अरावली पर सियासी संग्राम: खनन आरोपों पर केंद्र का जवाब, भूपेंद्र यादव ने रखी पूरी तस्वीर
अरावली पहाड़ियों को लेकर खनन की अनुमति के आरोपों पर केंद्र सरकार ने जवाब दिया है। पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को गलत तरीके से पेश किया गया और अरावली का अधिकांश क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित है। पढ़े पूरा अपडेट -
- अरावली को बचाने के लिए प्रयास
- खनन को लेकर फैली अफवाहों पर सरकार ने रखी स्थिति साफ
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या का आरोप
- हरियाणा–दिल्ली–राजस्थान में अरावली क्षेत्र में हरियाली बढ़ने का दावा
देश की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला अरावली एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में है। इस बार सवाल उसकी परिभाषा, सीमा और भविष्य को लेकर उठे हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि अरावली की परिभाषा में बदलाव कर बड़े पैमाने पर खनन का रास्ता खोला जा रहा है। इस आरोप ने पर्यावरण से जुड़े हलकों में हलचल बढ़ा दी जिसके बाद केंद्र सरकार को सामने आकर सफाई देनी पड़ी।
सोमवार को दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया। उनका कहना था कि अरावली को कमजोर करने या उसके साथ छेड़छाड़ का सवाल ही नहीं उठता बल्कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में इसके संरक्षण पर पहले से ज्यादा काम हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर भ्रम
भूपेंद्र यादव ने सीधे तौर पर उस सुप्रीम कोर्ट के आदेश का जिक्र किया जिसे लेकर विवाद खड़ा किया गया है। मंत्री के मुताबिक, कोर्ट के फैसले को अधूरा और गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं आदेश को विस्तार से पढ़ा है और उसमें कहीं भी खनन को मंजूरी देने की बात नहीं कही गई है। उलटे, फैसले में अरावली को संरक्षित करने और इसके विस्तार पर जोर दिया गया है।
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उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फैसले में जिस टॉप मीटर शब्द का उल्लेख है उसका संबंध केवल भूमि की न्यूनतम ऊंचाई तय करने से है न कि खनन को हरी झंडी देने से। मंत्री ने दो टूक कहा कि नई खनन लीज देने पर रोक पहले की तरह जारी है।
एनसीआर में खनन पर सीधा प्रतिबंध
खनन के सवाल पर मंत्री का रुख सख्त नजर आया। उन्होंने कहा कि एनसीआर क्षेत्र में किसी भी तरह के खनन की अनुमति नहीं है और आगे भी नहीं दी जाएगी। अरावली का जो कोर एरिया है वहां पहले भी खनन प्रतिबंधित था और यह प्रतिबंध आगे भी बना रहेगा। सरकार इस मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी।
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उनका कहना था कि पर्यावरण जैसे संवेदनशील विषय पर आधी-अधूरी जानकारी फैलाकर लोगों में डर पैदा करना ठीक नहीं है खासकर तब जब तथ्य इसके उलट हों।
हरियाली बढ़ने का सरकार का दावा
केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अरावली क्षेत्र में हरियाली बढ़ी है, कम नहीं हुई। उन्होंने हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान का उदाहरण देते हुए कहा कि इन राज्यों में ग्रीन बेल्ट को मजबूत करने के लिए लगातार काम किया गया है। दिल्ली में हरित क्षेत्र के विकास को भी इसी दिशा में उठाया गया कदम बताया गया।
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आंकड़ों का हवाला देते हुए भूपेंद्र यादव ने कहा कि अरावली पर्वतमाला का कुल क्षेत्र लगभग 1.44 लाख वर्ग किलोमीटर है। इसमें से महज 0.19 प्रतिशत क्षेत्र ही खनन की पात्रता की श्रेणी में आता है वह भी सख्त शर्तों के साथ। इसका साफ मतलब है कि अरावली का विशाल हिस्सा पूरी तरह सुरक्षित है।
पर्यावरण मंत्रालय का कहना है कि अरावली सिर्फ एक पहाड़ी श्रृंखला नहीं बल्कि उत्तर भारत के पर्यावरण संतुलन की रीढ़ है। इसी वजह से सरकार की नीति संरक्षण पर केंद्रित है न कि दोहन पर।
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