परिवार पहचान पत्र को लेकर गंभीर मामला आया सामने, पानीपत के एक वरिष्ठ नागरिक ने लगाया आरोप
हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने इस शिकायत को बहुत गंभीरता से लिया। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा ने इसे प्रशासन की नाकामी और असंवेदनशीलता का मामला बताया। उन्होंने कहा कि यह घटना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सम्मान के साथ जीने के अधिकार का उल्लंघन है। साथ ही यह वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण से जुड़े कानूनों का भी उल्लंघन करता है।
Haryana News – हरियाणा में परिवार पहचान पत्र (PPP) को लेकर हाल ही में एक गंभीर मामला सामने आया है जिसने कई लोगों का ध्यान खींचा है। पानीपत के एक वरिष्ठ नागरिक ने आरोप लगाया है कि उनका परिवार पहचान पत्र बिना किसी सूचना के बंद कर दिया गया जिसके कारण उन्हें कई सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा। इस मामले को हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने गंभीरता से लिया है और सात विभागों को नोटिस जारी किया है।
क्या है परिवार पहचान पत्र?
परिवार पहचान पत्र हरियाणा सरकार की एक पहल है जिसके जरिए राज्य के नागरिकों को सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सके। यह पत्र हर परिवार की जानकारी को एक डेटाबेस में रखता है ताकि जरूरतमंद लोगों को पेंशन, आवास, राशन जैसी सुविधाएं दी जा सकें। लेकिन अगर यह पत्र बिना कारण बंद हो जाए तो लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
पानीपत के वरिष्ठ नागरिक की शिकायत
पानीपत के अमर सिंह मुरवाला जो एक वरिष्ठ नागरिक हैं ने हरियाणा मानवाधिकार आयोग को बताया कि उनका परिवार पहचान पत्र बिना किसी सूचना के निष्क्रिय कर दिया गया। इसके कारण उन्हें कई सरकारी योजनाओं जैसे अंत्योदय अन्न योजना, वृद्धावस्था पेंशन, और आवास योजनाओं (प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना) का लाभ नहीं मिला।
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अमर सिंह ने यह भी बताया कि वह भूमिहीन और आर्थिक रूप से कमजोर हैं। इसके बावजूद उन्हें कोई आवास सहायता नहीं दी गई। वह पानीपत के रेड क्रॉस वृद्धाश्रम में रह रहे हैं जहां की स्थिति को उन्होंने अस्वास्थ्यकर और असुरक्षित बताया। उनके मुताबिक वहां रहने की हालत इतनी खराब है कि उनके स्वास्थ्य और सम्मान को खतरा है।
मानवाधिकार आयोग ने क्या किया
हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने इस शिकायत को बहुत गंभीरता से लिया। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा ने इसे प्रशासन की नाकामी और असंवेदनशीलता का मामला बताया। उन्होंने कहा कि यह घटना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सम्मान के साथ जीने के अधिकार का उल्लंघन है। साथ ही यह वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण से जुड़े कानूनों का भी उल्लंघन करता है।
आयोग ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए और सात सरकारी विभागों को नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया है। इसके अलावा आयोग ने परिवार पहचान पत्र को तुरंत जांचने और दोबारा सक्रिय करने का आदेश दिया गया। इतना ही नहीं बल्कि आयोग की तरफ से पानीपत नगर निगम और रेड क्रॉस सोसाइटी को वृद्धाश्रम की स्थिति की जांच करने को कहा गया। अमर सिंह की पात्रता की दोबारा जांच कर उन्हें आवास या अन्य सहायता देने का निर्देश दिया गया।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की समस्या नहीं है बल्कि यह दिखाता है कि प्रशासनिक लापरवाही कैसे आम लोगों के जीवन को प्रभावित कर सकती है। परिवार पहचान पत्र जैसी योजनाएं लोगों की मदद के लिए बनाई गई हैं लेकिन अगर इन्हें ठीक से लागू नहीं किया जाता तो यह जरूरतमंद लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकती हैं।
खास तौर पर वरिष्ठ नागरिकों जो पहले से ही कमजोर स्थिति में हैं के लिए ऐसी लापरवाही उनके जीवन को और मुश्किल बना सकती है। यह मामला हमें यह भी सोचने पर मजबूर करता है कि सरकारी योजनाओं को लागू करने में पारदर्शिता और जवाबदेही कितनी जरूरी है।
आप क्या कर सकते हैं?
अगर आपके या आपके किसी जानने वाले के साथ भी परिवार पहचान पत्र से जुड़ी ऐसी कोई समस्या हो रही है तो आप स्थानीय प्रशासन या मानवाधिकार आयोग में अपनी शिकायत दर्ज करें। अगर आपका परिवार पहचान पत्र निष्क्रिय हुआ है तो इसके कारण और समाधान के बारे में जानकारी मांगें। अगर आपको लगता है कि आपके अधिकारों का हनन हो रहा है तो कानूनी सलाह लें। सरकारी योजनाओं और अपने अधिकारों के बारे में जानकारी रखें ताकि कोई भी आपको गलत जानकारी न दे सके।
परिवार पहचान पत्र जैसी योजनाएं जरूरतमंद लोगों की जिंदगी आसान बनाने के लिए हैं लेकिन अगर इनका सही तरीके से इस्तेमाल न हो तो यह परेशानी का कारण बन सकती हैं। हरियाणा मानवाधिकार आयोग का यह कदम एक मिसाल है कि कैसे नागरिकों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जा सकता है। हमें उम्मीद है कि इस मामले से प्रशासन को सबक मिलेगा और भविष्य में ऐसी गलतियां नहीं होंगी।
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