शादीपुर में गरजा मंच: सरपंच नेता का विधायक विनेश फोगाट पर हमला, संत रामपाल को ‘किसान जीवन रक्षक अवॉर्ड’

शादीपुर में सम्मान समारोह के दौरान सरपंच एसोसिएशन जिला प्रधान सुधीर बुआना ने कांग्रेस विधायक विनेश फोगाट पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी के आरोप लगाए। जलभराव में मदद के लिए संत रामपाल महाराज को ‘किसान जीवन रक्षक अवॉर्ड’ दिया गया।

  • शादीपुर समारोह में राजनीतिक विवाद
  • सरपंच नेता का विधायक पर आरोप
  • जलभराव से परेशान ग्रामीण
  • सरकारी मदद का अभाव बताया गया
  • विधायक पर बीजेपी से नजदीकियां बढ़ाने के आरोप

रोहतक। शादीपुर गांव में रविवार को आयोजित संत रामपाल महाराज सम्मान समारोह के बीच मंच से आरोपों की गूंज सुनाई दी। सरपंच एसोसिएशन के जिला प्रधान सुधीर बुआना ने मंच संभालते ही कांग्रेस विधायक विनेश फोगाट पर तीखे शब्दों में हमला बोला। स्थानीय किसानों की समस्याओं का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि “विधायक को जमीन की सच्चाई से कोई मतलब नहीं, जलभराव से जूझते गांवों को उन्होंने अब तक देखा तक नहीं।

समारोह का माहौल सम्मान और कृतज्ञता के बीच राजनीतिक रंग लेता दिखाई दिया। ग्रामीणों, किसानों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की बड़ी मौजूदगी ने इस मुद्दे को और मुखर कर दिया।

जलभराव का दर्द और ‘गायब’ प्रतिनिधित्व का आरोप

सुधीर बुआना ने मंच से कहा कि पिछले दिनों शादीपुर और आस-पास के गांवों में जलभराव ने संकट पैदा कर दिया था। खेतों में खड़ी फसलों का नुकसान हुआ, घरों में पानी भर गया और गांवों के रास्ते लाचार हो गए। परन्तु उनके अनुसार विधायक विनेश फोगाट ने न तो क्षेत्र का दौरा किया, न कोई राहत कार्य शुरू करवाया।

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उन्होंने यह तक कहा कि “विधायक आज भी जनता के बीच नदारत हैं। किसानों की आवाज सुनने की जगह वह कहीं और अपने राजनीतिक गणित में व्यस्त हैं।

आरोपों में यह संकेत भी था कि विधायक बीजेपी के संपर्क में हैं और संभवतः पार्टी बदलने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि कहीं से नहीं हुई है, लेकिन समारोह में यह चर्चा खूब गर्म रही।

संत रामपाल महाराज की भूमिका और ‘किसान जीवन रक्षक अवॉर्ड’

समाधान के प्रयास में संत रामपाल महाराज की टीम का नाम सामने आया। बुआना ने कहा कि जिस समय लोग मदद को तरस रहे थे, तब संत की टीम ने पाइपलाइन और मोटर की व्यवस्था कर किसानों को राहत दिलाई। इसी वजह से संत रामपाल महाराज को ‘किसान जीवन रक्षक अवॉर्ड‘ से सम्मानित किया गया।

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यह दृश्य सामाजिक सहयोग और राजनीतिक उपेक्षा के द्विपक्षीय उदाहरण की तरह पेश किया जा रहा है। गांव के एक बुजुर्ग ने कहा कि, “जिसे हमारी आवाज सुननी चाहिए, वही गायब है। मदद की उम्मीद वहां से आई जहाँ की हमने कभी कल्पना भी नहीं की थी।

चुनावी संकेत, ग्रामीणों की नाराज़गी और आगे की राह

ग्रामीणों का कहना है कि वे आने वाले समय में जवाब देंगे। माहौल में यह एहसास साफ था कि लोग खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं और अब बदलाव की ओर सोच बना रहे हैं।

सुधीर बुआना ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि “जनता सब समझ रही है, वक्त आने पर जवाब मिलेगा।

यह पूरा घटनाक्रम सिर्फ स्थानीय असंतोष नहीं, बल्कि आने वाले चुनावी मौसम का शुरुआती संकेत भी माना जा रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक गांव-देहात का यह रिसाव आगे बड़ी लकीर खींच सकता है।

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