मौत को मात! सिरसा में नहर में समाई कार, फरिश्ता बनकर आए ग्रामीणों ने बचाई 6 जिंदगियां
सिरसा के माखोसरानी में नोहर फीडर नहर में गिरी कार से 6 लोगों को ग्रामीणों ने जान पर खेलकर बचाया। फतेहाबाद का यह परिवार एक बड़े हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बचा। डॉ. राजेश और ग्रामीणों की बहादुरी की पूरे इलाके में चर्चा हो रही है।

- नहर के गहरे पानी में समाई मासूमों और महिलाओं की चीखें
- देवदूत बनकर आए राहगीर और ग्रामीणों का अदम्य साहस
- मौत के मुहाने से सुरक्षित बाहर निकलीं 6 अनमोल जिंदगियां
- अस्पताल में भर्ती घायलों की स्थिति और घटना का पूरा घटनाक्रम
सिरसा: हरियाणा के सिरसा जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसे सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं। बुधवार शाम जब सूरज ढल चुका था और अंधेरा पैर पसार रहा था तभी नाथूसरी चोपटा क्षेत्र के माखोसरानी गांव के पास एक खौफनाक हादसा हुआ।
एक बेकाबू कार सीधे नोहर फीडर नहर के गहरे और ठंडे पानी में जा समाई। कार में दो मासूम बच्चे और तीन महिलाएं सवार थीं जिनके लिए वह पल जिंदगी और मौत के बीच का फासला बन गया था।
यह हादसा शाम करीब 7:30 बजे का है। फतेहाबाद के हिंजरावा खुर्द का एक परिवार जब कार में सवार होकर नाथूसरी चोपटा की ओर जा रहा था तभी अचानक कार का संतुलन बिगड़ा और वह सीधे नहर में जा गिरी।
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उस सन्नाटे में चीख-पुकार मच गई। उसी समय वहां से बाइक पर गुजर रहे डॉ. राजेश कुमार सिद्धू के कानों में आवाजें पड़ीं। डॉ. सिद्धू ने बिना वक्त गंवाए मोर्चा संभाला और शोर मचाकर ग्रामीणों को मदद के लिए इकट्ठा किया।
डॉ. सिद्धू की आवाज सुनकर गांव के जांबाज युवक रमेश कुमार भाकर, प्रमोद कासनिया और प्रदीप कासनिया मौके पर दौड़ पड़े।
अंधेरे और गहरे पानी की परवाह किए बिना इन ग्रामीणों ने नहर में छलांग लगाई। एक-एक करके कार के अंदर फंसे 58 वर्षीय मक्खन सिंह, 24 वर्षीय सुनीता, दो बुजुर्ग महिलाएं तारो और जीतो बाई समेत 4 साल के अवेक और महज 2 साल के मासूम आर्यन को बाहर निकाला गया।
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अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद सभी की हालत अब स्थिर है। इस रेस्क्यू के हीरो रहे डॉ. राजेश सिद्धू ने भावुक होते हुए कहा की शायद उस समय भगवान ने मुझे उन जिंदगियों को बचाने के लिए ही वहां भेजा था।
ग्रामीणों ने न केवल इंसानों को बचाया, बल्कि कड़ी मशक्कत के बाद कार को भी पानी से बाहर निकाला। पुलिस (डायल 112) और एंबुलेंस की टीम ने मौके पर पहुंचकर घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया।
यह घटना हमें याद दिलाती है कि आज के दौर में भी इंसानियत जिंदा है। अगर ग्रामीण सही समय पर सक्रिय न होते तो एक पूरा परिवार उजड़ सकता था।
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