गणतंत्र दिवस 2026: प्रोजेक्ट वीर गाथा 5.0 ने रचा इतिहास, 1.92 करोड़ छात्रों ने दिखाई देशभक्ति, 100 ‘सुपर विनर’ बनेंगे खास मेहमान

प्रोजेक्ट वीर गाथा 5.0 ने इस बार सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। देशभर के करीब 1.92 करोड़ छात्रों ने इसमें हिस्सा लिया, जिनमें से 100 'सुपर विनर्स' को गणतंत्र दिवस परेड में विशेष अतिथि के रूप में शामिल होने का मौका मिलेगा। पहली बार विदेशों से भी छात्रों ने इसमें शिरकत की है।

  • वीर गाथा प्रोजेक्ट के पांचवें संस्करण में 1.92 करोड़ छात्रों की रिकॉर्ड भागीदारी दर्ज।
  • देश के 100 ‘सुपर विनर्स’ को मिलेगा 10,000 रुपये का नकद पुरस्कार।
  • विदेश में स्थित 91 सीबीएसई स्कूलों के छात्रों ने भी पहली बार लिया हिस्सा।
  • 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर विशेष अतिथि बनेंगे देशभर के ये होनहार सितारे।

जब देश भक्ति और वीरता की कहानियों को स्कूली बच्चे अपने शब्दों में पिरोते हैं, तो एक अलग ही ऊर्जा देखने को मिलती है। इस बार ‘प्रोजेक्ट वीर गाथा 5.0’ ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। रक्षा मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय की इस साझा पहल ने इस साल इतिहास रच दिया है। साल 2021 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट में इस बार रिकॉर्ड तोड़ 1.92 करोड़ छात्रों ने हिस्सा लिया है जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।

छोटे बच्चों से लेकर बड़ों तक, हर तरफ वीरता की गूंज

इस प्रतियोगिता की सबसे खास बात यह रही कि इसमें तीसरी कक्षा के छोटे बच्चों से लेकर 12वीं तक के छात्रों ने बढ़-चढ़कर अपनी प्रतिभा दिखाई। कुल 100 नेशनल लेवल के सुपर-विनर्स चुने गए हैं। इनमें कक्षा 3 से 5 तक के 25 बच्चे, कक्षा 6 से 8 तक के 25 और कक्षा 9 से 12 तक के 50 छात्र शामिल हैं।

इन सभी 100 विजेताओं को न केवल 10,000 रुपये का नकद इनाम दिया जाएगा बल्कि इनके लिए सबसे बड़ा पल वह होगा जब ये गणतंत्र दिवस 2026 की परेड में कर्तव्य पथ पर विशेष अतिथि के तौर पर मौजूद रहेंगे।

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क्या था इस बार का नया अंदाज?

इस साल 8 सितंबर को जब वीर गाथा का पांचवा संस्करण लॉन्च हुआ तो इसमें कई नए रंग जोड़े गए। केवल निबंध या ड्राइंग ही नहीं बल्कि इस बार बच्चों ने शॉर्ट वीडियो, एंकरिंग और रिपोर्टिंग के जरिए भी अपनी बात रखी। सामरिक परंपरा यानी भारत की सैन्य विरासत को मुख्य विषय बनाया गया था।

बच्चों ने पृथ्वीराज चौहान, छत्रपति शिवाजी महाराज और कलिंग के राजा खारवेल जैसे ऐतिहासिक नायकों के साथ-साथ 1857 के क्रांतिकारियों और जनजातीय आंदोलनों के वीरों की गाथाओं को अपनी क्रिएटिविटी से जीवंत कर दिया।

सात समंदर पार भी पहुंचा भारत की वीरता का किस्सा

यह पहली बार है जब वीर गाथा की गूंज भारत की सीमाओं के बाहर भी सुनाई दी। विदेशों में स्थित सीबीएसई स्कूलों ने इसमें पहली बार हिस्सा लिया। 18 अलग-अलग देशों के 91 स्कूलों से करीब 28,000 से ज्यादा छात्रों ने अपनी एंट्रीज भेजीं जिससे यह प्रोजेक्ट अब एक अंतरराष्ट्रीय मंच बन गया है।

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प्रक्रिया काफी लंबी और बारीकी वाली रही। पहले स्कूल लेवल पर कार्यक्रम हुए, फिर जिला और राज्य स्तर पर मूल्यांकन किया गया। नेशनल लेवल तक 4,020 एंट्रीज पहुंचीं जिनमें से बेहतरीन 100 को चुना गया।

एक आंदोलन बनता ‘वीर गाथा’

आजादी के अमृत महोत्सव के तहत शुरू हुआ यह सफर साल-दर-साल बड़ा होता जा रहा है। जहां पहले साल इसमें सिर्फ 8 लाख बच्चे थे वहीं चौथे संस्करण तक यह आंकड़ा 1.76 करोड़ पहुंचा और अब 1.92 करोड़ के पार चला गया है।

मंत्रालय का मानना है कि यह सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं है बल्कि एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन बन चुका है जो बच्चों को अपनी जड़ों और सेना के शौर्य से जोड़ने का काम कर रहा है।

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