वीजा काउंटर से बॉर्डर तक: पलवल इंजीनियर की गिरफ्तारी ने खोला पाक हाई कमीशन का जासूसी नेटवर्क

पलवल के इंजीनियर वसीम अकरम को पाकिस्तान उच्चायोग के अधिकारियों के साथ जासूसी संबंधों के आरोप में बीएनएस और ओएसए के तहत गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने वीज़ा डेस्क रिश्वतखोरी और संवेदनशील रक्षा डेटा लीक का खुलासा किया है, जिससे सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था खतरे में पड़ गई है।

पलवल के रहने वाले सिविल इंजीनियर वसीम अकरम की गिरफ्तारी ने एक बार फिर पाकिस्तान हाई कमीशन के वीजा डेस्क (Pakistan High Commission) को जासूसी (espionage) के लिए इस्तेमाल करने का काला चेहरा उजागर कर दिया है। मंगलवार को दिल्ली पुलिस ने बीएनएस (BNS) और ओएसए (OSA) की धाराओं के तहत उसे हिरासत में लिया। सूत्रों के मुताबिक, अकरम पाक हाई कमीशन के अधिकारी जफर उर्फ मुजम्मिल हुसैन के लिए डेटा सप्लाई (data supplier) का काम कर रहा था। ये मामला भ्रष्टाचार (corruption) और जासूसी के घालमेल को साफ दिखाता है।

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अकरम कसूर में रिश्तेदारों से मिलने पाकिस्तान जाने के चक्कर में था। वीजा अप्लाई करते वक्त हाई कमीशन के अफसर से उसकी मुलाकात हुई। पहले तो वीजा रिजेक्ट हो गया, लेकिन 20,000 रुपये की रिश्वत चढ़ाने के बाद मंजूर हो गया। मई 2022 में वो कसूर पहुंचा। उसके बाद जफर ने व्हाट्सएप (WhatsApp) पर कनेक्ट रहकर अकरम को लाइन पर रखा। कमीशन का लालच देकर अकरम ने अपना बैंक अकाउंट वीजा फीस पूल (visa facilitation fund) के लिए दे दिया। अकाउंट में करीब 5 लाख रुपये ट्रांसफर हुए, और बिचौलियों के जरिए कैश भी आया। अकरम ने जफर को 2.3 लाख रुपये दिए, जिसमें 1.5 लाख कैश थे। ऊपर से सिम कार्ड (SIM card) भी थमा दिया।

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बात यहीं खत्म नहीं हुई। अकरम पर ओटीपी (OTP) शेयर करने और आर्मी के जवानों की डिटेल्स (army personnel details) अपने हैंडलर को लीक करने का इल्जाम है। जांच एजेंसियां कह रही हैं कि ये ‘पलवल मॉड्यूल’ (Palwal module) मलेरकोटला और नूह के पुराने केसों से मिलता-जुलता है। मलेरकोटला का खुलासा इस साल ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के बाद हुआ था। वहां पाक अफसर दानिश उर्फ एहसान उर रहीम ने लोकल लोगों को वीजा का लालच देकर जासूसी (spy recruitment) का जाल बिछाया था। छोटे-मोटे UPI ट्रांसफर के बदले संवेदनशील डिफेंस इंफो (defense information) ले ली जाती थी।

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ट्रैवल इन्फ्लुएंसर (travel influencer) ज्योति मल्होत्रा के जासूसी केस में भी दानिश का नाम फंसा था। पैटर्न साफ है – पाक हाई कमीशन के स्टाफ वीजा अप्लिकेंट्स (visa applicants) को रिश्वत के जाल में फंसाते हैं, फिर सिम कार्ड और खुफिया वीडियो (intelligence videos) मुहैया कराने को मजबूर करते हैं। नूह में अरमान नाम के शख्स को भी इसी क्रम में पकड़ा गया था – वो हाई कमीशन अफसर को सिम और डिफेंस एक्सपो (defense expo) के वीडियो दे रहा था।

ये गिरफ्तारी बताती है कि बॉर्डर सिक्योरिटी (border security) पर खतरा अब वीजा काउंटर तक पहुंच चुका है। एजेंसियां अब ऐसे और नेटवर्क्स को तोड़ने पर जुटी हैं, ताकि जासूसी का ये सिलसिला रुके।

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Saloni Yadav

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