Rampal News: रामपाल की जमानत पर हाईकोर्ट में फंसा पेंच, अब 4 अगस्त को होगा फैसला, जानें पूरा मामला

सतलोक आश्रम प्रकरण में देशद्रोह के आरोपी रामपाल की जमानत याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई टल गई है। जानें क्या है पूरा मामला और अब अगली सुनवाई कब होगी।

  • रामपाल की देशद्रोह केस में जमानत पर सस्पेंस बरकरार
  • पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 4 अगस्त तक टाली सुनवाई
  • हिसार जेल में बंद रामपाल को बड़ी राहत का अब भी इंतज़ार

हिसार के बरवाला में हुए उस खौफनाक मंजर को गुजरे करीब एक दशक होने को है, लेकिन सतलोक आश्रम प्रकरण की आग अब भी कानूनी गलियारों में सुलग रही है। बुधवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सबकी निगाहें टिकी थीं कि क्या बरवाला कांड के मुख्य आरोपी रामपाल को देशद्रोह के मामले में राहत मिलेगी, लेकिन अदालत के कमरे से जो खबर निकलकर आई उसने रामपाल के समर्थकों की उम्मीदों को फिलहाल 4 अगस्त तक के लिए ठंडे बस्ते में डाल दिया है।

दरअसल, रामपाल की तरफ से दाखिल जमानत याचिका पर सुनवाई होनी थी, जिसे कोर्ट ने अगली तारीख तक के लिए स्थगित कर दिया। यह पूरा मामला साल 2014 की उस हिंसा से जुड़ा है जिसने पूरे हरियाणा को दहला कर रख दिया था। उस वक्त पुलिस और रामपाल के समर्थकों के बीच जो टकराव हुआ, उसकी कीमत छह जिंदगियों ने अपनी जान देकर चुकाई थी। मरने वालों में हरियाणा ही नहीं बल्कि दिल्ली, यूपी, पंजाब और मध्य प्रदेश तक के श्रद्धालु शामिल थे।

निचली अदालत से झटका मिलने के बाद हाईकोर्ट की शरण

रामपाल पिछले 11 सालों से सलाखों के पीछे अपनी जिंदगी काट रहे हैं। कुछ महीने पहले हिसार की निचली अदालत ने उनकी जमानत अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया था, जिसके बाद उनके वकीलों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हालांकि, हाल के दिनों में रामपाल को कुछ कानूनी राहत जरूर मिली थी जब हाईकोर्ट ने दो अलग-अलग मामलों में मिली उम्रकैद की सजा को सस्पेंड कर दिया था। लेकिन कानून की पेचीदगियां कुछ ऐसी हैं कि एक तरफ राहत मिलने के बावजूद देशद्रोह का यह मुकदमा नंबर 428 उनके बाहर आने के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा बना हुआ है।

हजारों आरोपी और संगीन इल्जामों की फेहरिस्त

यह मामला सिर्फ देशद्रोह तक सीमित नहीं है। बरवाला हिंसा के बाद दर्ज हुई एफआईआर में हत्या, सरकारी काम में बाधा डालने और बिना अनुमति के भारी मात्रा में गैस सिलेंडर व दवाइयां जमा करने जैसे कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। जांच का दायरा इतना बड़ा था कि इस केस में रामपाल के साथ करीब एक हजार से ज्यादा लोगों को आरोपी बनाया गया। रामपाल पर दर्ज कुल 14 मुकदमों में से 11 में तो वह बरी हो चुके हैं, लेकिन बाकी बचे मामलों की कानूनी लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर है।

ग्राउंड जीरो का दर्द और कानूनी हकीकत

बरवाला की उस हिंसा ने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे बल्कि कई परिवारों को हमेशा के लिए उजाड़ दिया था। आज जब हाईकोर्ट में सुनवाई टलती है, तो इसका असर सिर्फ जेल के अंदर बंद एक शख्स पर नहीं, बल्कि उन हजारों अनुयायियों और पीड़ितों के परिवारों पर भी पड़ता है जो सालों से इंसाफ और फैसलों का इंतजार कर रहे हैं। अब सबकी नजरें 4 अगस्त की तारीख पर टिकी हैं, जब अदालत दोबारा इस फाइल को खोलेगी और तय करेगी कि क्या रामपाल को सलाखों के बाहर की खुली हवा नसीब होगी या नहीं।

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