हरियाणा विधानसभा में पहले दिन सियासी टकराव, सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव स्वीकार हुआ, इस दिन होगी चर्चा
हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र की शुरुआत के साथ ही कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया, जिसे स्पीकर ने स्वीकार कर लिया। 19 दिसंबर को इस प्रस्ताव पर सदन में चर्चा होगी, जिससे राजनीतिक तापमान बढ़ गया है।
Haryana News: हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र की शुरुआत ने पहले ही दिन संकेत दे दिए कि आने वाले दिन राजनीतिक तौर पर आसान नहीं रहने वाले। सदन की कार्यवाही जैसे ही शुरू हुई, सत्ता और विपक्ष आमने-सामने दिखे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के केसरिया रंग की पगड़ी में विधानसभा पहुंचने को जहां सत्तापक्ष ने आत्मविश्वास का प्रतीक बताया, वहीं विपक्ष ने उसी दिन सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर माहौल को पूरी तरह सियासी बना दिया।
कांग्रेस की ओर से पेश किए गए अविश्वास प्रस्ताव को विधानसभा स्पीकर हरविंदर कल्याण ने स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही साफ हो गया कि शीतकालीन सत्र का एजेंडा केवल औपचारिक कार्यवाही तक सीमित नहीं रहेगा। अब इस प्रस्ताव पर 19 दिसंबर को सदन की अगली बैठक में चर्चा तय है, जहां सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस के आसार बन गए हैं।
सत्र की शुरुआत औपचारिकता और सियासत, दोनों के मेल के साथ हुई। मंत्री अनिल विज ने नेता प्रतिपक्ष की भूमिका संभाल रहे भूपेंद्र सिंह हुड्डा को बधाई दी, लेकिन उनका अंदाज़ चर्चा का विषय बन गया। शायरी के जरिए कही गई उनकी बात — “हवाएं लाख मुखालिफ हों, दिया वही जलेगा जो जिद पर अड़ा है” — को सदन में अलग-अलग नजरिए से देखा गया। कुछ ने इसे राजनीतिक संदेश माना, तो कुछ ने इसे सियासी व्यंग्य।
इसे भी पढ़ें: धारूहेड़ा में बच्चों के लिए नई शुरुआत, अंबेडकर पार्क में डिजिटल लाइब्रेरी का उद्घाटन
इसके बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सदन में शोक प्रस्ताव रखा, जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया। दिवंगत व्यक्तियों को श्रद्धांजलि देने के साथ ही कार्यवाही ने कुछ समय के लिए राजनीतिक गर्मी से विराम लिया, लेकिन यह ठहराव ज्यादा देर का नहीं था।
22 दिसंबर तक चलने वाले इस शीतकालीन सत्र में कुल तीन बैठकें प्रस्तावित हैं, लेकिन अविश्वास प्रस्ताव के स्वीकार होने के बाद पूरा फोकस इसी बहस पर आकर टिक गया है। कांग्रेस का आरोप है कि मौजूदा सरकार की नीतियां आम जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर पाईं और कई अहम मुद्दों पर सरकार जवाब देने से बचती रही है। विपक्ष इसे सरकार की जवाबदेही तय करने का मंच बता रहा है।
सत्र की कार्यवाही के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए सत्र बुलाने को लेकर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि मानसून सत्र के बाद छह महीने के भीतर दूसरा सत्र बुलाना संवैधानिक जिम्मेदारी है। 26 फरवरी को यह अवधि पूरी होती, लेकिन उससे पहले ही सरकार ने शीतकालीन सत्र बुलाकर प्रक्रिया का पालन किया है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि कांग्रेस शासन के दौरान विधानसभा सत्रों की संख्या कम रहती थी।
इसे भी पढ़ें: हरियाणा में Family ID सुधार अब घर बैठे, आय–नाम–उम्र की गलती ठीक होगी बिना दफ्तर गए
स्पीकर द्वारा अविश्वास प्रस्ताव स्वीकार किए जाने के बाद हरियाणा की राजनीति एक बार फिर टकराव के मोड में आ गई है। अब सभी की निगाहें 19 दिसंबर पर टिकी हैं, जब सदन के भीतर सरकार और विपक्ष आमने-सामने होंगे और यह तय होगा कि शीतकालीन सत्र की असली तस्वीर कैसी रहने वाली है।
इस श्रेणी की और खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें: राजनीती



