गुरुग्राम में बवाल: कांग्रेस नेता राजेश यादव के घर पर चला बुलडोजर, सेक्टर 68 में 100 कमरे ध्वस्त, भारी तनाव के बाद हिरासत में नेता
गुरुग्राम के सेक्टर-68 में HSVP ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कांग्रेस नेता राजेश यादव और ग्रामीणों के 100 कमरों पर बुलडोजर चला दिया। सड़क निर्माण के लिए हुई इस तोड़फोड़ के दौरान भारी विरोध और पुलिसिया झड़प देखने को मिली। पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

Gurugram News: गुरुग्राम के सेक्टर-68 में बुधवार की सुबह आम दिनों जैसी नहीं थी। जब शहर अभी अपनी रफ़्तार पकड़ ही रहा था, तभी हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) का भारी-भरकम दस्ता लाव-लश्कर और पुलिस बल के साथ परीना मिकासा सोसाइटी के पास जा धमका। देखते ही देखते इलाके में अफरा-तफरी मच गई क्योंकि निशाना थे वो घर, जो पिछले तीन दशकों से यहाँ की ज़मीन पर खड़े थे। करीब 100 कमरों को ज़मींदोज़ कर दिया गया, जिनमें कांग्रेस नेता राजेश यादव का मकान और करीब 10 अन्य ग्रामीणों के आशियाने शामिल थे।
चीख-पुकार और भारी विरोध के बीच टूटा आशियाना
सुबह 10 बजे जब एसडीओ ज्ञानचंद सैनी के नेतृत्व में बुलडोजर ने अपनी गर्जना शुरू की, तो माहौल तनावपूर्ण हो गया। कांग्रेस नेता राजेश यादव और स्थानीय ग्रामीणों ने इस कार्रवाई का पुरजोर विरोध किया। लोग बुलडोजर के आगे खड़े हो गए और अधिकारियों से मिन्नतें करने लगे। राजेश यादव का तर्क सीधा था कि ये मकान आज के नहीं, बल्कि 30 साल पुराने हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी पूर्व नोटिस के प्रशासन ने यह तानाशाही दिखाई है। यादव ने गुहार लगाई कि अगर ज़मीन अधिग्रहित है तो पहले उनके विस्थापन और मुआवजे का पुख्ता इंतज़ाम होना चाहिए था, लेकिन मशीनों के शोर में ये आवाजें दबकर रह गईं।
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हिरासत में नेता और पुलिसिया कार्रवाई
जब विरोध प्रदर्शन बढ़ने लगा और ग्रामीण हटने को तैयार नहीं हुए, तो पुलिस ने सख्ती दिखाई। कांग्रेस नेता राजेश यादव को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। ग्रामीणों का आरोप है कि इस दौरान पुलिस ने बल प्रयोग भी किया ताकि तोड़फोड़ का रास्ता साफ हो सके। दोपहर से लेकर शाम तक चले इस अभियान ने कई परिवारों को खुले आसमान के नीचे लाकर खड़ा कर दिया। राजेश यादव ने इस पूरी कार्रवाई को भाजपा सरकार की ‘बदले की राजनीति’ करार दिया। उनका कहना था कि एक मंत्री के इशारे पर और बड़े बिल्डरों को फायदा पहुँचाने के लिए कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
प्रशासन का अपना पक्ष: सड़क के लिए ज़रूरी था एक्शन
दूसरी तरफ, एचएसवीपी के अधिकारियों का रुख साफ है। एसडीओ ज्ञानचंद सैनी के मुताबिक, यह कार्रवाई किसी निजी दुश्मनी का हिस्सा नहीं बल्कि शहर के विकास के लिए अनिवार्य थी। यह ज़मीन गुरुग्राम-सोहना हाईवे को जोड़ने वाली मुख्य सड़क के बीच आ रही थी। विभाग का कहना है कि इस ज़मीन का अधिग्रहण पहले ही हो चुका है और मुआवजे का ‘अवॉर्ड’ भी सुनाया जा चुका है। अधिकारियों ने दावा किया कि प्रभावित लोग कभी भी कार्यालय जाकर अपना पैसा ले सकते हैं, लेकिन सड़क निर्माण का काम अब और नहीं रोका जा सकता था।
विकास का पहिया और पुरानी रंजिश का साया
यह पहली बार नहीं है जब राजेश यादव प्रशासन के निशाने पर आए हैं। पिछले साल अक्टूबर में भी उनके फर्नीचर शोरूम को अवैध बताकर ढहा दिया गया था। उस वक्त भी तीखी बहस हुई थी और मामला राजनीतिक गलियारों में खूब गूंजा था। ताजा कार्रवाई को लेकर भी यादव ने इसे ‘ट्रिपल इंजन सरकार’ की तानाशाही बताया है।
हालांकि, इस तोड़फोड़ के पीछे एक बड़ा नागरिक हित भी जुड़ा है। इस मुख्य सड़क के तैयार होने से सेक्टर-68, 69 और 70 के हज़ारों निवासियों को सीधी राहत मिलेगी। इससे सदर्न पेरिफेरल रोड (SPR) पर गाड़ियों का बोझ कम होगा और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे व दिल्ली-जयपुर हाईवे तक पहुँचना काफी आसान हो जाएगा। लेकिन सवाल वही है कि विकास की इस दौड़ में उन लोगों का क्या, जिनके 30 साल पुराने आशियाने चंद घंटों में मलबे के ढेर में तब्दील हो गए।
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