मुर्शिदाबाद में ‘बाबरी मॉडल’ मस्जिद की नींव रखे जाने पर संग्राम छिड़ा, रामनगरी से दिल्ली तक तीखी राजनीतिक गर्माहट
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले का बेलडांगा कस्बा शनिवार को अचानक राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया। यहां TMC से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर द्वारा अयोध्या की बाबरी मस्जिद की तर्ज पर प्रस्तावित मस्जिद के लिए ईंट और पत्थर रखने के कदम ने देशभर में तीखी प्रतिक्रियाओं की आग भड़का दी है।
स्थानीय राजनीति का एक मामूली कार्यक्रम देखते-देखते राष्ट्रीय भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बन गया — और यही बात इसे और भी संवेदनशील बना रही है।
रामनगरी में तीखा आक्रोश: “140 करोड़ भारतीयों का अपमान”
अयोध्या के साधु-संतों ने इस कदम को सीधे-सीधे राष्ट्रीय भावनाओं पर चोट करार दिया है। कई धर्माचार्यों ने बेलडांगा की घटना को “सोची-समझी उकसाव” बताते हुए कहा कि बाबरी मस्जिद की कानूनी पृष्ठभूमि और दशकों पुरानी भावनाएं किसी राजनीतिक महत्वाकांक्षा का उपकरण नहीं बन सकतीं।
एक संत ने नाराज़गी जताते हुए कहा—
“यह सिर्फ एक मस्जिद निर्माण नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की सामूहिक संवेदनाओं को चुनौती देने जैसा है।”
पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी बोले: “यह चुनावी राजनीति है”
बाबरी मस्जिद केस के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने भी इस विवाद से दूरी बनाते हुए इसे पूरी तरह राजनीतिक स्टंट बताया।
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अंसारी ने कहा कि अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का देशभर के मुसलमानों ने सम्मान किया है, इसलिए अब किसी नई मस्जिद को “बाबरी मस्जिद” से जोड़ना गैर-ज़रूरी भी है और भड़काऊ भी।
उनके शब्दों में—
“आज बाबरी और राम जन्मभूमि को लेकर कोई झगड़ा नहीं है। फैसले का सम्मान हो चुका है। बाबर के नाम पर नई मस्जिद बनाना भी कोई धार्मिक कर्तव्य नहीं है।”
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने केंद्र को घेरा: “यह नफरत खड़ी करने की कोशिश”
घटना ने विपक्ष को भी मुखर कर दिया है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे “देश में दोबारा नफरत पैदा करने की तैयारी” बताया।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि हुमायूं कबीर 2019 में BJP टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं।
उनके मुताबिक—
“माहौल बिगाड़ने की पटकथा पहले से लिखी जा चुकी थी। बंगाल सरकार को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।”
BJP का पलटवार: “TMC का ध्रुवीकरण एजेंडा”
दूसरी ओर BJP नेता सैयद शाहनवाज़ हुसैन ने गर्मी सीधे TMC पर डाल दी।
उन्होंने दावा किया कि पार्टी ने कबीर को भले निकाल दिया हो, लेकिन पूरा कार्यक्रम “TMC के संकेत” पर हुआ है।
हुसैन बोले—
“TMC चुनावी ध्रुवीकरण चाहती है। यह पूरा मामला वोट-बैंक की राजनीति का हिस्सा है।”
स्थानीय मुद्दा कैसे बना ‘राष्ट्रीय बहस’?
विशेषज्ञ कहते हैं कि बंगाल में चुनावी मौसम भले अभी दूर हो, लेकिन टीएमसी-बीजेपी के बीच राजनीतिक टकराव हमेशा गर्म रहता है।
मस्जिद की नींव का यह विवाद—
• धार्मिक भावनाएं,
• चुनावी ध्रुवीकरण,
• और बाबरी इतिहास की प्रतीकात्मक स्मृति—
इन तीनों के मेल से तुरंत राष्ट्रीय बहस बन गया।
राज्य प्रशासन ने अभी तक आधिकारिक जांच की पुष्टि नहीं की है, लेकिन बढ़ते तनाव को देखते हुए स्थानीय पुलिस बेलडांगा में सुरक्षा बढ़ा चुकी है।
फिलहाल सभी की निगाहें TMC के अगले कदम और राज्य सरकार की संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं।
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