अब मेड इन इंडिया पर लगेगी दुनिया की मुहर! CSIR-NPL की दो नई लैब से बदलेगी सोलर और पर्यावरण सेक्टर की किस्मत

भारत ने अपनी गुणवत्ता और मानक प्रणाली को मजबूत करते हुए CSIR-NPL में दो बड़ी लैब शुरू की हैं। अब सोलर पैनल और पर्यावरण उपकरणों की टेस्टिंग के लिए विदेशी सर्टिफिकेट पर निर्भर नहीं रहना होगा, जिससे भारतीय कंपनियों का पैसा और समय दोनों बचेगा।

  • भारत के पास अब अपनी सोलर सेल कैलिब्रेशन लैब है, जो दुनिया की सबसे सटीक लैब में से एक है।
  • प्रदूषण मापने वाली मशीनों की जांच अब भारतीय मौसम और धूल के हिसाब से देश में ही हो पाएगी।
  • विदेशी लैब पर निर्भरता खत्म होने से भारतीय MSMEs और स्टार्टअप्स को बड़ी राहत मिलेगी।
  • सौर ऊर्जा और पर्यावरण डेटा की विश्वसनीयता बढ़ने से ग्लोबल मार्केट में भारत का दबदबा बढ़ेगा।

नई दिल्ली (NFLSpice News): भारत ने आज आत्मनिर्भरता की ओर एक और बड़ा कदम बढ़ाया है। नई दिल्ली स्थित CSIR-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (CSIR-NPL) ने अपनी स्थापना के 80 साल पूरे होने के मौके पर दो ऐसी सुविधाओं की शुरुआत की है, जो सीधे तौर पर आपकी और हमारी जिंदगी की गुणवत्ता से जुड़ी हैं। ये नई लैब न केवल तकनीकी रूप से देश को मजबूत बनाएंगी बल्कि ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों की चमक दुनिया भर में बढ़ाएंगी।

सबसे बड़ी बात यह है कि अब तक जिन मशीनों और तकनीकों के लिए हमें अमेरिका या यूरोप की लैब से हरी झंडी मिलने का इंतजार करना पड़ता था वह काम अब पूरी तरह भारतीय मिट्टी पर होगा। यह खबर सिर्फ विज्ञान तक सीमित नहीं है बल्कि इसका असर भारतीय व्यापार और पर्यावरण पर भी पड़ेगा।

सोलर पैनल की असली ताकत का चलेगा पता

सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भारत दुनिया का लीडर बनने की राह पर है। लेकिन एक बड़ी समस्या यह थी कि हमारे यहां बनने वाले सोलर सेल और पैनलों की गुणवत्ता मापने का जो मानक था, वह विदेशी था। अब CSIR-NPL ने ‘नेशनल प्राइमरी स्टैंडर्ड फैसिलिटी फॉर सोलर सेल कैलिब्रेशन’ (NPF-SCC) शुरू की है।

यह लैब जर्मनी के सहयोग से बनाई गई है और इसकी सटीकता इतनी जबरदस्त है कि इसमें गलती की गुंजाइश न के बराबर है। अब सोलर कंपनियां अपने पैनल की टेस्टिंग भारत में ही करा सकेंगी। सबसे अच्छी बात यह है कि ये टेस्टिंग भारतीय मौसम, यहां की धूप और धूल को ध्यान में रखकर की जाएगी। इससे छत पर सोलर लगवाने वाले आम ग्राहकों को भी अब वही बिजली मिलेगी जिसका दावा कंपनियां करती हैं।

प्रदूषण मापने वाली मशीनों पर अब होगा भरोसा

हम अक्सर अखबारों और ऐप पर एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) देखते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि ये आंकड़े कितने सही हैं? दरअसल, प्रदूषण मापने वाली ज्यादातर मशीनें विदेशी मानकों पर आधारित होती थीं। भारत के अलग-अलग राज्यों के मौसम और यहां की हवा के हिसाब से ये मशीनें कई बार सटीक जानकारी नहीं दे पाती थीं।

अब CSIR-NPL की नई पर्यावरण लैब यानी NESL इस कमी को दूर करेगी। अब शहर की नगर पालिकाएं हों या बड़ी कंपनियां, वे अपने उपकरणों की जांच यहीं करा पाएंगी। इससे प्रदूषण से जुड़े जो भी आंकड़े सामने आएंगे उन पर जनता का भरोसा बढ़ेगा क्योंकि वे हमारे अपने वातावरण के हिसाब से जाँचे गए होंगे।

छोटे कारोबारियों के लिए खुलेगा बड़ा रास्ता

इन लैब का सबसे ज्यादा फायदा हमारे देश के छोटे उद्योगों (MSMEs) और स्टार्टअप्स को होगा। पहले क्वालिटी सर्टिफिकेट के लिए विदेश में मोटी फीस चुकानी पड़ती थी और काफी समय भी बर्बाद होता था। अब देश के भीतर ही कम खर्चे में विश्व स्तरीय सर्टिफिकेट मिल जाएगा।

इससे न केवल विदेशी बाजारों में भारतीय सामान की स्वीकार्यता बढ़ेगी, बल्कि ‘जीरो डिफेक्ट-जीरो इफेक्ट’ का सपना भी सच होगा। 80 सालों से भारतीय मानक समय (IST) और माप-तौल की शुद्धता बनाए रखने वाला CSIR-NPL अब क्वांटम टेक्नोलॉजी और बायोमेडिकल के क्षेत्र में भी नए कीर्तिमान स्थापित करने की ओर बढ़ रहा है।

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