₹1000 पार LPG के बीच उज्ज्वला योजना में बड़ा बदलाव, अब ये परिवार होंगे बाहर

उज्ज्वला योजना के ताज़ा दिशानिर्देशों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अब जिन परिवारों की मासिक आय 10 हजार से अधिक है या जिनके पास वाहन है, उन्हें फ्री गैस कनेक्शन नहीं मिलेगा। डीलर भी दबाव में हैं।

  • उज्ज्वला योजना के नियम सख्त, लाखों पर असर
  • वाहन या ज्यादा आय वालों को नहीं मिलेगा लाभ
  • नई गाइडलाइन से डीलरों पर भी बढ़ा दबाव
  • महंगे सिलेंडर के बीच गरीब परिवारों की बढ़ी चिंता

Ujjwala Yojana Update: देश के कई हिस्सों में एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमत हजार रुपये के पार पहुंच चुकी है। रसोई में धुएं से राहत दिलाने वाली उज्ज्वला योजना (Ujjwala Yojana) अब एक नए मोड़ पर है। केंद्र सरकार ने इस योजना के तहत नए दिशानिर्देश जारी किए हैं जिसने लाखों परिवारों को हैरान कर दिया है।

किन्हें नहीं मिलेगा अब लाभ

केंद्र ने साफ कर दिया है कि अगर कोई उपभोक्ता अपने नाम पर तीन या चार पहिया वाहन, मोटरबोट (Fishing Boat) या कृषि के लिए इस्तेमाल होने वाली मशीनें रखता है तो उसे फ्री उज्ज्वला गैस कनेक्शन नहीं दिया जाएगा।

इतना ही नहीं जिनके घर का आकार (Carpet Area) 30 वर्ग मीटर से अधिक है या परिवार की मासिक आय 10,000 रुपये से ज्यादा है वे भी अब इस योजना के दायरे से बाहर होंगे।

डीलरों पर बढ़ा दबाव

नए निर्देशों के तहत अब आवेदन जांचने की जिम्मेदारी भी गैस डीलरों पर डाल दी गई है। डीलर कहते हैं कि ये जिम्मेदारी उनके लिए भारी पड़ रही है क्योंकि अगर किसी आवेदन में जानकारी छिपाई गई तो जवाबदेही उनसे ली जाएगी।

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पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्धमान जिले के गैस डीलर राजीव भौमिक ने बताया कि “जो उपभोक्ता आवेदन कर रहे हैं उन्हें गैस कनेक्शन तभी मिलेगा जब सभी शर्तें पूरी होंगी।”

गरीब परिवारों पर दोहरी मार

महंगाई के इस दौर में 10 हजार रुपये महीना कमाने वाला परिवार भी मुश्किल से गुज़ारा कर पाता है। कई घरों में महिलाएं उज्ज्वला योजना से गैस कनेक्शन मिलने के बाद ही चूल्हे के धुएं से मुक्त हुई थीं। अब नए मानदंडों ने दोबारा उस राहत पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कई लोग कहते हैं कि उन्होंने परिवार चलाने के लिए लोन पर छोटा वाहन (Toto) खरीदा है, पर अब वही वाहन उन्हें योजना से बाहर कर दे रहा है। ग्रामीण इलाकों में जहां आज भी चूल्हे का धुआं आम है वहां ये नियम उम्मीद की लौ बुझाने जैसे हैं।

केंद्र का तर्क और पुराना अनुभव

सरकार का कहना है कि पिछले चरण में कई ऐसे परिवारों ने योजना का लाभ ले लिया था जो आर्थिक रूप से सक्षम थे। बाद में कई लोगों ने सिलेंडर रीफिल (Refill) तक नहीं कराया।

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ऐसे में सरकार ने डीलरों को निर्देश दिया था कि गलत तरीके से दिए गए कनेक्शन वापस लिए जाएं। इसके बाद डीलरों और उपभोक्ताओं के बीच कई विवाद भी हुए।

भरोसे और राहत के बीच झूलती उम्मीद

नई गाइडलाइनों के बाद उज्ज्वला योजना अब भरोसे, ईमानदारी और आर्थिक वर्गीकरण की नई परीक्षा में है। एक तरफ सरकार का तर्क है कि असली लाभार्थियों को सहायता मिलनी चाहिए वहीं दूसरी ओर गरीब परिवार बढ़ती LPG कीमतों और सख्त मानदंडों के बीच फंसे दिखाई दे रहे हैं।

गांवों की महिलाओं के लिए यह मुद्दा सिर्फ रसोई का नहीं बल्कि सम्मान और स्वास्थ्य से भी जुड़ा है। क्योंकि रसोई का धुआं भले अब घट गया हो, मगर राहत की सांस फिर से महंगी होती जा रही है।

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