बांग्लादेश में ‘क्रांति’ के बाद अब ‘भीड़तंत्र’ पर प्रहार: प्रधानमंत्री तारिक रहमान का कड़ा रुख, क्या थमेगा हिंदुओं पर हमला?
बांग्लादेश में तारिक रहमान सरकार ने 'भीड़तंत्र' के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। मंत्री मिर्जा फखरुल ने कहा कि कानून-व्यवस्था पहली प्राथमिकता है। रिपोर्ट में देखें अंतरिम सरकार के दौरान हिंदुओं पर हुई हिंसा के डराने वाले आंकड़े और BNP की नई रणनीति।
- भीड़तंत्र (Mobocracy) के खिलाफ BNP सरकार का शंखनाद
- Gen-Z और प्रदर्शनकारियों को सख्त चेतावनी
- अल्पसंख्यकों और हिंदुओं की सुरक्षा पर अंतरराष्ट्रीय दबाव
- मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल की विफलता और डेटा का सच
नई दिल्ली/ढाका। बांग्लादेश की सत्ता में एक बड़े उलटफेर के बाद अब ‘व्यवस्था परिवर्तन’ की सुगबुगाहट तेज हो गई है। 2026 के आम चुनावों में प्रचंड जीत हासिल कर प्रधानमंत्री की कुर्सी संभालने वाले तारिक रहमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती वही ‘सड़क की राजनीति’ बन गई है जिसने पिछली सरकारों की नींव हिला दी थी।
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेतृत्व वाली नई सरकार ने अब साफ कर दिया है कि देश को किसी भी कीमत पर ‘भीड़तंत्र’ (Mobocracy) के हवाले नहीं किया जाएगा।
प्रशासनिक सख्ती की नई लकीर
राजधानी ढाका में पत्रकारों से मुखातिब होते हुए सरकार के सबसे कद्दावर नेता और कैबिनेट मंत्री मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने दो टूक शब्दों में कहा कि अब देश अराजकता से नहीं बल्कि कानून से चलेगा।
आलमगीर का यह बयान उन प्रदर्शनकारियों के लिए एक सीधा संदेश माना जा रहा है जो शेख हसीना की विदाई के बाद भी सड़कों पर रसूख आजमाने की कोशिश कर रहे हैं।
फखरुल ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बहाल करना सरकार की शीर्ष तीन प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने संकल्प दोहराया कि “प्रशासन अब भीड़ द्वारा की जाने वाली हिंसा पर नकेल कसने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है।”
Gen-Z का उबाल और ‘यूनुस युग’ के जख्म
गौरतलब है कि बांग्लादेश के राजनीतिक परिदृश्य में Gen-Z (युवा पीढ़ी) ने एक निर्णायक भूमिका निभाई थी, जिसके विरोध प्रदर्शनों ने सत्ता परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त किया। हालांकि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान देश ने हिंसा का एक ऐसा दौर देखा जिसने मानवाधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। विशेषकर अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के लिए यह समय किसी डरावने सपने से कम नहीं था।
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डराने वाले आंकड़े: अल्पसंख्यकों पर कहर
मानवाधिकार संगठनों की हालिया रिपोर्टों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चौंका दिया है।
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संस्कृति फाउंडेशन के अनुसार, जनवरी 2026 के भीतर ही भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या (Mob Lynching) की 21 वारदातें हुईं, जबकि 28 लोग गंभीर रूप से घायल हुए।
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हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद का डेटा और भी भयावह है। साल 2025 में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की 522 घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें मंदिरों में तोड़फोड़, लूटपाट और बलात्कार जैसे जघन्य अपराध शामिल हैं।
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आंकड़ों के मुताबिक, 2025 से जनवरी 2026 के बीच 116 अल्पसंख्यकों की जान गई जिनमें सबसे अधिक संख्या हिंदू समुदाय की थी।
इतना ही नहीं अंतरिम सरकार के दौरान प्रेस की आजादी पर भी हमला हुआ जहां मीडिया संस्थानों और पत्रकारों पर 640 से अधिक हमले दर्ज किए गए। अब तारिक रहमान सरकार के सामने चुनौती न केवल इन घावों को भरने की है बल्कि दुनिया को यह दिखाने की भी है कि बांग्लादेश एक समावेशी लोकतंत्र की ओर बढ़ रहा है।



