Unnao Case: सुप्रीम कोर्ट से राहत के बाद सर्वाइवर बोलीं – ‘जब तक सेंगर को फांसी नहीं होगी, लड़ाई जारी रहेगी’
उन्नाव रेप केस में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट द्वारा सेंगर को मिली ज़मानत पर रोक लगा दी। फैसले के बाद सर्वाइवर ने कहा कि उनकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई और वह फांसी की सज़ा तक न्याय के लिए संघर्ष जारी रखेंगी।
- सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की ज़मानत पर रोक लगाई
- सर्वाइवर बोलीं – फांसी तक लड़ाई जारी
- CBI की याचिका पर सुनवाई, सेंगर से जवाब मांगा
- परिवार को न्याय अधूरा, भावनात्मक संघर्ष जारी
दिल्ली (NFLSpice News): उन्नाव रेप केस की सर्वाइवर ने सुप्रीम कोर्ट के ताज़ा फैसले पर राहत की सांस लेते हुए साफ कर दिया है कि उनकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई। पूर्व बीजेपी विधायक और दोषी कुलदीप सिंह सेंगर को सज़ा-ए-मौत दिलाने तक वह न्याय की राह पर डटी रहेंगी।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमें सेंगर की उम्रकैद की सज़ा को निलंबित कर उन्हें ज़मानत दी गई थी। यह फैसला आते ही सर्वाइवर ने कहा कि यह केवल एक पड़ाव है, मंज़िल नहीं।
‘मुझे पता था सुप्रीम कोर्ट न्याय करेगा’
अपनी आवाज़ में सुकून और संघर्ष का मिश्रित कंपन लिए सर्वाइवर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें पहले से भरोसा था कि सुप्रीम कोर्ट हस्तक्षेप करेगा।
इसे भी पढ़ें: विराट कोहली का इंस्टाग्राम अकाउंट अचानक गायब: क्या ‘किंग कोहली’ ने सोशल मीडिया को कह दिया अलविदा? करोड़ों फैंस हैरान!
उन्होंने कहा, “मुझे भरोसा था कि सुप्रीम कोर्ट न्याय देगा। मेरा संघर्ष अभी चल रहा है और आगे भी चलेगा। जब तक उसे फांसी नहीं होती, न मुझे और न मेरे पिता को शांति मिलेगी।”
उनके मुताबिक यह फैसला सिर्फ व्यक्तिगत जीत नहीं बल्कि उन सभी के लिए उम्मीद है जो न्याय की तलाश में हैं।
भावनात्मक बोझ, टूटा परिवार और अधूरी राहत
लंबे समय से अदालतों के चक्कर, सुरक्षा की चिंता और समाजिक दबाव ने इस केस को सिर्फ एक कानूनी प्रक्रिया से कहीं आगे बढ़ा दिया है। सर्वाइवर मानती हैं कि भावनात्मक बोझ आज भी उतना ही भारी है जितना शुरुआत में था।
इसे भी पढ़ें: पीयूष गोयल का स्टार्टअप्स को गुरुमंत्र: रिस्क लेने से ही बनेगा विकसित भारत, स्पेस और डीप-टेक में मचेगी धूम
उन्होंने कहा, “मेरे पिता को न्याय तभी मिलेगा जब उसे फांसी होगी। यही सच्ची जीत होगी।”
बातचीत में उन्होंने बार-बार यह जरूर जताया कि उनका विश्वास न्यायपालिका में था और आगे भी रहेगा। उन्होंने कहा, “मैं किसी अदालत पर आरोप नहीं लगाती। सभी अदालतों पर भरोसा है लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने फिर साबित किया है कि वहां न्याय मिलता है।”
CBI की याचिका पर सुनवाई जारी
सुप्रीम कोर्ट में यह सुनवाई CBI की उस याचिका पर हुई, जिसमें हाईकोर्ट के ज़मानत आदेश को चुनौती दी गई थी। अदालत ने सेंगर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
2017 में हुए इस मामले ने पूरे देश में नाराज़गी की लहर पैदा की थी, जिसके बाद न सिर्फ राजनीतिक हलके बल्कि समाजिक मंचों पर भी महिलाओं की सुरक्षा और नेताओं की जवाबदेही पर सवाल उठे।
देशभर में न्याय की नजरें टिकीं
यह केस सिर्फ अदालत या दो पक्षों की लड़ाई भर नहीं बल्कि उन तमाम महिलाओं के संघर्ष का प्रतीक बन चुका है, जो सत्ता और सिस्टम के सामने अकेली पड़ जाती हैं। सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई अब इस पर तय करेगी कि सेंगर की सज़ा बहाल रहती है या मामले में आगे क्या मोड़ आता है।
इस श्रेणी की और खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें: भारत



