गणतंत्र दिवस 2026: इस बार कर्तव्य पथ पर क्यों नहीं दिखेगी हरियाणा की झांकी? जानें वजह
गणतंत्र दिवस 2026 की परेड में हरियाणा की झांकी नज़र नहीं आएगी। लगातार 4 साल तक चमकने के बाद इस बार रक्षा मंत्रालय की रोटेशन पॉलिसी के कारण राखीगढ़ी की थीम को मंज़ूरी नहीं मिली।
गणतंत्र दिवस 2026: इस बार 26 जनवरी को जब दिल्ली का कर्तव्य पथ देश की विविध संस्कृतियों और शौर्य की कहानियों से गुलज़ार होगा, तो वहां हरियाणा की कमी खलेगी। गणतंत्र दिवस की परेड में इस साल हरियाणा की झांकी नज़र नहीं आएगी।
रक्षा मंत्रालय की ओर से आए इस फैसले ने उन लोगों को थोड़ा मायूस ज़रूर किया है जो हर साल टीवी के सामने बैठ कर अपनी माटी की झलक देखने का इंतज़ार करते हैं।
हिसार के राखीगढ़ी की उस महान सभ्यता को दुनिया के सामने रखने का हरियाणा सरकार का सपना इस बार अधूरा रह गया। सरकार ने इस ऐतिहासिक विरासत को अपनी झांकी की थीम बनाया था लेकिन मंत्रालय के सख्त नियमों और रोटेशन की प्रक्रिया के बीच इसे इस साल जगह नहीं मिल सकी।
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आखिर क्यों कटा हरियाणा का पत्ता?
दरअसल, यह कोई राजनीतिक या प्रशासनिक चूक नहीं है, बल्कि एक तयशुदा नियम है। रक्षा मंत्रालय ने 77वें गणतंत्र दिवस के लिए कुल 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की झांकियों को हरी झंडी दिखाई है।
अधिकारियों का कहना है कि वे चाहते हैं कि देश के हर राज्य को अपनी झांकी दिखाने का बराबर अवसर मिले।
एक रोटेशन पीरियड तय किया गया है, ताकि वे प्रदेश भी दुनिया के सामने अपनी पहचान रख सकें जिन्हें पिछले कुछ सालों से मौका नहीं मिल पा रहा था।
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हरियाणा के साथ इस बार शायद इसलिए ‘ना’ हुई क्योंकि पिछले चार सालों से प्रदेश की झांकी लगातार कर्तव्य पथ की शोभा बढ़ा रही थी। मंत्रालय का मानना है कि विविधता बनाए रखने के लिए अब नए राज्यों को मंच देना ज़रूरी है।
पिछले सालों में दिखी थी धाक
अगर बीते सालों पर नज़र डालें तो हरियाणा ने अपनी झांकियों से हमेशा सबका दिल जीता है। चाहे वह साल 2015 में सुल्तानपुर बर्ड सेंचुरी की खूबसूरती हो या 2017 में ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का सामाजिक संदेश।
2022 में तो खेल की दुनिया में हरियाणा के दबदबे को पूरी दुनिया ने देखा जब ‘हरियाणा नंबर वन इन स्पोर्ट्स’ की थीम आई थी।
इसके बाद 2023 में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव और 2024 में ‘मेरा परिवार मेरी पहचान’ जैसी योजनाओं को भी बखूबी पेश किया गया था। पिछले साल यानी 2025 में भी ‘समृद्ध हरियाणा-विरासत और विकास’ की थीम पर झांकी ने खूब वाहवाही बटोरी थी।
लगातार चार साल तक अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के बाद इस साल का यह ब्रेक भले ही अखर रहा हो, लेकिन यह नियमों के उस दायरे का हिस्सा है जो सबको साथ लेकर चलने की बात करता है।
क्या था राखीगढ़ी का प्लान?
हरियाणा इस बार अपनी झांकी के जरिए सिंधु घाटी सभ्यता के सबसे बड़े केंद्र ‘राखीगढ़ी’ को पेश करना चाहता था। हिसार ज़िले में स्थित यह जगह पुरातत्व के लिहाज से बेहद खास है।
राज्य सरकार चाहती थी कि जब दुनिया भारत की सबसे पुरानी सभ्यताओं को देखे तो उसमें हरियाणा का नाम सबसे ऊपर हो। हालांकि मंज़ूरी न मिलने से यह प्रोजेक्ट अब ठंडे बस्ते में है। अब हरियाणा के लोगों को अगले साल का इंतज़ार करना होगा जब उनकी माटी की खुशबू एक बार फिर दिल्ली की सड़कों पर बिखरेगी।
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