नूंह में बूचड़खानों पर बवाल: CSR के नाम पर पुलिस को गिफ्ट में SUV मिलने से बढ़ा विवाद
नूंह जिले में बूचड़खानों के खिलाफ चल रहे विरोध के बीच फिरोजपुर झिरका में पुलिस को मीट फैक्ट्री संचालकों से SUV मिलने पर विवाद गहरा गया है। सामाजिक संगठन इसे दबाव मान रहे हैं, जबकि पुलिस इसे सुरक्षा जरूरत बता रही है।
- नूंह में बूचड़खानों को लेकर सामाजिक संगठनों का विरोध तेज
- फिरोजपुर झिरका में पुलिस और मीट फैक्ट्री संचालकों के बीच नया विवाद
- CSR के नाम पर दी गई SUV ने खड़े किए सवाल
- पुलिस की सफाई और संगठनों के आरोप आमने-सामने
हरियाणा के नूंह जिले में बूचड़खानों की बढ़ती संख्या को लेकर पहले से चल रहा सामाजिक विरोध अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। इस बार मुद्दा सिर्फ बूचड़खानों का नहीं बल्कि पुलिस और मीट फैक्ट्री संचालकों के बीच हुए कथित तालमेल का बन गया है।
फिरोजपुर झिरका में उस वक्त विवाद खड़ा हो गया, जब कई मीट फैक्ट्रियों के संचालकों ने कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी के तहत डीएसपी अजायब सिंह को एक बोलेरो SUV की चाबी सौंपी।
यह घटना नए साल के मौके पर हुई लेकिन इसकी जानकारी जैसे ही सामाजिक संगठनों तक पहुंची, विरोध की आवाज़ें तेज हो गईं।
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सामाजिक संगठनों का कहना है कि जिन बूचड़खानों को बंद कराने के लिए वे लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं उन्हीं से पुलिस को गाड़ी मिलना संदेह पैदा करता है।
उनका आरोप है कि इस तरह के सहयोग से पुलिस की निष्पक्ष कार्रवाई पर दबाव बन सकता है।
मेवात कारवां संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर अशफाक आलम ने इस मामले को हाल की एक कार्रवाई से जोड़ते हुए सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि 29 दिसंबर को पुलिस ने एक ऐसा वाहन पकड़ा था जिसमें 17 मवेशियों को बूचड़खानों की ओर ले जाया जा रहा था और हालत बेहद अमानवीय थी।
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उनके मुताबिक अगर मीट फैक्ट्री संचालकों को CSR के तहत कुछ करना ही है तो मेवात क्षेत्र की शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर खर्च होना चाहिए न कि पुलिस को वाहन देने पर।
दूसरी ओर पुलिस अधिकारियों का पक्ष इससे अलग है। उनका कहना है कि यह सहयोग किसी दबाव या सौदे का हिस्सा नहीं है बल्कि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत के तहत लिया गया है।
पुलिस का दावा है कि अतिरिक्त गाड़ी मिलने से गश्त और जांच की प्रक्रिया बेहतर होगी, जिससे अपराध पर नियंत्रण आसान होगा।
इस पूरे विवाद पर फिरोजपुर झिरका के डीएसपी अजायब सिंह ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शहर थाना पुलिस को पेट्रोलिंग के लिए वाहन की आवश्यकता थी और इसी वजह से मीट फैक्ट्री संचालकों से अनुरोध किया गया था।
डीएसपी के अनुसार नए साल पर दी गई इस गाड़ी का इस्तेमाल सिर्फ कानून-व्यवस्था के लिए किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बूचड़खाना संचालकों को पशु क्रूरता और अन्य नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।
फिलहाल, नूंह में यह मामला सिर्फ एक SUV तक सीमित नहीं रहा है। यह सवाल अब बड़े रूप में सामने है कि CSR के नाम पर होने वाला सहयोग कहां तक जायज़ है और उसका असर प्रशासनिक फैसलों पर कैसे पड़ता है।
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