इंदौर में दूषित पानी का कहर: सीवर जैसा बैक्टीरिया मिला, NHRC ने मांगी रिपोर्ट
इंदौर के भगिरथपुरा में दूषित पीने के पानी से नौ लोगों की मौत की पुष्टि के बाद जांच समिति ने पानी में सीवर जैसे बैक्टीरिया पाए। NHRC ने राज्य सरकार से दो हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है, जबकि अस्पतालों में अब भी सैकड़ों मरीज भर्ती हैं।
- इंदौर के भगिरथपुरा इलाके में दूषित पानी से नौ की मौत की पुष्टि
- शुरुआती जांच में सेवर वॉटर जैसी बैक्टीरिया पाए गए
- स्वास्थ्य विभाग ने पाइपलाइन लीक को बताया मुख्य कारण
- NHRC ने सरकार से दो हफ्ते में विस्तृत रिपोर्ट मांगी
इंदौर के भगिरथपुरा इलाके में फैली पानीजनित बीमारी (Waterborne Disease) ने अब तक नौ लोगों की जान ले ली है। शुरुआती जांच में पता चला है कि इलाके की पेयजल (Drinking Water) सप्लाई में ऐसे बैक्टीरिया (Bacteria) पाए गए हैं जो सामान्यत: सीवर वॉटर (Sewer Water) में मिलते हैं। यह खुलासा जांच समिति की प्रारंभिक रिपोर्ट में हुआ है जिससे शहर में हड़कंप मच गया।
पाइपलाइन लीक बना जिंदगी और मौत के बीच की दरार
जांच में यह भी सामने आया है कि पुरानी सीवेज पाइपलाइन से रिसाव (Leakage) होकर दूषित पानी सप्लाई लाइन में मिल गया। महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बताया कि “रिपोर्ट में असामान्य बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है जो सीवर जैसे पानी में पाए जाते हैं। हालांकि कल्चर रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ होगा कि कौन-से विशेष जीवाणु (Pathogens) जिम्मेदार हैं।”
डॉ. माधव हसानी, सीएमएचओ (Chief Medical and Health Officer) ने कहा कि “लोगों की तबियत बिगड़ने और मौत की वजह दूषित पानी ही है। पाइपलाइन लीक के चलते सीवेज इसमें घुस गया था।”
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जमीनी हालात: अब भी सैकड़ों बीमार
स्थानीय प्रशासन ने बताया कि अब तक करीब 2,400 से अधिक लोगों में उल्टी-दस्त जैसे लक्षण पाए गए हैं। इनमें से 160 से ज्यादा मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं। इलाके के निवासी बताते हैं कि 25 दिसंबर को उन्होंने पहली बार पानी से निकलती अजीब गंध (Odour) महसूस की थी लेकिन समस्या उससे पहले से जारी थी।
कुल 14 मौतों की पड़ताल के बाद जांच समिति ने पुष्टि की कि उनमें से 9 की मौत दस्त (Diarrhoea) के कारण हुई बाकी मामलों में अन्य बीमारियां या दुर्घटना कारण थे।
इलाके में निरीक्षण और कार्रवाई की तैयारी
अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दूबे ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया और नगर निगम अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने निर्देश दिया कि शहर के अन्य इलाकों से भी रैंडम सैंपलिंग (Random Sampling) की जाए ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
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उन्होंने स्वीकार किया कि 30 साल पुरानी पाइपलाइन में लीक ढूंढना आसान नहीं, लेकिन नागरिक सुरक्षा के लिए निगरानी (Monitoring) दुरुस्त करनी होगी।
राजनीतिक बयान और माफी
इस बीच, शहरी विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मीडिया से बातचीत में विवादित टिप्पणी कर दी जिसे लेकर सोशल मीडिया पर विरोध बढ़ा। बाद में उन्होंने बयान जारी कर कहा, “बीते दो दिन से मेरी टीम लगातार प्रभावित इलाकों में काम कर रही है। दुख की इस घड़ी में मुझसे शब्दों की चूक हो गई इसके लिए मैं खेद व्यक्त करता हूं।” उन्होंने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपए की सहायता राशि सौंपी और आश्वासन दिया कि शेष परिवारों को भी मुआवजा मिलेगा।
मानवाधिकार आयोग की चेतावनी
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी घटना को गंभीरता से लेते हुए मध्य प्रदेश सरकार से दो सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट (Detailed Report) मांगी है। आयोग ने कहा कि यह मामला नागरिकों के बुनियादी मानवाधिकारों (Human Rights) के उल्लंघन से जुड़ा है और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
इंदौर की यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि स्वच्छ पेयजल की कमी सिर्फ विकास का नहीं बल्कि जीवन और सम्मान का भी प्रश्न है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि सरकार सख्त जवाबदेही तय करती है या हादसे के साथ संवेदनशीलता भी फिर से बह जाती है।
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