हिसार में विजिलेंस की बड़ी छापा कार्रवाई: बिजली विभाग का लाइनमैन 27 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार

Haryana News: हरियाणा में सरकारी सिस्टम को लेकर लोगों में पहले ही अविश्वास बढ़ा हुआ है, ऐसे में बिजली विभाग में फैली रिश्वतखोरी ने हालात और गंभीर कर दिए हैं। छोटे से छोटे काम के लिए उपभोक्ताओं से पैसे मांगने की घटनाएँ अब आम होती जा रही हैं। इसी बीच हिसार विजिलेंस की टीम ने नारनौंद में एक ऐसी कार्रवाई की है जिसने पूरे बिजली विभाग में हड़कंप मचा दिया।

नारनौंद के पुराने बस स्टैंड पर सोमवार को विजिलेंस टीम ने बिजली निगम में कार्यरत लाइनमैन जयप्रकाश उर्फ़ जेपी को 27 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों काबू किया। टीम के छापे की खबर फैली तो आसपास के कर्मचारियों में भगदड़ और घबराहट का माहौल देखने को मिला।

किसान की मजबूरी बनी रिश्वतखोरी का रास्ता

गांव कापड़ो निवासी किसान बलवान ने अपने खेत में नया ट्यूबवेल लगाया था, लेकिन बिजली कनेक्शन को पुराने स्थान से नए स्थान पर ट्रांसफर करवाए बिना वह मोटर नहीं चला सकता था। नियमों के मुताबिक यह प्रक्रिया पूरी तरह तकनीकी और दस्तावेज़ी होती है, लेकिन किसान ने आरोप लगाया कि लाइनमैन जेपी ने काम करने की जगह उससे 27 हजार रुपये की अवैध मांग कर दी।

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किसान बलवान ने पहले तो उम्मीद की थी कि विभाग उसकी समस्या समझेगा, लेकिन जब रिश्वत की मांग का दबाव बढ़ता गया तो उसने सीधे हिसार विजिलेंस में शिकायत कर दी।

विजिलेंस की प्लानिंग और ऑपरेशन ‘बस स्टैंड’

इंस्पेक्टर सुखदेव सिंह के नेतृत्व में विशेष टीम बनाई गई। नगर निगम हिसार के HCS अधिकारी हरवीर सिंह को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया ताकि कार्रवाई कानूनी रूप से मजबूत रहे।

योजना के तहत किसान ने लाइनमैन से उसी तरह संपर्क किया जैसा वह पहले कर रहा था। जेपी ने उसे पैसे लेने के लिए पुराने बस स्टैंड पर बुलाया—एक ऐसी जगह जो भीड़भाड़ में छिप सकती है, लेकिन विजिलेंस की निगाहों से नहीं।

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जैसे ही किसान ने तय राशि थमाई और संकेत दिया, विजिलेंस टीम पहले से तैयार जाल की तरह मौके पर टूट पड़ी। लाइनमैन जयप्रकाश उर्फ़ जेपी को उसी समय गिरफ्तार कर लिया गया।

भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज, विभाग में खलबली

घटना के बाद विजिलेंस ने जेपी पर भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। आगामी जांच में पता चलेगा कि क्या यह सिर्फ एक कर्मचारी का मामला था या बड़ा नेटवर्क इसके पीछे काम कर रहा है।

स्थानीय किसानों का कहना है कि इस तरह की घटनाएँ उनकी आर्थिक स्थिति पर सीधा प्रहार हैं। “हम खेती से वैसे ही मुश्किल से गुज़र-बसर करते हैं, ऊपर से सरकारी काम कराने के लिए पैसे मांगे जाएँ तो किसान जाए कहाँ?”—एक किसान ने नाम न छापने की शर्त पर कहा।

यह कार्रवाई एक उदाहरण जरूर बनी है, लेकिन ग्रामीणों की उम्मीद है कि सिस्टम में मौजूद ऐसी बड़ी समस्या पर अब लगातार और तेज़ कार्रवाई होगी।

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Rajveer singh

राजवीर सिंह एक पेशेवर कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता का अनुभव है और स्थानीय, सामुदायिक और अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं की गहरी समझ रखते हैं। वे अपने ज्ञान का उपयोग न केवल अपनी शैक्षणिक पृष्ठभूमि, बल्कि अपनी प्रत्यक्ष समझ के आधार पर जानकारीपूर्ण लेख लिखने में करते हैं। वे केवल सूचना देने के लिए नहीं, बल्कि आवाज़ उठाने के लिए भी लिखते हैं।
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