- हरियाणा कोहरे की चादर में लिपटा
- हिसार की रातें सबसे ज़्यादा सर्द
- पहाड़ों से आई हवाओं ने बढ़ाई ठिठुरन
- ट्रेनों और बसों की रफ्तार पर ब्रेक
- गोरखधाम एक्सप्रेस घंटों लेट
Haryana Weather Update: हरियाणा की सुबह अब सूरज की पहली किरण से नहीं, बल्कि सफेद कोहरे की घनी चादर से खुल रही है। पूरा प्रदेश इस वक्त भीषण कोहरे के आगोश में है, मानों आसमान जमीन पर उतर आया हो। मौसम विभाग ने भी हालात को देखते हुए सूबे के कई हिस्सों में ‘यलो अलर्ट’ जारी कर दिया है। मैदानी इलाकों में पहाड़ों से उतरकर आ रही बर्फीली हवाओं ने डेरा डाल लिया है, जिससे रातों में हाथ-पांव सुन्न होने वाली ठंड पड़ने लगी है।
हालांकि, दिन की धूप थोड़ी राहत जरूर दे रही है, लेकिन जैसे ही सूरज ढलता है, हाड़ कंपाने वाली ठंड अपना असली रंग दिखाने लगती है। पश्चिमी विक्षोभ की लुका-छिपी के बीच अब कड़ाके की सर्दी का नया दौर शुरू हो गया है।
हिसार में सर्दी का सितम और यातायात की मुश्किलें
अगर तापमान के आंकड़ों को देखें तो हिसार इस वक्त हरियाणा का ‘कोल्ड स्पॉट’ बना हुआ है। यहाँ अजीब सी स्थिति देखने को मिल रही है; दिन में पारा चढ़ रहा है लेकिन रात होते-होते तापमान में ऐसी गिरावट आती है कि लोग रजाई में दुबकने को मजबूर हैं। मंगलवार की सुबह तो कोहरा इतना घना था कि सड़कों पर गाड़ियों की लाइटें भी जवाब दे रही थीं।
सफर करने वाले लोगों की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। गोरखधाम एक्सप्रेस जैसी वीआईपी ट्रेनें तीन-तीन घंटे की देरी से चल रही हैं, वहीं रोडवेज बसों के पहिए भी कोहरे के कारण थमे हुए नजर आए। मुसाफिरों को घंटों बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों पर ठिठुरते हुए वक्त काटना पड़ रहा है।
आगे क्या कहता है मौसम का मिजाज
मौसम के जानकारों की मानें तो अभी राहत की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी। आने वाले दिनों में मौसम का मिजाज और बिगड़ने वाला है। 5 फरवरी की रात से एक और पश्चिमी विक्षोभ दस्तक देने जा रहा है, जो अपने साथ नमी और ठिठुरन लेकर आएगा। हालांकि 6 और 7 फरवरी को थोड़ी शांति रहेगी, लेकिन 9 फरवरी के आसपास फिर से एक नया सिस्टम एक्टिव होगा। इसका मतलब साफ़ है कि आने वाले करीब एक हफ्ते तक कोहरे और ठंड का यह खेल जारी रहेगा।
अन्नदाता और पशुपालकों के लिए जरूरी मशविरा
इस बदलती हुई आबोहवा का सबसे ज्यादा असर खेती और पशुओं पर पड़ता है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को साफ हिदायत दी है कि अगले दो-तीन दिनों तक फसलों में सिंचाई करने से बचें। फसलों को पाले और कोहरे के नुकसान से बचाने का सबसे देसी और कारगर तरीका यही है कि शाम के वक्त खेतों की मेड़ों पर हल्का धुआं किया जाए, ताकि गर्माहट बनी रहे।
वहीं, पशुपालकों को भी सचेत रहने की जरूरत है। पशुओं को रात के वक्त खुले आसमान के नीचे बिल्कुल न बांधें और उन्हें पीने के लिए ताजे या हल्के गर्म पानी का ही इस्तेमाल करें। सर्द हवाएं मवेशियों की सेहत बिगाड़ सकती हैं, इसलिए उन्हें अंदर रखना ही बेहतर है।
