स्मॉल सेविंग स्कीम्स पर बड़ा अपडेट: PPF, Sukanya, SCSS पर जनवरी-मार्च 2026 के लिए ब्याज दरें जारी
वित्त मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2025-26 की आखिरी तिमाही (जनवरी-मार्च 2026) के लिए सभी Small Savings Schemes की ब्याज दरें पहले जैसी ही रखने का फैसला किया है। PPF 7.1%, SCSS और Sukanya 8.2%, NSC 7.7% और MIS 7.4% पर ही चलेंगी।
- जनवरी–मार्च 2026 में स्मॉल सेविंग्स ब्याज दरें स्थिर
- PPF, SCSS, Sukanya पर वही पुराने रेट लागू
- मिडिल क्लास निवेशकों को न राहत, न झटका
- सरकार ने नई तिमाही में ब्याज दरें नहीं बढ़ाईं
Small Savings Update: नए साल की शुरुआत से ठीक पहले केंद्र सरकार ने छोटी बचत योजनाओं (Small Savings Schemes) में निवेश करने वाले करोड़ों लोगों के लिए साफ संदेश दे दिया है। जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही में भी आपको पहले जैसा ही ब्याज मिलेगा न एक पैसा ज्यादा न कम।
वित्त मंत्रालय ने नोटिफिकेशन (notification) जारी कर स्पष्ट किया है कि वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही यानी 1 जनवरी 2026 से 31 मार्च 2026 तक सभी स्मॉल सेविंग स्कीम्स की ब्याज दरें वही रहेंगी जो अक्टूबर से दिसंबर 2025 के लिए तय थीं। सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब बैंक डिपॉजिट और मार्केट-लिंक्ड प्रोडक्ट्स में रिटर्न को लेकर लगातार तुलना हो रही है और मिडिल क्लास निवेशक स्थिर आय (stable income) वाले विकल्पों पर खास नजर बनाए हुए हैं।
कौन सी स्कीम पर कितना ब्याज मिलेगा अब
नोटिफिकेशन के अनुसार Public Provident Fund (PPF) पर निवेशकों को पहले की तरह 7.1 प्रतिशत वार्षिक ब्याज मिलता रहेगा, जबकि Senior Citizen Savings Scheme (SCSS) और Sukanya Samriddhi Yojana (SSY) अकाउंट पर 8.2 प्रतिशत का आकर्षक रिटर्न जारी रहेगा।
पोस्ट ऑफिस सेविंग्स डिपॉजिट (Post Office Savings Deposit) खाते में ब्याज दर 4 प्रतिशत रह गई है, जबकि टाइम डिपॉजिट (Time Deposit) यानी 1 से 5 साल की फिक्स्ड डिपॉजिट पर 6.7 प्रतिशत से 7.5 प्रतिशत के बीच ब्याज मिलेगा, जो अलग-अलग अवधि के अनुसार बदलता है।
नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (National Savings Certificate–NSC) पर जनवरी-मार्च तिमाही में भी 7.7 प्रतिशत ब्याज मिलेगा, वहीं किसान विकास पत्र (Kisan Vikas Patra–KVP) पर 7.5 प्रतिशत रिटर्न के साथ निवेश करीब 115 महीने में दोगुना होने की दिशा में चलता रहेगा।
मंथली इनकम स्कीम (Monthly Income Scheme–MIS), जो हर महीने तय आय पाने वाले रिटायर्ड और कन्जर्वेटिव निवेशकों के लिए लोकप्रिय विकल्प है, उस पर भी 7.4 प्रतिशत की ब्याज दर जस की तस रखी गई है।
पूरी तिमाही का ब्याज रेट पर एक नजर
वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी-मार्च तिमाही के लिए प्रमुख छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरें इस तरह रहेंगी, जो पिछली दो तिमाहियों से बिल्कुल नहीं बदली हैं।
राष्ट्रीय बचत आवर्ती जमा खाता (5-वर्षीय RD) पर 6.70 प्रतिशत ब्याज जारी रहेगा, जो स्थिर किस्तों में बचत करने वालों के लिए मध्यम रिटर्न वाला विकल्प बना हुआ है।
1-वर्षीय सावधि जमा पर 6.90 प्रतिशत, 2-वर्षीय पर 7 प्रतिशत, 3-वर्षीय पर 7.10 प्रतिशत और 5-वर्षीय टाइम डिपॉजिट पर 7.50 प्रतिशत ब्याज मिलेगा, जो खासकर लंबी अवधि में फिक्स्ड इनकम (fixed income) चाहने वालों के लिए पोस्ट ऑफिस को बैंक एफडी के मुकाबले प्रतिस्पर्धी बनाता है।
वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (SCSS) और सुकन्या समृद्धि योजना पर 8.20 प्रतिशत, NSC पर 7.70 प्रतिशत और मासिक आय योजना पर 7.40 प्रतिशत का रिटर्न सरकार की तरफ से इस तिमाही में भी अपरिवर्तित रखा गया है जिससे पिछली जुलाई-सितंबर और अक्टूबर-दिसंबर तिमाहियों जैसा ही ब्याज मिलता रहेगा।
क्यों नहीं बढ़ रहीं दरें?
छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरें तय करने के लिए वित्त मंत्रालय श्यामला गोपीनाथ समिति (Shyamala Gopinath Committee) की सिफारिशों को आधार बनाता है, जिसमें साफ कहा गया है कि अलग-अलग स्कीम्स की दरें 10-साल की सरकारी बॉन्ड (10-year G-Sec) यील्ड के ऊपर 25 से 100 बेसिस पॉइंट (basis point) यानी 0.25 से 1.00 प्रतिशत के स्प्रेड में होनी चाहिए।
सिद्धांत रूप से यह फॉर्मूला मार्केट मूवमेंट (market movement) और गवर्नमेंट बॉन्ड यील्ड के हिसाब से हर तिमाही ब्याज दरों में समायोजन का रास्ता खोलता है, लेकिन हकीकत यह है कि अप्रैल 2024 के बाद से सरकार ने बार-बार दरों को स्थिर रखकर महंगाई उधारी लागत (borrowing cost) और छोटी बचत पर निर्भरता के बीच संतुलन साधने की कोशिश की है।
यही वजह है कि PPF, NSC, SCSS और Sukanya जैसी स्कीम्स में निवेश करने वाले लोग अब लगातार सातवीं तिमाही से वही ब्याज दर देख रहे हैं जबकि बॉन्ड मार्केट में यील्ड्स समय-समय पर ऊपर-नीचे होती रही हैं।
निवेशकों के लिए इसका मतलब क्या होगा
उन निवेशकों के लिए जो रिस्क-फ्री (risk-free) या लगभग गारंटी वाले रिटर्न की तलाश में रहते हैं, यह फैसले राहत और निराशा दोनों साथ लेकर आते हैं – राहत इसलिए कि अचानक ब्याज दर कम नहीं हुई, और निराशा इसलिए कि बढ़ती महंगाई के बीच रियल रिटर्न (real return) बहुत तेज़ी से नहीं बढ़ पा रहा।
मिडिल क्लास परिवारों के लिए PPF अभी भी टैक्स-फ्रेंडली दीर्घकालिक निवेश (long-term investment) बना हुआ है, जबकि लड़कियों की पढ़ाई और शादी जैसे दीर्घकालिक लक्ष्यों के लिए Sukanya Samriddhi Yojana 8.2 प्रतिशत की मजबूत दर के साथ एक प्रीमियम स्कीम की तरह बनी हुई है।
रिटायरमेंट के बाद नियमित कैश फ्लो चाहने वाले वरिष्ठ नागरिकों के लिए SCSS और Monthly Income Scheme का कॉम्बिनेशन, मौजूदा ब्याज दर स्ट्रक्चर में भी, बैंक एफडी और कुछ कॉरपोरेट बांड की तुलना में काफी प्रतिस्पर्धी माना जा रहा है खासकर जब सरकारी गारंटी (sovereign guarantee) और लो-रिस्क प्रोफाइल को भी शामिल किया जाए।
पोर्टफोलियो मिक्स, G-Sec से लिंक और रिव्यू का सही समय
फाइनेंशियल प्लानिंग (financial planning) एक्सपर्ट्स लगातार जोर दे रहे हैं कि PPF, Sukanya, SCSS जैसी स्कीमों को पोर्टफोलियो की सुरक्षित नींव (safe core) की तरह रखा जा सकता है, लेकिन लंबी अवधि की ग्रोथ के लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड या अन्य मार्केट-लिंक्ड विकल्पों के साथ संतुलन बनाना जरूरी है।
क्योंकि छोटी बचत योजनाएं सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से G-Sec यील्ड से लिंक हैं, इसलिए निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि जब भी सरकारी बॉन्ड यील्ड में लगातार कई तिमाहियों तक तेज़ बदलाव दिखाई दें तब अगली तिमाही के रेट रिव्यू (rate review) पर विशेष नजर रखनी चाहिए।
फिलहाल जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही तक तो तस्वीर साफ है – अगर आपने PPF, NSC, SCSS, KVP या Sukanya में निवेश की योजना बना रखी है, तो आपको मौजूदा रेट पर ही निर्णय लेना होगा क्योंकि निकट भविष्य में कम से कम इस तिमाही के बीच किसी बदलाव की संभावना नहीं है।
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