Haryana News: आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिलेगा प्रमोशन का तोहफा, CM नायब सैनी ने लिया बड़ा फैसला

हरियाणा में 10 साल के अनुभव वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अब बनेंगी सुपरवाइजर। CM नायब सैनी ने कुपोषण मिटाने के लिए चूरमा और काले चने देने का भी किया ऐलान। पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

  • आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए खुशखबरी: अब पदोन्नति से बन सकेंगी सुपरवाइजर
  • हरियाणा को कुपोषण मुक्त करने का संकल्प: काले चने, चूरमा और किन्नू से सुधरेगी बच्चों की सेहत
  • सक्षम आंगनबाड़ी और प्ले-वे स्कूल: 81 करोड़ की लागत से बदल जाएगी बचपन की सूरत
  • कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा: प्रदेश के कई जिलों में बनकर तैयार हो रहे हैं नए हॉस्टल

Haryana News: हरियाणा की उन हज़ारों आंगनबाड़ी बहनों के लिए आज की सुबह एक नई उम्मीद लेकर आई है, जो सालों से ज़मीनी स्तर पर बच्चों और माताओं की सेवा में जुटी थीं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने एक बड़ा फैसला लेते हुए यह साफ कर दिया है कि अब अनुभव की कद्र होगी। चंडीगढ़ में महिला एवं बाल विकास विभाग की बैठक में यह तय हुआ कि जिन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के पास 10 साल का अनुभव है और जो पात्रता पूरी करती हैं, उन्हें अब पदोन्नति (प्रमोशन) देकर सुपरवाइजर बनाया जाएगा।

इस फैसले का सीधा मतलब यह है कि अब सुपरवाइजर के आधे पद इन्हीं अनुभवी कार्यकर्ताओं से भरे जाएंगे, जबकि बाकी 50 फीसदी पर सीधी भर्ती होगी। इस बैठक में कैबिनेट मंत्री श्रुति चौधरी की मौजूदगी ने यह संकेत दे दिया कि सरकार महिला सशक्तिकरण के दावों को अब धरातल पर उतारने के लिए कमर कस चुकी है।

खाने की थाली में अब चूरमा और काले चने का स्वाद

बात सिर्फ नौकरियों तक सीमित नहीं है, सरकार की नज़र प्रदेश के उस बचपन पर भी है जो कुपोषण की मार झेल रहा है। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि बच्चों को कुपोषण से बाहर निकालना कोई सरकारी लक्ष्य नहीं, बल्कि एक मानवीय जिम्मेदारी है। अब आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को सिर्फ साधारण राशन नहीं, बल्कि उबले हुए काले चने, देसी स्वाद वाला चूरमा और विटामिन से भरपूर किन्नू भी दिया जाएगा।

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यह प्रयोग पहले नूंह जिले में सफल रहा था, और अब सरकार इसी ‘नूंह मॉडल’ की रेसिपी को पूरे हरियाणा में लागू करने जा रही है। आंकड़े गवाह हैं कि साल 2024 में चिन्हित किए गए 80 हजार कुपोषित बच्चों में से 54 हजार अब स्वस्थ हो चुके हैं। बाकी बचे 26 हजार बच्चों को भी जल्द इस चक्रव्यूह से बाहर निकालने की तैयारी है।

बदलती आंगनबाड़ियों की नई तस्वीर

पुराने ढर्रे की आंगनबाड़ियों के दिन अब लदने वाले हैं। सरकार लगभग 81 करोड़ रुपये खर्च करके 2000 आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक ‘प्ले-वे स्कूल’ में तब्दील कर रही है। इसके अलावा, 2807 केंद्रों को ‘सक्षम आंगनबाड़ी’ के रूप में अपग्रेड किया जा रहा है, जिसके लिए साजो-सामान खरीदने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसका मकसद साफ है—गरीब का बच्चा भी अब प्राइवेट स्कूलों जैसी सुविधाओं के साथ अपना बचपन संवारेगा।

कामकाजी महिलाओं और बेटियों के लिए सुरक्षित ठिकाना

शहरों में काम करने वाली महिलाओं की सुरक्षा और उनके रहने की समस्या को देखते हुए सोनीपत, गुरुग्राम, फरीदाबाद, रेवाड़ी और चरखी दादरी में कामकाजी महिला हॉस्टल बनाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने पानीपत में भी ऐसा ही हॉस्टल बनाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, मुश्किल वक्त में फंसी महिलाओं के लिए ‘सखी सेंटर’ मील का पत्थर साबित हो रहे हैं, जहां अब तक 57 हजार से ज्यादा महिलाओं को कानूनी और चिकित्सा सहायता मिल चुकी है।

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कुल मिलाकर, नायब सरकार ने अपने पिछले बजट की 66 घोषणाओं में से 59 को पूरा कर यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे जो कहते हैं, उसे ज़मीन पर उतारने का माद्दा भी रखते हैं।

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