गुरुग्राम में पब्लिक टॉयलेट्स की बड़ी मेकओवर योजना शुरू—4 बड़े शहरों का मॉडल लागू होगा, आएंगे स्मार्ट सेंसर्स
Haryana News: गुरुग्राम जो NCR की तेज़ी से बढ़ती आबादी और लगातार फैलते शहरी ढांचे के बीच सफाई को लेकर बड़ी चुनौती झेल रहा है, अब अपने पब्लिक और कम्युनिटी टॉयलेट नेटवर्क की पूरी तस्वीर बदलने की ओर कदम बढ़ा रहा है। नगर निगम ने तय किया है कि शहर के खराब हाल में पड़े टॉयलेट्स को नए स्टैंडर्ड पर री-डिज़ाइन किया जाएगा और इसके लिए देश के चार शहरों—कोलकाता, पुडुचेरी, सूरत और इंदौर—के सफल मॉडल को अपनाया जाएगा।
नगर निगम ने इन चारों शहरों से रिक्वेस्ट फॉर प्रपोज़ल (RFP) भी मंगवा लिए हैं ताकि उनके डिज़ाइन, ऑपरेशन मॉडल और मेंटेनेंस सिस्टम को समझकर गुरुग्राम के लिए एक नई ब्लूप्रिंट तैयार की जा सके।Haryana News
शहर बढ़ा, जरूरतें बढ़ीं… लेकिन सुविधाएं वहीं की वहीं
गुरुग्राम में फिलहाल लगभग 110 पब्लिक और कम्युनिटी टॉयलेट हैं, लेकिन हकीकत यह है कि इनका उपयोग करने में ज्यादातर लोग हिचकिचाते हैं। कहीं पानी की कमी है कहीं वेंटिलेशन खराब और कई जगहों पर तो सफाई की स्थिति बेहद दयनीय है।Haryana News
तेज़ी से बढ़ती आबादी को देखते हुए अधिकारियों का मानना है कि अब नए टॉयलेट बनाना और पुराने टॉयलेट्स का रिडेवलपमेंट दोनों ही अनिवार्य हो चुका है।
स्मार्ट टेक्नोलॉजी पर जोर — ‘थोड़ी गंदगी भी तुरंत दिखेगी सिस्टम पर’
कोलकाता, पुडुचेरी और सूरत ने पहले ही पब्लिक टॉयलेट को सेंसर-बेस्ड टेक्नोलॉजी से जोड़कर मॉनिटरिंग को लगभग ऑटोमैटिक बना दिया है।Haryana News
यहां लगे GPS और IoT-बेस्ड सिस्टम रियल-टाइम में पानी, बदबू और सफाई की स्थिति मॉनिटर करते हैं। जैसे ही कोई गड़बड़ी होती है, कॉर्पोरेशन की टीम को तुरंत अलर्ट मिल जाता है।
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इंदौर भी अपने 350 स्मार्ट पब्लिक टॉयलेट्स में ऐसे ही सिस्टम लगा रहा है जिसे देश में सबसे प्रभावी मॉडल माना जा रहा है। गुरुग्राम का निगम चाहता है कि इसी टेक्नोलॉजी का सबसे बेहतर मिश्रण यहां लागू किया जाए।Haryana News
डिजिटल मॉनिटरिंग + रेवेन्यू मॉडल = टिकाऊ सिस्टम
गुरुग्राम की RFP में सिर्फ डिजाइन या टेक्नोलॉजी ही नहीं, बल्कि रेवेन्यू मॉडल, डोर-टू-डोर मैनेजमेंट और डिजिटल सुपरविज़न सिस्टम भी शामिल हैं।
उद्देश्य यह है कि पब्लिक टॉयलेट न सिर्फ साफ़ रहें, बल्कि उनका संचालन लंबे समय तक आर्थिक रूप से भी टिकाऊ रहे।Haryana News
शहरवासियों को उम्मीद—‘कम से कम अब टॉयलेट का मतलब टेंशन नहीं होगा’
स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर आधुनिक मॉडल वाकई लागू होता है तो रोजमर्रा की जिंदगी काफी आसान हो जाएगी। खासकर बाजारों, बस स्टैंड और घनी आबादी वाले इलाकों में लोग सुरक्षित, साफ और बदबू-रहित टॉयलेट की सुविधा का इंतजार लंबे समय से कर रहे हैं।Haryana News
गुरुग्राम में यह पहल सिर्फ सफाई मिशन का हिस्सा नहीं है—यह शहर को भविष्य के स्मार्ट अर्बन मॉडल की ओर ले जाने वाला कदम माना जा रहा है।
अब सबकी निगाहें इस पर हैं कि RFP के बाद कौन-सा मॉडल चुना जाता है और कितनी तेजी से काम जमीन पर उतरता है।Haryana News
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