मणिपुर के तेंगनौपाल में असम राइफल्स का मेगा मेडिकल कैंप, 2000 ग्रामीणों को मिला मुफ्त इलाज

मणिपुर के तेंगनौपाल में असम राइफल्स ने ऑपरेशन सद्भावना के तहत मेगा मेडिकल कैंप लगाया। रिम्स इंफाल के डॉक्टरों ने 2000 से अधिक ग्रामीणों का मुफ्त इलाज किया और दवाइयां बांटी।

  • मणिपुर बॉर्डर के गांवों में जब सेना ने थामी नब्ज
  • असम राइफल्स का मेगा कैंप बना 2000 लोगों के लिए सहारा
  • म्यांमार सीमा से सटे इलाकों में सेवाएं
  • दवाओं से लेकर जांच तक सब कुछ मुफ्त
  • ऑपरेशन सद्भावना के तहत सीमावर्ती परिवारों तक पहुंचाया इलाज

Manipur News: मणिपुर का तेंगनौपाल जिला जहां की पहाड़ियां और कठिन रास्ते अक्सर आम आदमी की पहुंच से बाहर होते हैं वहां गुरुवार को कुछ अलग ही चहल-पहल दिखी। भारत-म्यांमार सीमा के पास बसे इन सुदूर गांवों में असम राइफल्स ने ‘ऑपरेशन सद्भावना’ के जरिए उन लोगों तक उम्मीद पहुंचाई, जो इलाज के लिए कई किलोमीटर पैदल चलने को मजबूर रहते हैं। सेना ने यहां एक बड़ा मेडिकल कैंप लगाया जहां करीब 2000 ग्रामीणों ने अपना चेकअप कराया और दवाइयां लीं।

यह सिर्फ एक कैंप नहीं था बल्कि उन लोगों के लिए एक बड़ी राहत थी जिन्होंने अरसे से किसी विशेषज्ञ डॉक्टर को अपनी परेशानी नहीं बताई थी। सीमावर्ती इलाकों की दुर्गम परिस्थितियों के बीच स्वास्थ्य सेवाओं का पहुंचना किसी वरदान से कम नहीं लगता।

जब रिम्स के विशेषज्ञ पहुंचे ग्रामीणों के बीच

इस कैंप की सबसे खास बात यह थी कि यहां सिर्फ सामान्य डॉक्टर नहीं, बल्कि इंफाल के मशहूर ‘क्षेत्रीय चिकित्सा विज्ञान संस्थान’ (RIMS) के विशेषज्ञ पहुंचे थे। मोतियाबिंद की समस्या हो, बच्चों का स्वास्थ्य या फिर महिलाओं की जटिल स्वास्थ्य परेशानियां, हर मर्ज के लिए अलग डेस्क थी।

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गाँव के बुजुर्ग जो पहाड़ियों पर चलने की वजह से जोड़ों के दर्द और कमजोर नजर से परेशान रहते हैं उनके लिए अस्थि रोग और नेत्र रोग विशेषज्ञों ने खास समय निकाला। वहीं, दांतों की तकलीफ झेल रहे लोगों को पहली बार उनके अपने इलाके में ही डेंटल प्रोसीजर और बचाव की सलाह मिली। महिलाओं और बच्चों की भीड़ यह बताने के लिए काफी थी कि इन इलाकों में स्त्री रोग और बाल रोग विशेषज्ञों की कितनी ज्यादा जरूरत थी।

वर्दी और सेवा का अनोखा संगम

कैंप को सुचारू रूप से चलाने के लिए असम राइफल्स के करीब 65 जवानों और अधिकारियों की टीम सुबह से ही डटी रही। भीड़ को संभालना हो या बुजुर्गों को डॉक्टर की कुर्सी तक ले जाना, जवानों ने हर मोड़ पर मदद की। स्थानीय संगठनों का कहना है कि सरहद पर तैनात इन जवानों ने न केवल सुरक्षा का भरोसा दिया बल्कि एक परिवार की तरह लोगों के सेहत की भी चिंता की।

तेंगनौपाल जैसे इलाकों में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं आज भी एक चुनौती हैं। ऐसे में रिम्स के डॉक्टरों के परामर्श के साथ-साथ मुफ्त दवाइयों के वितरण ने ग्रामीणों के चेहरे पर मुस्कान ला दी।

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ऑपरेशन सद्भावना: दिल जीतने की एक कोशिश

भारतीय सेना का ‘ऑपरेशन सद्भावना’ सालों से देश के कोने-कोने में शिक्षा और स्वास्थ्य के जरिए लोगों को मुख्यधारा से जोड़ रहा है। मणिपुर के इस कैंप ने एक बार फिर साबित किया कि सुरक्षा बल और स्थानीय जनता के बीच का रिश्ता विश्वास की बुनियाद पर टिका है।

असम राइफल्स का यह प्रयास केवल एक दिन का शिविर नहीं है, बल्कि उस निरंतरता का हिस्सा है जिसके जरिए वे सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर को सुधारने का प्रयास करते रहे हैं। जब दवाइयां खत्म हो जाएंगी और डॉक्टर वापस लौट जाएंगे तब भी वहां के लोगों के मन में सेना के प्रति जो सम्मान और अपनेपन का भाव जागा है वह लंबे समय तक बना रहेगा।

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