हरियाणा में डॉक्टरों की हड़ताल पर बड़ा फैसला: सरकार ने 4 में से 3 मांगें मानी, SMO भर्ती पर तत्काल रोक
Haryana News: हरियाणा में तीन दिनों से जारी डॉक्टरों की नाराज़गी आखिरकार सरकार को झुकाने में सफल रही है। लगातार बढ़ते तनाव, अस्पतालों में मरीजों की लगी लंबी कतारें और स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ते दबाव के बीच मुख्यमंत्री नायब सैनी ने देर रात बड़ा ऐलान किया—डॉक्टरों की चार में से तीन मांगे मान ली गई हैं। सबसे विवादित मांग, यानी SMO की सीधी भर्ती पर रोक, तत्काल प्रभाव से लागू करने पर सरकार सहमत हो गई है।
लेकिन ACP संरचना में बदलाव की मांग फिलहाल ठंडे बस्ते में ही रहेगी। सरकार का तर्क है कि इस मुद्दे पर अन्य राज्यों की व्यवस्था का तुलनात्मक अध्ययन जरूरी है, और जब तक रिपोर्ट नहीं आती, तब तक कोई फैसला नहीं लिया जाएगा।
तनाव चरम पर पहुंचा था — एस्मा लागू, फिर भी हड़ताल की चेतावनी
प्रदेश में डॉक्टरों की दो दिन की हड़ताल (8–9 दिसंबर) ने स्वास्थ्य ढांचे को लगभग कांपने पर मजबूर कर दिया था। कई जिलों में OPD ठप रही, मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ा और आपातकालीन सेवाओं पर भी असर दिखा।
सरकार ने स्थिति बिगड़ते देख एस्मा लागू कर दिया, जिससे अगले छह महीने तक किसी भी डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी को हड़ताल पर जाने की अनुमति नहीं है।
फिर भी डॉक्टरों ने 10 दिसंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया।
CM का सख्त लेकिन संतुलित संदेश—‘राजनीति से दूर रहें डॉक्टर’
मामला बढ़ता देख मुख्यमंत्री नायब सैनी खुद सामने आए और साफ कहा कि सरकार खुले मन से बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने बताया कि—
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CMO/SMO की सीधी भर्ती पर रोक लगा दी गई है।
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प्रमोशन और सेवा शर्तों से जुड़ी दो अन्य मांगों पर भी सहमति बन गई है।
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लेकिन ACP संरचना में बदलाव की मांग मंजूर नहीं होगी।
सैनी ने डॉक्टरों से अपील भी की कि वे किसी भी राजनीतिक प्रभाव से दूरी रखें। उनका कहना था कि राज्य के सरकारी अस्पतालों में लगातार सुधार हो रहे हैं और लोग अब सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर अधिक भरोसा दिखा रहे हैं। ऐसे समय में हड़ताल से जनता को ही सबसे अधिक चोट पहुंचती है।
डॉक्टर क्या चाहते थे? जानिए पूरी लिस्ट
डॉक्टरों की तीन मुख्य मांगें थीं—
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SMO की सीधी भर्ती पर रोक (ताकि प्रमोशन का रास्ता बाधित न हो)
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केंद्र सरकार की तर्ज पर ACP प्रणाली—4, 9, 13 और 20 वर्ष की सेवा के बाद प्रमोशन
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ग्रेड पे बढ़ाकर 9500 रुपये करने की मांग, जो अभी 7600 है
इनमें से दो मांगों पर सहमति बन चुकी है और एक पर आंशिक राहत।
अब आगे क्या?
सरकार द्वारा मांगें मानने के बाद अब पूरी नज़र डॉक्टर संगठनों की अगली प्रतिक्रिया पर है। क्या वे 10 दिसंबर की प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल वापस लेंगे?
प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए यह फैसला बेहद अहम होने जा रहा है।
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