हरियाणा में यूरिया संकट गहराया: लोहारू में किसान भड़के, सरकार पर ‘किसान विरोधी’ नीति का आरोप
Haryana News: लोहारू के लघु सचिवालय परिसर में किसानों का अनिश्चितकालीन महापड़ाव शनिवार को एक बार फिर उफान पर दिखा। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले जुटे किसानों ने इस बार यूरिया की गंभीर कमी को लेकर सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाज़ी की। खेतों में रबी की तैयारी चल रही है, लेकिन किसानों का कहना है कि ज़रूरत के सबसे अहम वक्त पर खाद की उपलब्धता लगातार संकट में है।
मंच से बोलते हुए किसान नेता रामपाल सिंघानी ने आरोप लगाया कि बिजाई के समय डीएपी नहीं मिली, और अब यूरिया पूरे हरियाणा में किसानों को नहीं मिल रही। उन्होंने कहा कि सरकार खुद को किसान हितैषी बताती है, लेकिन “सबसे बुनियादी खाद तक उपलब्ध न होना” किसानों के भरोसे पर सीधा चोट है।Haryana News
सिंघानी ने याद दिलाया कि किसान 145 दिनों से अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं, लेकिन सरकार की तरफ से अब तक कोई ठोस कदम न उठाया जाना किसानों की नाराज़गी को और बढ़ा रहा है।
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धरने में मौजूद किसानों ने कहा कि खाद संकट का असर सीधे खेतों में खड़े सीजन पर पड़ रहा है। कुछ किसानों ने बताया कि वे कई दिनों से सहकारी समितियों और डीलरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन या तो स्टॉक ‘खत्म’ बताया जाता है या सीमित वितरण के कारण उनकी बारी नहीं आती। इस स्थिति ने गांव-गांव में तनाव बढ़ा दिया है।Haryana News
शनिवार की सभा में सुरेश फरटिया, धर्मपाल बारवास समेत कई किसान नेताओं ने किसानों को संबोधित किया। महापड़ाव की संयुक्त अध्यक्षता सूरत सिंह जुई, बलवंत खरकड़ी, देवी दयाल पहाड़ी, धर्मपाल फरटिया, केहर और प्रताप राव कालोद ने की।Haryana News
इन नेताओं ने कहा कि अगर खाद वितरण में पारदर्शिता और आपूर्ति सुनिश्चित नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
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किसान संगठनों का कहना है कि खाद उपलब्धता सिर्फ एक “तकनीकी समस्या” नहीं, बल्कि खेती की अर्थव्यवस्था और फसल सुरक्षा से सीधा जुड़ा संकट है। दूसरी ओर, आंदोलनकारी किसानों का दावा है कि मौजूदा स्थिति सरकार की प्राथमिकताओं पर बड़े सवाल खड़े करती है—खासकर तब, जब किसान महीनों से अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर बैठे हैं।Haryana News
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