हरियाणा में इन किसानों को मिलेंगे 1200 रुपये प्रति एकड़, सरकार ने किया ऐलान
हरियाणा सरकार ने पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। धान कटाई के बाद पराली का सही प्रबंधन करने वाले किसानों को 1200 रुपये प्रति एकड़ की सहायता मिलेगी। योजना से प्रदूषण घटेगा और किसानों को सीधा फायदा होगा।
पराली जलाने से बनने वाले धुएं और बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए हरियाणा सरकार ने एक अहम और किसानों को सीधा फायदा देने वाला फैसला लिया है। सरकार ने तय किया है कि धान की कटाई के बाद पराली का सही प्रबंधन करने वाले किसानों को प्रति एकड़ आर्थिक सहायता दी जाएगी।
सरकार का मानना है कि इस कदम से जहां एक ओर पराली जलाने की घटनाओं में कमी आएगी, वहीं दूसरी ओर मिट्टी की सेहत सुधरेगी और किसानों की अतिरिक्त आमदनी भी सुनिश्चित होगी।
पराली संभालने पर किसानों को मिलेगा पैसा
नई व्यवस्था के तहत जो किसान पराली को खेत में ही काटकर मिट्टी में मिला देंगे या पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल करेंगे, उन्हें 1200 रुपये प्रति एकड़ की दर से सहायता राशि दी जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक यह भुगतान नए साल के पहले सप्ताह से किसानों के खातों में पहुंचना शुरू हो जाएगा।
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सरकार का उद्देश्य साफ है—पराली जलाने की मजबूरी को खत्म करना और उसका विकल्प आर्थिक प्रोत्साहन के जरिए देना।
सैटेलाइट से होगी निगरानी, गांवों की बदलेगी रैंकिंग
पराली जलाने और उसके प्रबंधन की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। ISRO के जरिए पराली जलाने से जुड़े आंकड़े जुटाए गए हैं। इन आंकड़ों के आधार पर हरियाणा अंतरिक्ष उपयोग केंद्र द्वारा गांवों को रेड, येलो और ग्रीन जोन में वर्गीकृत किया जाएगा।
जिन गांवों में पराली जलाने के मामले कम होंगे, उन्हें रेड या येलो से ग्रीन जोन में लाया जाएगा, जिससे प्रशासनिक स्तर पर भी सकारात्मक प्रतिस्पर्धा बनेगी।
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धान के रकबे और पराली का पूरा गणित
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अनुसार, हरियाणा में इस सीजन करीब 41 लाख एकड़ में धान की बुवाई हुई थी। इसमें लगभग 22 लाख एकड़ में बासमती और करीब 18 लाख एकड़ में नॉन-बासमती धान की खेती की गई।
इससे कुल मिलाकर करीब 85.5 लाख मीट्रिक टन पराली निकली। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक:
- 44.4 लाख मीट्रिक टन पराली को खेत के अंदर ही मिट्टी में मिलाया गया
- 19 लाख मीट्रिक टन पराली को खेत से बाहर ले जाकर प्रबंधित किया गया
- करीब 22 लाख मीट्रिक टन पराली को पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल किया गया
प्रदूषण घटेगा, मिट्टी और सेहत दोनों को फायदा
सरकार का मानना है कि यह फैसला पराली जलाने की घटनाओं में निर्णायक कमी ला सकता है। पराली को जलाने के बजाय चारे या खेत की खाद के रूप में इस्तेमाल करने से हवा में जहरीले कण नहीं जाएंगे और मिट्टी की उपजाऊ क्षमता भी बनी रहेगी।
प्रदूषण का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ता है, खासकर सांस से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में यह योजना पर्यावरण और स्वास्थ्य—दोनों के लिहाज से अहम मानी जा रही है।
पिछले साल से बदले हालात, आगे और सुधार की उम्मीद
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार पराली जलाने के मामलों में कमी दर्ज की गई है। प्रशासन का कहना है कि किसान अब ज्यादा जागरूक हो रहे हैं और आर्थिक प्रोत्साहन मिलने से भविष्य में पराली जलाने की घटनाएं और घटने की उम्मीद है।
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