्स जैसे रिटायरमेंट के लिए परफेक्ट हैं। ये कंपाउंडिंग का फायदा देते हैं, जहां रिटर्न पर रिटर्न मिलता है और पैसा तेजी से बढ़ता है। साथ ही, रेगुलर निवेश से आदत बनती है और समय-समय पर SIP अमाउंट बढ़ाने से गोल और जल्दी अचीव हो जाता है। मार्केट के उतार-चढ़ाव से घबराने की जरूरत नहीं, क्योंकि लंबे पीरियड में रिटर्न्स अच्छे रहते हैं।
शुरू करने से पहले रखें ये ध्यान
फाइनेंशियल प्लानिंग हमेशा जल्दी शुरू करनी चाहिए, लेकिन कोई भी निवेश करने से पहले एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। बाजार के रिस्क को समझें और अपनी रिस्क कैपेसिटी के हिसाब से चुनें। ये फॉर्मूला एक उदाहरण है, असल रिटर्न्स मार्केट पर डिपेंड करते हैं।
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