बेटी की मौत का इंसाफ मांगते पिता ने जोड़े हाथ, भिवानी के ढाणी लक्ष्मण गांव में उबला गुस्सा – 30 नवंबर को भूख हड़ताल!

भिवानी (संजीव राणा): ढाणी लक्ष्मण गांव में उस मासूम मनीषा की रहस्यमय मौत ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है। मंगलवार दोपहर गांव के मुख्य चौपाल पर हुई पंचायत में सैकड़ों ग्रामीण जुटे और एक स्वर में चीख उठे – “हमें इंसाफ चाहिए!”
पिता की आंसुओं भरी गुहार, हाथ जोड़कर मांगा न्याय
पंचायत में सबसे दिल दहला देने वाला मंजर तब था जब मनीषा के पिता संजय ने सबके सामने हाथ जोड़ दिए। रोते-रोते बोले, “मेरी बेटी को इंसाफ दिलाओ भाइयो! CBI जांच को महीनों बीत गए, लेकिन हमें एक लाइन की जानकारी तक नहीं दी गई। जांच रेंग रही है, जैसे कोई खेल बना रखा हो।”
संजय की ये बात सुनकर पंचायत में सन्नाटा छा गया। मां-बाप का दर्द देखकर कई बुजुर्गों की आंखें भी भर आईं।
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30 नवंबर को गांव के चौक पर भूख हड़ताल, सर्वसम्मति से फैसला
गुस्साए ग्रामीणों ने तुरंत फैसला सुना दिया – 30 नवंबर को गांव के मुख्य चौक पर सांकेतिक धरना और भूख हड़ताल होगी। कोई पीछे नहीं हटेगा। पंचायत में मौजूद हर शख्स ने हाथ उठाकर सहमति जताई।
ग्रामीणों की मुख्य मांगें:
- CBI जल्द से जल्द मनीषा की मौत की असल वजह बताए
- परिवार को अब तक की जांच की पूरी रिपोर्ट सौंपी जाए
- दोषियों को फांसी की सजा हो
किसान नेता ने दी खुली चेतावनी – “आंदोलन को पूरे जिले में फैलाएंगे”
पंचायत में मौजूद प्रसिद्ध किसान नेता सुरेश कौथ ने मंच से गरजते हुए कहा, “हरियाणा सरकार सो रही है क्या? ये मासूम बच्ची की मौत का मामला है, मजाक नहीं! मुख्यमंत्री को तुरंत CBI को पत्र लिखना चाहिए कि जांच में तेजी लाओ।”
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उन्होंने साफ चेतावनी दी, “अगर 30 नवंबर तक कोई ठोस कदम नहीं उठा तो ये आंदोलन ढाणी लक्ष्मण से निकलकर पूरे भिवानी जिले में फैल जाएगा। ट्रैक्टर-ट्रालियां तैयार हैं!”
आसपास के गांवों से भी उमड़ा जनसैलाब
पंचायत में सिर्फ ढाणी लक्ष्मण ही नहीं, बल्कि ढाणी महिंदर, बड़वा, खरकड़ी, रूपगढ़ समेत दर्जन भर गांवों के लोग पहुंचे। महिलाएं भी बड़ी संख्या में आईं और नारे लगाते हुए बोलीं, “बेटी बचाओ का नारा देने वाले अब इंसाफ दिलाओ!”
ग्रामीणों ने बताया कि मनीषा की मौत के बाद से गांव में मातम पसरा है। बच्चियां डर के मारे अकेले बाहर नहीं निकल रही हैं।
अब देखना ये कि सरकार कब खोलेगी आंखें?
30 नवंबर का धरना अब पूरे इलाके की नजरों का केंद्र बन चुका है। ग्रामीणों ने साफ कह दिया है – “जब तक इंसाफ नहीं मिलेगा, चैन से नहीं बैठेंगे।”
अब सवाल ये है कि क्या हरियाणा सरकार इस मासूम की चीख सुन पाएगी? या फिर ग्रामीणों को सड़कों पर उतरना पड़ेगा?
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