पानीपत की साइको किल्लर: मां बनी चार बच्चों की सीरियल किलर, पुलिस पूछताछ में किया खौफनाक खुलासा
Haryana News: हरियाणा के पानीपत के भावड़ गांव में पिछले कुछ महीनों से जो घटनाएं “हादसा” मानी जा रही थीं, वे दरअसल एक ऐसी सच्चाई में बदल गईं जिसने गांव से लेकर पुलिस महकमे तक सभी को स्तब्ध कर दिया। घर के भीतर पानी में डूबकर बच्चों की लगातार हो रही मौतों ने जब चौथी बार दस्तक दी, तो जांच की परतें खुलनी शुरू हुईं—और सामने आई पूनम नाम की वह महिला, जिसकी आंखों में न कोई डर था और न ही किसी मासूम के जाने का रत्ती भर पछतावा।
पूनम पर आरोप है कि उसने अपने 3 साल के बेटे शुभम, 11 साल की भांजी इशिका, 10 साल की भतीजी जिया और आखिर में विधि को उसी तरीके से मौत के हवाले किया—बिना किसी शोर, बिना किसी संघर्ष के। पुलिस पूछताछ में उसका यह कहना कि बच्चों को तड़पते देख उसे “सुकून” मिलता था, इस केस को और भी खौफनाक बना देता है।
जांच का मोड़: जहां हादसे रुककर हत्या में बदल गए
पहला मामला 13 जनवरी 2023 को सामने आया, जब पूनम का तीन वर्षीय बेटा शुभम घर के अंदर पानी में डूबा मिला। उसी दिन उसकी भांजी इशिका की भी रहस्यमय मौत हो गई। परिवार ने दर्द में डूबकर इसे संयोग मान लिया। लेकिन अगस्त 2025 में 10 साल की जिया की मौत ने संदेह का बीज बो दिया—हर बार पूनम का आसपास होना पुलिस को चौंकाने लगा।
इंस्पेक्टर फूलकुमार बताते हैं,
“पूछताछ में वह 10 मिनट तक इतने आत्मविश्वास से बात करती रही कि हमें भी शक होने लगा कि शायद हम गलत दिशा में जा रहे हैं। लेकिन जब सख्ती हुई, तो उसकी बातें रोंगटे खड़े कर देने वाली थीं।”
पूनम के अनुसार उसकी पसंदीदा हत्या का तरीका था—पानी में डुबाना, क्योंकि इससे “बच्चा आवाज नहीं करता” और “100% मौत सुनिश्चित रहती है।” यह सुनते ही पूछताछ कक्ष में मौजूद अधिकारियों की आंखें नम पड़ गईं।
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विधि की मौत: वह क्षण जिसने पुलिस को भीतर तक झकझोर दिया
आखिरी हत्या विधि की थी—एक मासूम बच्ची जिसे परिवार ने हमेशा पूनम की गोद में सुरक्षित समझा था। लेकिन स्टोर रूम में मिले टब में आधा भरा पानी, और उसके भीतर पड़े उस खाने के कतरे—जिन्हें बच्ची आखिरी सांस में बाहर उगल पाई—इस केस की सबसे भयावह निशानियां बन गईं।
इंस्पेक्टर कहते हैं:
“वह दृश्य देखकर हमारे भी आंसू निकल आए। किसी बच्चे का इस तरह जाना किसी भी इंसान को तोड़ सकता है।”
जांच में पता चला कि पूनम हत्या से पहले अपनी चूड़ियां उतार देती थी, ताकि वे टूटें नहीं और कोई आवाज न आए। यह प्लानिंग उसके इरादों की गहराई बताती है।
जेल जाते समय भी नहीं टूटा चेहरा
सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि गिरफ्तारी के बाद भी पूनम के चेहरे पर ना डर था, ना पछतावा। वह शांत खड़ी रही, जैसे जो हुआ… उसका उससे कोई भावनात्मक संबंध ही न हो।
गांव के लोग आज भी यही सवाल पूछ रहे हैं—आखिर एक मां और एक महिला के भीतर ऐसा क्या टूट गया था, जिसने उसे चार नन्ही जिंदगियों की सीरियल किलर बना दिया?
इसके जवाब फिलहाल मनोवैज्ञानिक जांच में तलाशे जा रहे हैं, लेकिन इतना साफ है कि पानीपत के भावड़ गांव ने ऐसा भयावह सच आज से पहले कभी नहीं देखा।
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