आतंकवाद पर जयशंकर का कड़ा रुख: अरब देशों के साथ दिल्ली में बड़ी बैठक, गाजा और सीमा पार आतंक पर दिया बड़ा बयान
विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने भारत-अरब बैठक में आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश दिया है। गाजा संकट से लेकर सीमा पार आतंक तक, जानें क्यों भारत ने कहा कि आत्मरक्षा का हक सबको है।
- आतंकवाद पर भारत और अरब जगत का साझा संकल्प
- सीमा पार आतंक अब बर्दाश्त से बाहर, जयशंकर की दोटूक
- गाजा से सूडान तक, अशांत पश्चिम एशिया पर भारत की पैनी नजर
- बदलती दुनिया में भारत-अरब की ऐतिहासिक दोस्ती का नया अध्याय
नई दिल्ली की सर्द सुबह में जब भारत और अरब देशों के विदेश मंत्री एक मेज पर जुटे, तो कूटनीति के गलियारों में एक बात साफ थी—दुनिया बदल रही है, और इस बदलाव में भारत और अरब जगत की साझेदारी अब महज औपचारिकता नहीं, बल्कि वक्त की जरूरत है। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने दूसरी भारत-अरब विदेश मंत्री बैठक में जब बोलना शुरू किया, तो उनके शब्दों में वह तपिश थी जो दशकों से आतंकवाद का दंश झेल रहे एक देश के प्रतिनिधि में होती है।
जयशंकर ने साफ कह दिया कि आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ यानी शून्य सहिष्णुता अब कोई विकल्प नहीं बल्कि एक वैश्विक मानक होना चाहिए। उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के दुनिया को आईना दिखाते हुए कहा कि आतंकवाद चाहे किसी भी रूप में हो, वह भारत और अरब देशों के लिए एक साझा दुश्मन है।
सीमा पार आतंक और आत्मरक्षा का अधिकार
अक्सर कूटनीति की भाषा बहुत गोल-मोल होती है, लेकिन जयशंकर ने यहाँ सीधे मुद्दे पर बात की। उन्होंने ‘क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म’ यानी सीमा पार से होने वाले आतंकवाद को अंतरराष्ट्रीय संबंधों और कूटनीति के बुनियादी सिद्धांतों का खुला उल्लंघन बताया। भारत का रुख यहाँ बिल्कुल स्पष्ट दिखा कि जब कोई समाज आतंकवाद का निशाना बनता है, तो उसे अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है और वह इस अधिकार का इस्तेमाल करेगा ही। यह बयान उन ताकतों के लिए एक कड़ा संदेश है जो आतंक को नीति के तौर पर इस्तेमाल करते हैं।
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बदलती दुनिया और हमारे पुराने रिश्ते
डॉ. जयशंकर ने याद दिलाया कि भारत और ‘लीग ऑफ अरब स्टेट्स’ (LAS) के देशों के बीच कोई नया रिश्ता नहीं है। यह सदियों पुराना जुड़ाव है जो इतिहास की गहराई में दबा है। उन्होंने कहा कि आज हम एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहाँ राजनीति, अर्थव्यवस्था, तकनीक और आबादी के समीकरण पूरी दुनिया को बदल रहे हैं। खासकर पश्चिम एशिया में बीते एक साल में जो उथल-पुथल मची है, उसका सीधा असर भारत पर पड़ता है क्योंकि यह हमारा पड़ोसी क्षेत्र है।
गाजा का संकट और शांति की पुकार
बैठक में पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात, खासकर गाजा की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई गई। जयशंकर ने जोर देकर कहा कि गाजा संघर्ष को खत्म करने के लिए एक व्यापक योजना पर आगे बढ़ना आज पूरी दुनिया की प्राथमिकता होनी चाहिए। भारत का मानना है कि इस अशांति की गूँज सिर्फ उस क्षेत्र तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पूरी दुनिया को परेशान करती है।
सूडान से लेकर लेबनान तक की चिंता
बात सिर्फ गाजा तक नहीं रुकी। विदेश मंत्री ने सूडान, यमन, लेबनान और लीबिया के बिगड़ते हालातों की ओर भी ध्यान खींचा। उन्होंने कहा कि सीरिया में जो कुछ हो रहा है, वह पूरे क्षेत्र की भलाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। भारत इन सभी मुद्दों पर एक सामूहिक जिम्मेदारी और आपसी सहयोग की वकालत कर रहा है, ताकि शांति का रास्ता निकाला जा सके।
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आज की यह बैठक केवल कागजी समझौतों के बारे में नहीं थी, बल्कि यह उस भरोसे की मजबूती थी जो भारत और अरब देशों के बीच सालों से बना हुआ है। अब देखना यह है कि यह साझा संकल्प आने वाले समय में वैश्विक राजनीति में कितनी बड़ी तब्दीली लाता है।
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