हरियाणा बिजली बिल विवाद: भारी-भरकम बिल भेजने वाले अधिकारियों पर भारी जुर्माना, आयोग ने सुनाया बड़ा फैसला

हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन ने बिजली निगम की लापरवाही पर कड़ा एक्शन लिया है। औसत बिलिंग के नाम पर लाखों का बिल भेजने वाले अफसरों पर जुर्माना और उपभोक्ताओं को मुआवजा देने का आदेश जारी।

  • हरियाणा में बिजली उपभोक्ताओं की जेब पर ‘करंट’ लगाने वाले अधिकारियों की अब खैर नहीं
  • औसत बिलिंग के नाम पर हजारों-लाखों का चूना लगाने वाले अफसरों पर चला आयोग का डंडा
  • बहादुरगढ़ से हिसार तक बिजली निगम की मनमानी पर राइट टू सर्विस कमीशन सख्त
  • बिना सूचना भारी-भरकम बिल भेजने वाले अधिकारियों की जेब से कटेगा मुआवजे का पैसा

हरियाणा के आम आदमी के लिए बिजली का बिल सिर्फ एक कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि महीने भर के बजट का गणित होता है। लेकिन सोचिए, अगर महीनों तक आपको बिल ही न मिले या सिर्फ मामूली ‘औसत’ बिल आता रहे और अचानक एक दिन विभाग आपके हाथ में दो-तीन लाख रुपये का बिल थमा दे? यकीनन पैरों तले जमीन खिसक जाएगी। हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन ने बिजली निगमों (UHBVN और DHBVN) की इसी लापरवाही को अब ‘प्रशासनिक अपराध’ की श्रेणी में खड़ा कर दिया है। कमीशन ने साफ कर दिया है कि महकमे की सुस्ती का खामियाजा अब प्रदेश का ईमानदार उपभोक्ता नहीं भुगतेगा।

बहादुरगढ़ के एक पीड़ित उपभोक्ता की कहानी सिस्टम की उसी सड़ांध को उजागर करती है, जहां महीनों तक उसे अंधेरे में रखा गया। कभी बिल मिला ही नहीं, तो कभी मामूली रकम का ‘मिनिमम’ बिल भेजकर खानापूर्ति कर दी गई। विभाग तब जागा जब उसे 2.38 लाख रुपये वसूलने थे। उपभोक्ता ने जब गुहार लगाई तो सुधार के नाम पर भी आधा-अधूरा काम किया गया। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए आयोग ने विद्युत आपूर्ति संहिता का हवाला दिया और कहा कि उपभोक्ता को बिना पूर्व सूचना और पर्याप्त समय दिए इतना बड़ा बिल थमाना सरासर गलत है।

जिम्मेदारी से भाग रहे अधिकारियों पर सीधा प्रहार

आयोग ने इस मामले में केवल कागजी निर्देश जारी नहीं किए, बल्कि सीधे तौर पर जवाबदेही तय की है। बहादुरगढ़ मामले में दो सीए (कमर्शियल ऑडिटर्स) पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना ठोंका गया है। इतना ही नहीं, उन्हें अपनी जेब से उपभोक्ता को एक-एक हजार रुपये का मुआवजा भी देना होगा। सबसे बड़ी बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया को मंजूरी देने वाले एसडीओ के खिलाफ भी आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। उनके नाम को आयोग के ‘डिस्सैटिस्फैक्शन’ रिकॉर्ड में दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं, जो भविष्य में उनके करियर प्रोफाइल पर एक बड़ा दाग साबित हो सकता है।

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हिसार में 160 यूनिट की खपत और 3 लाख का बिल

हिसार से सामने आया मामला तो और भी चौंकाने वाला है। यहाँ एक उपभोक्ता के दो खातों में सालों तक औसत बिलिंग का खेल चलता रहा। जहां सामान्य तौर पर दो महीने में महज 160 यूनिट की खपत होती थी, वहां अचानक विभाग ने एक खाते में 45,000 यूनिट और दूसरे में 20,000 यूनिट का बोझ डाल दिया। इसके नतीजे में उपभोक्ता को 3 लाख और 98 हजार रुपये के बिल थमा दिए गए। मार्च 2020 से फरवरी 2024 तक विभाग सोता रहा और अंत में सारा बोझ जनता के सिर मढ़ दिया।

आयोग ने इस ‘एवरेज बिलिंग’ के खेल को खत्म करने के लिए एक मिसाल कायम की है। आदेश दिया गया है कि जुलाई 2022 से अब तक जितने भी गलत बिलिंग चक्र रहे हैं, उनमें प्रति बिल 500 रुपये की दर से उपभोक्ता को मुआवजा दिया जाए। यह राशि पहले निगम भरेगा और बाद में उन दोषी कर्मचारियों से वसूली जाएगी जिनकी मेज पर फाइलें दबी रही थीं।

व्यवस्था सुधारने की बड़ी चेतावनी

हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन का यह फैसला प्रदेश के उन हजारों बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक उम्मीद की किरण है, जो रोज दफ्तरों के चक्कर काटकर थक चुके हैं। बिजली महकमे में ‘एवरेज बिलिंग’ अक्सर नीचे से ऊपर तक की सुस्ती को छिपाने का जरिया बन गई है। आयोग के इस हंटर ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि अगर मीटर रीडिंग में देरी हुई या बिना बताए भारी-भरकम राशि थोपी गई, तो गाज सीधे जिम्मेदार अधिकारी पर गिरेगी। अब यह देखना होगा कि इस जुर्माने के बाद बिजली निगम के दफ्तरों की कार्यशैली में कितना सुधार आता है।

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