सिरसा जेल के वार्डन का सुसाइड: ड्यूटी विवाद ने ली जान, DSP पर लगाए गंभीर आरोप

हरियाणा के सिरसा जेल में वार्डन सुखदेव सिंह ने कथित तौर पर सल्फास खाकर आत्महत्या की। मरने से पहले उन्होंने दो सुसाइड नोट में DSP समेत दो अधिकारियों पर मानसिक प्रताड़ना और दबाव डालने का आरोप लगाया। परिवार ने न्याय की मांग की है।

  • हरियाणा के सिरसा जेल में वार्डन ने की खुदकुशी, दो सुसाइड नोट मिले
  • DSP समेत दो अधिकारियों पर लगाए मानसिक प्रताड़ना के आरोप
  • ड्यूटी समय को लेकर विवाद के बाद घर में खाई जहरीली दवा
  • परिवार न्याय की मांग पर अड़ा, शव नहीं उठाने की चेतावनी

हरियाणा के सिरसा जिले से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। जिला जेल में तैनात वार्डन सुखदेव सिंह ने कथित तौर पर सल्फास (poison tablet) खाकर खुदकुशी कर ली। यह घटना शुक्रवार को सामने आई जब वह घर पर बेहोशी की हालत में मिले। परिवार के सदस्य तुरंत उन्हें अस्पताल ले गए लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

दो सुसाइड नोट से खुला विवाद का राज

मृतक वार्डन के पास से दो सुसाइड नोट (suicide notes) मिले हैं, जिनमें उन्होंने ड्यूटी को लेकर हुए विवाद का जिक्र किया है। नोट में लिखे शब्दों ने पुलिस और जेल प्रशासन दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सुखदेव सिंह ने अपने नोट में सीधे तौर पर जेल के DSP समेत दो अधिकारियों पर मानसिक प्रताड़ना (mental harassment) और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के दबाव का आरोप लगाया है।

परिवार बोला – जब तक न्याय नहीं मिलेगा, शव नहीं उठाएंगे

घटना के बाद परिजनों ने प्रशासन के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। परिवार का कहना है कि जब तक आरोपी अधिकारियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई (strict action) नहीं होती वे शव को नहीं उठाएंगे। मृतक के रिश्तेदारों ने कहा कि सुखदेव सिंह लंबे समय से दबाव में थे और कई बार उन्होंने इसे लेकर चिंता भी जताई थी।

पुलिस जांच में जुटी, लेकिन भरोसा टूटा हुआ है

इस पूरे मामले की जांच हुडा पुलिस चौकी (Huda Police Chowki) कर रही है। पुलिस टीम ने वार्डन के घर और कार्यालय से कुछ जरूरी दस्तावेज जब्त किए हैं। हालांकि परिवार का आरोप है कि जांच सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई है और अब तक किसी अधिकारी से पूछताछ नहीं हुई।

तनाव और “सिस्टम” की चुप्पी

यह घटना उस गहराई को छूती है जो अक्सर सरकारी संस्थानों की दीवारों के भीतर दबी रह जाती है। ड्यूटी टाइमिंग (duty timing) पर विवाद आम बात लगती है, पर इसने एक कर्मचारी की जान ले ली। सुखदेव सिंह के सहकर्मियों का कहना है कि ड्यूटी शेड्यूल बदलने को लेकर उनका डीएसपी से कई बार टकराव हुआ था लेकिन किसी ने भी उनकी मानसिक स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया।

अब सवाल – सिस्टम में जिम्मेदारी कौन लेगा?

सिरसा जेल प्रशासन पर अब कई सवाल खड़े हो गए हैं। क्या मानसिक दबाव झेल रहे कर्मचारियों को मदद (support system) देने का कोई तंत्र मौजूद है? या फिर ऐसी घटनाएं सिर्फ जांच और फाइल बंद करने तक ही सीमित रहेंगी?

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Saloni Yadav

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