हरियाणा में बंधुआ मजदूर बनाया गया बिहार का मासूम, 4 महीने बाद आरोपी अनिल गिरफ्तार
हरियाणा के बहादुरगढ़ से लापता हुए बिहार के 15 वर्षीय बच्चे को बंधुआ मजदूर बनाने वाले आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। चारा काटते समय घायल हुए बच्चे की नूंह में जान बची थी।
- अपनों से बिछड़ा तो बना लिया बंधुआ
- हरियाणा पुलिस ने 4 महीने बाद दबोचा मासूम का गुनहगार
- मशीन में चारा काटते वक्त कट गया था हाथ – नूंह के एक टीचर ने बचाई जान
- यूपी के गौतमबुद्ध नगर से गिरफ्तार हुआ आरोपी – लगातार बदल रहा था ठिकाना
Haryana News: हरियाणा के बहादुरगढ़ रेलवे स्टेशन की उस भीड़भाड़ में 15 साल का एक मासूम क्या जानता था कि अपने साथियों से एक पल की दूरी उसे नरक के दरवाजे पर खड़ा कर देगी। बिहार के किशनगंज से सुनहरे सपनों या शायद बस अपनों के साथ कहीं पहुंचने की उम्मीद में निकला यह बच्चा जब स्टेशन पर अकेला छूटा, तो उसे सहारा देने के लिए हाथ तो बढ़े लेकिन वो हमदर्दी के नहीं बल्कि गुलामी की बेड़ियों के थे।
पिछले साल हुई इस रूह कंपा देने वाली घटना में अब जाकर इंसाफ की पहली किरण दिखी है। हरियाणा राजकीय रेलवे पुलिस ने उस शख्स को दबोच लिया है जिसने न सिर्फ इस बच्चे को बंधुआ मजदूर बनाया, बल्कि उसकी जान जोखिम में डालकर उसे तिल-तिल मरने के लिए छोड़ दिया था।
मासूमियत का फायदा और वहशीपन की इंतहा
किशनगंज का यह लड़का जब बहादुरगढ़ स्टेशन पर अकेला पड़ा था, तब आरोपी अनिल उसे बहला-फुसलाकर एक डेयरी फार्म पर ले गया। वहां हमदर्दी का नकाब उतर गया और शुरू हुआ प्रताड़ना का वो दौर, जिसे सुनकर किसी का भी कलेजा कांप जाए। बच्चे से दिन-रात जानवरों की तरह काम कराया जाता था। हद तो तब हो गई जब चारा काटने वाली मशीन में काम करते समय मासूम को गंभीर चोट लगी, लेकिन इलाज कराने के बजाय उसे उसकी किस्मत पर छोड़ दिया गया।
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वह बच्चा डरा हुआ था, सहमा था और मानसिक तौर पर इस कदर टूट चुका था कि उसे अपनी पहचान तक याद नहीं रही। लेकिन कहते हैं न कि जाको राखे साइयां मार सके न कोय। घायल हालत में वह किसी तरह नूंह पहुंचा, जहां एक फरिश्ता बनकर आए स्कूल टीचर ने उसकी हालत देखी। शिक्षक ने न सिर्फ उसका इलाज करवाया बल्कि पुलिस को इस जुल्म की दास्तां सुनाई।
जांच की डगर नहीं थी आसान
अगस्त में जब मामला खुला, तो पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती बच्चे की मानसिक स्थिति थी। वह सदमे में था और अपने गुनहगार के बारे में कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं था। मामले की संजीदगी को देखते हुए हरियाणा रेलवे पुलिस अधीक्षक निकिता गहलोत ने मोर्चा संभाला। उन्होंने साइबर एक्सपर्ट्स और अनुभवी अफसरों की एक स्पेशल टीम (SIT) बनाई।
इस बीच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी मामले में दखल दिया। विशेषज्ञों की देखरेख में बच्चे के बयान फिर से दर्ज किए गए ताकि धुंधली यादों से सुराग निकाले जा सकें। पुलिस ने तकनीकी निगरानी और मैनुअल इनपुट के आधार पर कड़ियां जोड़नी शुरू कीं।
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4 महीने का पीछा और सलाखों के पीछे मुजरिम
आरोपी अनिल शातिर था। वह पुलिस से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था। कभी इस डेयरी पर तो कभी उस गांव में। लेकिन कानून के हाथ आखिरकार उसके गिरेबान तक पहुंच ही गए। चार महीने की कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने उसे उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर (नोएडा क्षेत्र) से धर दबोचा।
यह गिरफ्तारी सिर्फ एक अपराधी की पकड़ नहीं है, बल्कि उन तमाम मासूमों के लिए उम्मीद है जो आज भी कहीं न कहीं बंधुआ मजदूरी के अंधेरे में कैद हैं। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि क्या अनिल के पीछे कोई बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है जो रेलवे स्टेशनों से बिछड़ने वाले बच्चों को अपना निशाना बनाता है। फिलहाल, बच्चा सुरक्षित है और पुलिस उसे उसके परिवार से मिलाने और उसे न्याय दिलाने की प्रक्रिया में जुटी है।
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