Union Budget 2026: रविवार को भी खुलेगा शेयर बाजार, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रचेंगी इतिहास; जानें जरूरी नियम
1 फरवरी 2026 को रविवार होने के बावजूद शेयर बाजार में लाइव ट्रेडिंग होगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपना 9वां बजट पेश करेंगी। जानिए बाजार का समय और शेयरों की खरीद-बिक्री से जुड़े नए नियम।
- छुट्टी के दिन भी गुलजार रहेगा बाजार, रविवार को खुलेगा दलाल स्ट्रीट का दरवाजा
- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश करेंगी अपना नौवां बजट, इतिहास रचने की तैयारी
- शेयरों की खरीद-बिक्री पर लागू होंगे खास नियम, सेटलमेंट हॉलिडे का रखें ध्यान
आमतौर पर रविवार का दिन मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए सुकून और आराम का होता है, लेकिन इस बार 1 फरवरी की सुबह कुछ अलग होने वाली है। जब आधा देश देर से सोकर उठने की तैयारी कर रहा होगा, तब शेयर बाजार के गलियारों में हलचल अपने चरम पर होगी। केंद्र सरकार इस दिन अपना आम बजट पेश करने जा रही है और इसी के मद्देनजर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज ने फैसला किया है कि बाजार रविवार को भी पूरी तरह चालू रहेगा।
यह कोई पहली बार नहीं है जब बजट के सम्मान में बाजार के नियमों को बदला गया हो। भारत में बजट केवल एक सरकारी आंकड़ा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की उम्मीदों का दस्तावेज होता है। यही वजह है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जब 11 बजे लोकसभा में अपना ब्रीफकेस खोलेंगी, तो बाजार की हर टिक-टिक पर निवेशकों की सांसें टिकी होंगी।
निर्मला सीतारमण का नौवां इम्तिहान
इस बार का बजट इसलिए भी खास है क्योंकि निर्मला सीतारमण लगातार नौवीं बार देश का लेखा-जोखा पेश करने जा रही हैं। यह अपने आप में एक ऐसा कीर्तिमान है जो भारतीय राजनीति में विरले ही देखने को मिलता है। एनडीए सरकार के तीसरे कार्यकाल का यह दूसरा पूर्ण बजट है, जिसे लेकर मध्यम वर्ग से लेकर कॉरपोरेट जगत तक अपनी निगाहें गड़ाए बैठा है। आर्थिक गलियारों में चर्चा है कि सरकार इस बार राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर जोर देगी।
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निवेशकों के लिए जरूरी चेतावनी: सेटलमेंट का पेंच
भले ही आप रविवार को ट्रेडिंग कर पाएंगे, लेकिन कुछ तकनीकी पेंच हैं जिन्हें समझना आपके लिए बहुत जरूरी है। चूंकि 1 फरवरी को बैंक और सेटलमेंट हॉलिडे है, इसलिए आपने जो शेयर 30 जनवरी (शुक्रवार) को खरीदे थे, उन्हें आप रविवार को नहीं बेच पाएंगे। इसी तरह, बजट वाले दिन खरीदे गए शेयरों को आप अगले ही दिन यानी सोमवार को नहीं निकाल सकेंगे। यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि बाजार में अस्थिरता के समय ट्रांजैक्शन का दबाव सही ढंग से संभाला जा सके।
बाजार की नजर किन आंकड़ों पर है?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार सरकार राजकोषीय घाटे (फिस्कल डेफिसिट) को जीडीपी के 4.1 से 4.2 प्रतिशत के दायरे में रखने की कोशिश करेगी। बाजार की असली दिलचस्पी इस बात में होगी कि सरकार कर्ज लेने की अपनी योजना को कैसे पेश करती है। अनुमान है कि सरकारी उधारी में पिछले साल के मुकाबले 3 प्रतिशत की हल्की बढ़ोतरी हो सकती है। अगर बजट में खेती, रोजगार और मिडिल क्लास को टैक्स में राहत जैसी खबरें आती हैं, तो रविवार का यह दिन निवेशकों के लिए किसी त्योहार से कम नहीं होगा।
आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट पहले ही पेश हो चुकी है, जिसने एक तरह से बजट की पिच तैयार कर दी है। अब देखना यह है कि वित्त मंत्री की बल्लेबाजी बाजार को ऊपर ले जाती है या फिर घाटे के डर से निवेशक अपनी पकड़ ढीली करते हैं।
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