हरियाणा: हसनगढ़ में टीकाकरण के बाद 2 माह के बच्चे की मौत, अस्पताल में मचा कोहराम
हरियाणा के हसनगढ़ गांव में टीकाकरण के बाद दो महीने के मासूम हर्षित की मौत से हड़कंप मच गया। परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाया है, जबकि डॉक्टर श्वास नली में बलगम को वजह मान रहे हैं।

- हसनगढ़ में पसरा सन्नाटा – आंगनबाड़ी की दहलीज पर बुझ गया घर का चिराग
- टीकाकरण के चंद मिनटों बाद दो माह के मासूम ने तोड़ा दम
- डॉक्टरों का अनुमान: श्वास नली में बलगम फंसने से गई हर्षित की जान
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट से साफ होगी मौत की असली वजह, पुलिस जांच में जुटी
हरियाणा के गांव हसनगढ़ में बुधवार की दोपहर एक ऐसी खबर आई जिसने हर किसी की रूह कंपा दी। एक मां की गोद में खिलखिलाता दो महीने का मासूम, जिसे परिवार ने बड़े अरमानों के साथ ‘हर्षित’ नाम दिया था, वह अब इस दुनिया में नहीं रहा। टीका लगवाने के कुछ ही मिनटों के भीतर मासूम की जान चली गई। जिस आंगनबाड़ी केंद्र को बच्चों की सेहत सुधारने का ठिकाना माना जाता है, वहीं से एक हंसता-खेलता परिवार अपनी खुशियां खोकर लौटा।
हसनगढ़ निवासी बंटी के घर करीब एक साल पहले शहनाई बजी थी। दो महीने पहले जब उनके घर बेटे का जन्म हुआ, तो पूरे मोहल्ले में मिठाइयां बंटी थीं। बुधवार सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे बंटी की मां सावित्री अपने पोते को लेकर आंगनबाड़ी केंद्र पहुंची थीं। वहां स्वास्थ्य विभाग की टीम बच्चों को नियमित टीकाकरण (वैक्सीनेशन) लगा रही थी। हर्षित को भी डीटीपी का टीका लगाया गया, लेकिन किसी को क्या पता था कि यह मामूली सी प्रक्रिया एक भयावह हादसे में बदल जाएगी।
टीका लगा और अचानक बेसुध हो गया मासूम दादी सावित्री जैसे ही इंजेक्शन लगवाकर आंगनबाड़ी की दहलीज से बाहर निकलीं, उन्होंने महसूस किया कि हर्षित के शरीर में कोई हलचल नहीं हो रही है। वह अचानक बेसुध हो गया। घबराई हुई दादी वापस केंद्र के अंदर दौड़ीं, जहां स्वास्थ्य कर्मियों ने बच्चे की हालत गंभीर देख उसे तुरंत अस्पताल ले जाने की सलाह दी।
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परिजनों की आंखों में आंसू और दिल में डर था। वे मासूम को लेकर पहले दो निजी अस्पतालों की तरफ भागे, लेकिन वहां के डॉक्टरों ने स्थिति नाजुक देख हाथ खड़े कर दिए और सरकारी अस्पताल जाने को कहा। जब तक परिजन हर्षित को लेकर नागरिक अस्पताल पहुंचे, बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उसे देखते ही मृत घोषित कर दिया।
क्या वाकई टीके से हुई मौत? इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग और टीकाकरण अभियान पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं, लेकिन डॉक्टरों का शुरुआती तर्क कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है। अस्पताल के डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद अंदेशा जताया है कि बच्चे की श्वास नली में बलगम जमा होने के कारण उसका दम घुटा होगा। हालांकि, यह केवल एक प्रारंभिक राय है।
इस दुखद घड़ी में परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर संदेह जताते हुए पुलिस को लिखित शिकायत दी है। अब सबकी नजरें पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके लिए शव को भगत फूल सिंह राजकीय महिला मेडिकल कॉलेज भेजा गया है।
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हसनगढ़ की गलियों में आज सन्नाटा है। लोग दबी जुबान में पूछ रहे हैं कि क्या यह महज एक इत्तेफाक था या कोई लापरवाही? सच जो भी हो, लेकिन बंटी और सावित्री की गोद अब सूनी हो चुकी है। अब पुलिस और मेडिकल बोर्ड की जांच ही तय करेगी कि उस दोपहर वास्तव में क्या हुआ था।
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