Haryana News: पलवल के इस गांव में ‘जहरीला’ हुआ पानी, हेपेटाइटिस के 26 नए मरीज मिलने से हड़कंप, अब तक 7 की मौत!
हरियाणा के पलवल जिले के छांयसा गांव में दूषित पानी पीने से हेपेटाइटिस-C और B का कहर टूट पड़ा है। 26 नए मरीजों की पुष्टि और 7 मौतों के बाद प्रशासन ने 24 अवैध कनेक्शन काटे हैं। गांव में ई-कोलाई बैक्टीरिया मिलने से हड़कंप मचा हुआ है और स्क्रीनिंग जारी है।
- पलवल के छांयसा गांव में हेपेटाइटिस का महा-विस्फोट
- दूषित पानी के सैंपल्स में मिला जानलेवा ई-कोलाई बैक्टीरिया
- प्रशासन की लापरवाही से अब तक 7 लोगों की गई जान
- अवैध वाटर कनेक्शनों पर चला पीला पंजा, 24 लाइनें कटीं
पलवल: इंदौर की त्रासदी अभी ठंडी भी नहीं पड़ी थी कि हरियाणा के पलवल जिले का छांयसा गांव एक बड़े स्वास्थ्य संकट की चपेट में आ गया है। यहाँ नलों से शुद्ध जल नहीं, बल्कि ‘खामोश मौत’ बह रही है। गांव में दूषित पानी के सेवन से हेपेटाइटिस-C और B का ऐसा विस्फोट हुआ है कि स्वास्थ्य विभाग के हाथ-पांव फूल गए हैं। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार को एक साथ हेपेटाइटिस-C के 26 और हेपेटाइटिस-B के 3 नए मरीजों की पुष्टि हुई है।
अवैध कनेक्शन और लीकेज बनी जानलेवा
ग्राउंड जीरो पर पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जब पानी के सैंपल लिए, तो चौंकाने वाले खुलासे हुए। छह घरों के पानी में जानलेवा ई-कोलाई (E. coli) बैक्टीरिया पाया गया है, जो सीधे तौर पर सीवरेज और पेयजल के मिलन की पुष्टि करता है। जांच में सामने आया कि गांव में बिछी पाइपलाइन में जगह-जगह लीकेज है और अवैध कनेक्शनों के मकड़जाल ने साफ पानी को जहरीला बना दिया है। प्रशासन ने आनन-फानन में 24 अवैध कनेक्शन काट दिए हैं, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यह कार्रवाई ‘ज्यादा देर, बहुत कम’ (Too little, too late) जैसी है।
प्रशासन की सुस्ती और मातम का शोर
ग्रामीणों का आरोप बेहद गंभीर है। उनका कहना है कि गांव में मौतों का सिलसिला लंबे समय से जारी था, लेकिन प्रशासन गहरी नींद में सोया रहा। जब पीलिया और हेपेटाइटिस ने महामारी का रूप ले लिया और 4 लोगों की जान चली गई, तब जाकर स्वास्थ्य विभाग की नींद टूटी। अब तक हेपेटाइटिस-B और C से 4 आधिकारिक मौतें दर्ज की गई हैं, जबकि पीलिया के कारण हुई 3 अन्य मौतों को भी इसी संक्रमण से जोड़कर देखा जा रहा है। डराने वाली बात यह भी है कि जांच के दौरान गांव में एक युवक HIV संक्रमित भी पाया गया है, जिसने स्वास्थ्य जोखिमों को और बढ़ा दिया है।
अब युद्ध स्तर पर बचाव कार्य
गांव में फैली दहशत को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने छांयसा को हाई-अलर्ट पर रखा है। अब पानी की सप्लाई में भारी मात्रा में क्लोरीन मिलाया जा रहा है ताकि बैक्टीरिया को मारा जा सके। मेडिकल कैंप लगाकर डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग और टीकाकरण अभियान शुरू किया गया है। लेकिन सवाल वही है—क्या मासूमों की जान जाने के बाद ही सिस्टम की आंखें खुलेंगी?
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