चांदी में ऐतिहासिक महा-गिरावट: ₹1 लाख प्रति किलो तक टूटे दाम, जानें क्या अब चांदी बेचना ही समझदारी है?
MCX पर चांदी की कीमतों में 25% की भारी गिरावट! रिकॉर्ड ऊंचाई से ₹1,00,000 प्रति किलो सस्ता हुआ मेटल। क्या डोनाल्ड ट्रम्प का फैसला है इस क्रैश की वजह? पढ़ें पूरी रिपोर्ट और एक्सपर्ट्स की सलाह।
- एक ही दिन में चांदी की चमक हुई फीकी, ₹1,00,000 प्रति किलो की ऐतिहासिक गिरावट से बाजार में हड़कंप
- चांदी ने दिखाए अपने मिजाज, रिकॉर्ड ऊंचाई से धड़ाम होकर वापस 3 लाख के स्तर पर पहुंची कीमतें
- ट्रम्प का एक फैसला और डॉलर की दहाड़ ने बिगाड़ा कीमती धातुओं का खेल, निवेशक हुए पस्त
भारतीय सर्राफा बाजार में शुक्रवार का दिन किसी डरावने सपने से कम नहीं रहा। कल तक जो चांदी निवेशकों को अमीर बनाने के सपने दिखा रही थी और 4 लाख रुपये के स्तर को छूने की तैयारी में थी, उसने आज ऐसी करवट ली कि बाजार में हाहाकार मच गया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की कीमतों में करीब 25 प्रतिशत की ‘ब्रूटल’ गिरावट दर्ज की गई। एक ही झटके में चांदी की कीमत प्रति किलो लगभग 1,00,000 रुपये तक साफ हो गई। जो लोग कल तक ऊंचे भाव पर खरीदारी की सोच रहे थे, वे अब सहमे हुए हैं और पूछ रहे हैं कि आखिर रातों-रात ऐसा क्या बदल गया?
अमेरिका से आई उस ‘एक खबर’ ने बदल दी बाजी
इस पूरी गिरावट की जड़ें सात समंदर पार अमेरिका में जुड़ी हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जैसे ही फेडरल रिजर्व के अगले अध्यक्ष के तौर पर केविन वॉर्श के नाम का ऐलान किया, ग्लोबल मार्केट का रुख पूरी तरह पलट गया। वॉर्श के आने की खबर ने अमेरिकी डॉलर में जान फूंक दी, जिससे डॉलर इंडेक्स पिछले साल मई के बाद अपनी सबसे बड़ी छलांग लगाने में कामयाब रहा। नियम सीधा है—जब-जब डॉलर मजबूत होगा, सोना-चांदी जैसे निवेश फीके पड़ने लगेंगे। इसी डॉलर की मजबूती ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चांदी को 121 डॉलर से सीधे 85 डॉलर के आसपास लाकर पटक दिया।
सोने की चमक भी पड़ी धुंधली
सिर्फ चांदी ही नहीं, सोने ने भी निवेशकों को तगड़ा झटका दिया है। MCX पर सोने के फरवरी वायदा में करीब 12 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 1,50,440 रुपये के स्तर पर आ गया। जानकार कहते हैं कि चांदी हमेशा सोने की चाल को और ज्यादा आक्रामक तरीके से दोहराती है। जब सोना थोड़ा गिरता है, तो चांदी में भारी उथल-पुथल मच जाती है क्योंकि इसमें सट्टेबाजी और लिक्विडिटी का खेल बहुत ज्यादा होता है।
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अब निवेशक क्या करें?
बाजार में आई इस सुनामी के बाद जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज का कहना है कि मौजूदा स्तर पर चांदी की दिशा भांपना बहुत मुश्किल हो गया है। उन्होंने साफ हिदायत दी है कि फिलहाल नई खरीदारी से बचें और जो पहले से निवेश किए हुए हैं, वे 3,00,000 रुपये का स्टॉप-लॉस जरूर लगाकर रखें। हालांकि, रिस्क लेने वालों के लिए भविष्य में 4.5 लाख तक के दरवाजे खुले हो सकते हैं, लेकिन मौजूदा जोखिम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
वहीं जियोजित इन्वेस्टमेंट्स का नजरिया थोड़ा अलग है। उनका मानना है कि चांदी की यह गिरावट इसकी फितरत का हिस्सा है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और मेडिकल सेक्टर में बढ़ती मांग के कारण चांदी की अहमियत कम नहीं होगी, लेकिन फिलहाल बाजार ‘ओवरबॉट’ था, यानी जरूरत से ज्यादा खरीदारी हो चुकी थी, इसलिए यह सुधार (कलेक्शन) तो आना ही था।
एक कड़वा सच
भले ही शुक्रवार की गिरावट ने सबकी सांसें रोक दी हों, लेकिन चांदी अभी भी इस साल जनवरी के अपने बेहतरीन प्रदर्शन की राह पर है। जानकारों का कहना है कि अगर आप लंबे समय के खिलाड़ी हैं, तो चांदी के औद्योगिक इस्तेमाल और पिछले पांच सालों से इसकी सप्लाई में आ रही कमी पर भरोसा रख सकते हैं। मगर ध्यान रहे, चांदी का मिजाज बहुत अनिश्चित है। यहां पैसा वही बनाएगा जो उतार-चढ़ाव झेलने का दम रखता हो और अनुशासन के साथ निवेश करे।
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