रेवाड़ी में विकास के वादे बनाम हकीकत: AIIMS, बस स्टैंड और करोड़ों की योजनाओं पर क्यों अटकी उम्मीदें?
रेवाड़ी में करोड़ों की परियोजनाओं के ऐलान के बावजूद विकास की रफ्तार सुस्त है। AIIMS, बस स्टैंड और सड़क निर्माण जैसे अहम प्रोजेक्ट कछुआ गति से आगे बढ़ रहे हैं। स्थानीय विधायक भी अब सरकार से जवाब मांग रहे हैं जबकि जनता उम्मीद और निराशा के बीच अटकी नजर आ रही है।
- रेवाड़ी की बदली तस्वीर पर सवाल
- 288 करोड़ की योजनाएं, ज़मीनी असर गायब
- AIIMS बना उम्मीद, लेकिन रफ्तार धीमी
- सत्ता पक्ष के विधायक भी विकास से नाराज़
रेवाड़ी 28 दिसम्बर (NFLSpice News): रेवाड़ी जिला कभी अपने सुनहरे दौर में लंदन ऑफ़ अहीरवाल के नाम से जाना जाता था। लेकिन पिछले कई सालों से हालात कुछ और ही कहानी कह रहे हैं। शहर के कोनों में टूटी सड़कें, अधूरे सरकारी प्रोजेक्ट और बुनियादी सुविधाओं की कमी लोगों के रोज़मर्रा के जीवन का हिस्सा बन गए हैं।
प्रदेश सरकार ने पिछले एक साल में रेवाड़ी के लिए करोड़ों की योजनाएं घोषित कीं। जून में मुख्यमंत्री नैयब सिंह सैनी ने करीब 288 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट लॉन्च किए। नए जिला जेल परिसर समेत आठ प्रोजेक्ट पूरे होने के दावे हुए और सात नई परियोजनाओं की नींव रखी गई।
लेकिन इन दावों के बीच शहर की सूरत में वह बदलाव अभी दूर-दूर तक दिखाई नहीं देता जिसकी उम्मीद जनता कर रही है।
AIIMS से उम्मीदें, लेकिन रास्ते में रुकावटें
रेवाड़ी में बनने वाला AIIMS जिले के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। लक्ष्य है कि मार्च 2026 तक यह पूरी तरह क्रियाशील हो जाए।
मगर इस सपने तक पहुँचने का रास्ता पटरी पर नहीं दिख रहा। केंद्रीय एजेंसियों ने राज्य सरकार को विकास कार्यों की गति बढ़ाने की सलाह दी है ताकि प्रोजेक्ट समय पर पूरा हो सके।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल के आसपास की सुविधाएं भी अधर में पड़ी हैं जिससे प्रोजेक्ट का असर आधा रह सकता है।
बस स्टैंड, सड़कें और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल
फरवरी में 17 एकड़ में बनने वाले नए बस स्टैंड के लिए 65 करोड़ रुपये मंजूर हुए थे। लेकिन आज भी काम शुरू होने का इंतज़ार कर रहा है। दावे और कागज़ी मंजूरी तो हैं, लेकिन राज्य की हाई-पावर्ड कमेटी से ‘फाइनल हरी झंडी’ अभी लगी नहीं है।
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सड़कों की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें बढ़ी हैं। नए बने रास्ते भी मौसम और ट्रैफिक के आगे जल्दी जवाब दे रहे हैं। विजिलेंस जांचें शुरू जरूर हुई हैं लेकिन नतीजे अब तक फाइलों में ही अटके हैं।
विपक्ष ही नहीं, सत्ता पक्ष भी सवालों में
यह पहली बार है जब रेवाड़ी के हालात पर सवाल सिर्फ विपक्ष नहीं उठा रहा। सत्ताधारी दल के विधायक भी मंचों और विधानसभा में अपनी ही सरकार से जवाब मांग रहे हैं।
रेवाड़ी के विधायक लक्ष्मण सिंह यादव ने विधानसभा में अधूरे स्कूल भवनों और लटकते निर्माण कार्यों पर खुलकर आवाज़ उठाई। उन्होंने कहा कि कई वर्षों से जारी निर्माण धूल खा रहे हैं और बच्चों को खुले में पढ़ने को मजबूर होना पड़ रहा है।
बावल, कोसली और आसपास के क्षेत्रों से भी जनप्रतिनिधि लगातार पानी निकासी, पावर सब-स्टेशन, शिक्षा संस्थानों और सड़क कनेक्टिविटी पर कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।
जनता की उम्मीदें अब भी ज़िंदा
रेवाड़ी के लोगों में शिकायतें जरूर हैं लेकिन उम्मीद खत्म नहीं हुई है। लोगों को भरोसा है कि यदि घोषित योजनाएं समय पर और गुणवत्ता के साथ पूरी हों तो रेवाड़ी फिर अपने लंदन ऑफ़ अहीरवाल वाले गौरव को वापस पा सकता है।
चुनौती बड़ी है लेकिन शायद अब वक्त है कि सिस्टम के पहिए नियम से घूमना शुरू हों ताकि सपने साकार हो सकें।
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