सोमनाथ से अयोध्या तक: पीएम मोदी ने बताया कैसे बदल गया भारत, सिंधिया के लेख ने छेड़ी नई चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के एक विशेष लेख को साझा करते हुए भारत की सांस्कृतिक चेतना पर अपनी बात रखी है। पीएम ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में सोमनाथ से लेकर राम मंदिर तक का सफर एक नए और आत्मविश्वास से भरे भारत की पहचान है।

  • भारत की सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक के रूप में सोमनाथ मंदिर की पीएम मोदी ने की सराहना।
  • पिछले 11 वर्षों में सोमनाथ से राम जन्मभूमि तक के कायाकल्प को नए भारत का उदय बताया।
  • केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने लेख में सिंधिया राजवंश और सोमनाथ के ऐतिहासिक संबंधों का किया जिक्र।
  • विदेशी आक्रांताओं के हमलों के बावजूद सोमनाथ का बार-बार खड़ा होना भारत की अटूट शक्ति का प्रमाण।

भारत की सांस्कृतिक विरासत और उसके गौरवशाली इतिहास को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बड़ी बात कही है। गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के एक लेख को साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने देश की बदलती तस्वीर का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर सिर्फ एक ढांचा नहीं है बल्कि यह हमारी शाश्वत सांस्कृतिक चेतना का सबसे बड़ा प्रतीक है।

प्रधानमंत्री ने अपने पोस्ट में इस बात पर जोर दिया कि पिछले 11 सालों के दौरान देश ने अपनी पहचान को वापस पाने के लिए एक लंबा सफर तय किया है। उन्होंने सोमनाथ के पुनरुद्धार से लेकर अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण तक की यात्रा को एक ऐसे भारत का प्रमाण बताया जो अब आत्मविश्वास से भरा हुआ है और अपनी सांस्कृतिक जड़ों पर गर्व करना जानता है।

सिंधिया के लेख में इतिहास की अनकही परतें

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा लिखे गए एक लेख से हुई, जिसमें उन्होंने सोमनाथ के इतिहास और देश की सामूहिक चेतना को लेकर गहरी बातें लिखी थीं। सिंधिया ने अपने लेख में बताया कि कैसे सोमनाथ ने सदियों तक विदेशी आक्रांताओं के भीषण हमलों को झेला लेकिन हर बार वह राख से उठकर फिर खड़ा हो गया। उनके अनुसार यह मंदिर भारत की सहनशक्ति और सभ्यता की ताकत का जीता-जागता उदाहरण है।

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सिंधिया ने इस लेख के जरिए उस ऐतिहासिक गौरव को भी याद किया जिसे अक्सर इतिहास की किताबों में उतनी जगह नहीं मिली। उन्होंने बताया कि कैसे उनके पूर्वज महाराजा महादजी सिंधिया ने 1785 में लाहौर में मोहम्मद शाह अब्दाली को पराजित किया था। उस जीत के बाद वे सोमनाथ के उन चांदी के दरवाजों को वापस भारत लेकर आए थे जिन्हें आक्रांता लूटकर ले गए थे। सिंधिया ने इसे सदियों के अपमान का एक करारा जवाब करार दिया।

आत्मविश्वास से भरा नया भारत

प्रधानमंत्री मोदी ने सिंधिया की इन बातों का समर्थन करते हुए कहा कि आज का भारत अपनी विरासत को लेकर बिल्कुल भी संकोच नहीं करता। 11 वर्षों का यह कालखंड केवल विकास का ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक आत्मसम्मान की बहाली का भी रहा है।

आज जब दुनिया भारत की ओर देख रही है, तो भारत अपनी आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत को पूरी मजबूती के साथ पेश कर रहा है। सिंधिया ने भी अपने लेख के अंत में यह साफ किया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में न केवल सोमनाथ बल्कि देश के तमाम सांस्कृतिक प्रतीकों को वो सम्मान और आवाज मिली है जिसका वे लंबे समय से इंतजार कर रहे थे।

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यह लेख और पीएम मोदी की टिप्पणी सोशल मीडिया पर काफी चर्चा बटोर रही है क्योंकि यह सीधे तौर पर भारत की राष्ट्रीय अस्मिता और इतिहास के उन पन्नों को जोड़ती है जो देश के भविष्य की नींव रख रहे हैं।

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