फिजी में तेजी से बढ़ रहा एचआईवी का संक्रमण, डब्ल्यूएचओ ने असुरक्षित इंजेक्शन को लेकर दी चेतावनी

मनीला, 10 दिसंबर (आईएएनएस)। एचआईवी को लेकर आए दिन नए-नए खुलासे हो रहे हैं। हाल ही में फिजी में ड्रग्स लेने वाले लोगों को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि ड्रग्स इंजेक्ट लेने वाले लोगों में एचआईवी संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है।

न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, फिजी दुनिया भर में सबसे तेजी से बढ़ रही एचआईवी महामारी का सामना कर रहा है। द ग्लोबल फंड की तरफ से जारी किए गए रैपिड असेसमेंट में खुलासा हुआ है कि देश में नीडल और सिरिंज प्रोग्राम (एनएसपीएस) की कमी की वजह से नीडल और सिरिंज का बड़े पैमाने पर दोबारा इस्तेमाल और शेयरिंग हो रही है।

इस सर्वे में जिन लोगों को शामिल किया गया था, उन लोगों ने बताया कि उन्होंने पहले किसी और के इस्तेमाल किए गए इंजेक्शन इक्विपमेंट का दोबारा इस्तेमाल किया है। इस तरह की चीजें बेहद खतरनाक होती हैं। इसकी वजह से एचआईवी, वायरल हेपेटाइटिस, और इंजेक्शन से जुड़े दूसरे संक्रमण का खतरा तेजी से बढ़ता है।

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अध्ययन के अनुसार फिजी में ड्रग्स लेने वाले लोगों में ड्रग्स के इस्तेमाल और सेहत की देखभाल के तरीकों की अब तक की सबसे विस्तृत तस्वीर सामने आई है। इस सर्वे में आंकड़ों के साथ-साथ 56 व्यक्तिगत इंटरव्यू शामिल हैं, जिसमें सिविल सोसाइटी संगठनों के प्रतिनिधि, स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञ, कानून लागू करने वाली एजेंसियों के अधिकारी, धार्मिक संस्थानों से जुड़े लोग और सरकारी मंत्रालयों के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल थे।

इसके अलावा, पांच तलानोआ पारंपरिक सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के अलग-अलग स्तरों से जुड़े लगभग 50 प्रमुख प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान ड्रग्स उपयोग से जुड़े सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं पर चर्चा की गई और यह भी पता लगाया गया कि समुदाय और सरकारी ढांचा इस समस्या से निपटने में क्या कर रहे हैं, या भविष्य में क्या कदम उठा सकते हैं।

सिन्हुआ के अनुसार 1 मिलियन से कम आबादी वाले फिजी में हाल के सालों में एचआईवी के मामलों में काफी तेजी देखने को मिली है। 2024 में यहां एचआईवी के 1,583 नए मामले दर्ज किए गए, जबकि 2025 के पहले छह महीनों में ही 1,226 मामले सामने आए।

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यूएनएआईडीएस का अनुमान है कि एचआईवी से पीड़ित लोगों की कुल संख्या 2020 में लगभग 2,000 से बढ़कर 2024 में लगभग 6,100 हो गई। 2024 में इलाज शुरू करने वाले लगभग 48 फीसदी लोग ऐसे थे जो ड्रग्स का इंजेक्शन लेते हैं।

–आईएएनएस

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